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Poem on Bhagat Singh in Hindi


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कहाँ हो तुम भगत सिंह! 
क्यों नहीं लेते फिर से जन्म 
हमारा ये देश तो आज भी गुलाम है 
पुकारती तुम्हें, देश की आवाम है 

पहले गोरो से
अब कालो से 
डर लगता है 
देश के ही रखवालों से 

क्रांति के दूत भगत सिंह! 
तुम आते क्यों नहीं 
एक बार फिर से 
क्रांति की अलख जगाते क्यों नहीं 

तुम्हारी उम्मीदों का सूरज 
कब का अस्त हो चुका है 
तुम्हारा क्रांति का सन्देश 
जाने कहाँ लुप्त हो चुका है 

नौजवानों में फिर से ऊर्जा भरने को 
देश के लिए कुछ कर गुजरने को 
भगत सिंह! तुम्हें आना ही होगा 
क्रांति का सन्देश जन-जन तक पहुँचाना ही होगा

Monika Jain 'पंछी'

2 comments:

  1. Really an inspirational poem...........well done.......!!

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