Thursday, December 17, 2015

Story on Friendship in Hindi

Story on Friendship Day in Hindi for Kids. Dosti ki Kahani, Two Best Mitra, Animals True Friends Tales, Mitrata Diwas Messages, Divide and Rule. मित्रता दिवस, दोस्ती की कहानी, सच्चा मित्र, दोस्त.

बोनी और टोनी की दोस्ती

बोनी बन्दर और टोनी भालू दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। उनकी मित्रता की चर्चा पूरे सुन्दर वन में थी। दोनों एक दूसरे के लिए जान की बाजी लगाने को तैयार रहते थे। बोनी का अंगूरों का एक बगीचा था, जिसके अंगूर बहुत मीठे और रसीले थे। जबकि टोनी कपड़ों की सिलाई का काम करता था। बोनी हर रोज अपने बगीचे के अंगूर और टोनी के सिले हुए कपड़े बेचने बाजार जाता था। टोनी भी बोनी के बगीचे की देखरेख में उसकी बहुत मदद करता था। टोनी के रहते किसी की हिम्मत न होती कि बगीचे के अंगूर चुरा सके। इस तरह दोनों का काम बहुत अच्छे से चल रहा था।

कुछ ही दिन पहले चंपा लोमड़ी सुंदरवन में रहने आई थी। वह बहुत चालाक थी। जब उसे बोनी के मीठे और रसीले अंगूरों के बगीचे के बारे में पता चला तो उसका मन ललचा गया।

वह सोचती, ‘काश! मुझे हर रोज ये मीठे-मीठे अंगूर खाने को मिल जाए तो रोज-रोज ये भोजन ढूंढने के झंझट से ही छुटकारा मिल जाए।’

उसने एक तरकीब सोची। उसने अपनी मीठी-मीठी बातों से टोनी और बोनी से दोस्ती बढ़ाई और उनका विश्वास जीता।

एक दिन जब बोनी अंगूर और कपड़े बेचने बाजार गया तो चम्पा टोनी के पास आई और बोली, ‘बोनी भाई का जन्मदिन आने वाला है। आपने उनके लिए क्या खास सोचा है?’

‘खास तो कुछ नहीं। बस मैंने बोनी के लिए एक पोशाक सिली है, वही उसे तोहफे में दूंगा।’ टोनी ने कहा।

‘सिर्फ पोशाक से क्या होगा? आपको उनके लिए केक और मिठाई भी लानी चाहिए। आखिर वो आपके सबसे अच्छे दोस्त हैं।’ चंपा ने कहा।

‘तुम बिल्कुल सही कहती हो चंपा बहन! पर ये सब तो शहर में मिलता है और इस तरह बगीचे को छोड़कर मैं शहर में नहीं जा सकता।’ टोनी उदास होकर बोला।

‘आपने मुझे बहन कहा है तो क्या मैं आपके लिए इतना भी नहीं कर सकती। आप बेफिक्र होकर शहर जाइए और केक, मिठाई व सजावट का सामान ले आइये। शाम को बोनी भाई के आने से पहले लौट आइयेगा ताकि उन्हें कुछ पता ना चले और ये टोकरियाँ ले जाइए क्योंकि आपके पास बहुत सारा सामान होगा।’ चंपा ने बोनी के बगीचे से अंगूरों को भरने वाली कुछ खाली टोकरियाँ टोनी को थमाते हुए कहा।

टोनी चंपा की बातों में आ गया और चंपा को धन्यवाद कहकर शहर निकल गया।

टोनी के जाते ही चंपा लोमड़ी अंगूरों पर टूट पड़ी। उसने भरपेट अंगूर खाए और बोली, ‘वाह! मजा आ गया इतने रसीले और मीठे अंगूर खाकर।’

उसने बहुत सारे अंगूर तोड़कर अपने घर में भी छिपा लिए। इसके बाद वह दौड़ी-दौड़ी बाजार पहुँची और बोनी के पास जाकर बोली, ‘बोनी भाई, बोनी भाई! मैंने अभी-अभी टोनी भाई को बहुत सारे अंगूरों की टोकरियाँ भरकर शहर बेचने को ले जाते देखा है।’

‘क्या बोल रही हो चंपा बहन? तुम होश में तो हो? टोनी बिना मुझे बताये ऐसा कोई काम कभी नहीं कर सकता।’ बोनी पूरे विश्वास से बोला।

‘आपको मुझ पर विश्वास नहीं है तो आप खुद चलकर देख लीजिये। टोनी भाई वहाँ नहीं हैं।’ चंपा ने कहा।

चंपा के बार-बार कहने पर बोनी अपना सामान बांधकर बगीचे पर आया। बगीचे पर टोनी नहीं था।

बहुत सारे अंगूर और टोकरियाँ भी गायब थी। यह सब देखकर उसके होश उड़ गए। उसे बहुत दुःख हुआ और गुस्सा भी आया।

‘जिसे मैं अपना सबसे अच्छा दोस्त समझता था, उसी ने मेरे साथ धोखा किया। अब मैं टोनी से कभी बात नहीं करूँगा। तुम टोनी के ये कपड़े उसे लौटा देना और कह देना कि आज से वह मेरे बगीचे की ओर आँख उठाकर भी ना देखे।’ बोनी ने कपड़े चंपा के हाथों में देते हुए कहा।

‘ठीक है बोनी भाई, आप परेशान मत होइये और घर जाकर आराम कीजिये।’ चंपा ने कहा।

‘तुम बहुत अच्छी हो चंपा बहन! अगर तुम ना होती तो मुझे टोनी की सच्चाई का पता कभी ना चल पाता। मैं तुम्हारा यह अहसान कभी नहीं भूलूंगा।’ यह कहकर बोनी घर चला गया।

कुछ देर बाद टोनी शहर से लौटकर बगीचे पर आया। उसके आते ही चंपा लोमड़ी उसके पास आई और बोली, ‘टोनी भाई, आप जब शहर गए थे तब बोनी भाई यहाँ आये थे।’

मैंने पूछा तो वे बोले, ‘कई दिनों से मेरे बगीचे से अंगूर गायब हो रहे हैं। मैं ये देखना चाहता था कि मेरी अनुपस्थिति में टोनी अंगूरों का क्या करता है? आज उसकी चोरी पकड़ी गयी। वह बिना मुझे बताये शहर जाकर अंगूर बेचता है।’

मैंने उन्हें बार-बार समझाया कि आप शहर उनके लिए केक और मिठाई लाने गए हैं पर उन्होंने मेरी एक न सुनी और ये कपड़े लौटा दिए और कहा, ‘टोनी से कह देना आज के बाद मेरे बगीचे की ओर आँख उठाकर भी न देखे।’

टोनी को यह सब जानकार बहुत बुरा लगा। उसने सोचा, ‘जिसे मैं अपना सबसे अच्छा दोस्त समझता हूँ, वही मुझ पर भरोसा नहीं करता।’

गुस्से में टोनी केक और मिठाई वहीँ पटक कर चला गया। चंपा लोमड़ी को मुफ्त का केक और मिठाई भी खाने को मिल गयी।

अगले दिन बोनी पूरे दिन बगीचे पर ही था। चंपा वहाँ आई और बोली, ‘बोनी भाई, आज आप बाजार नहीं गए।’

‘मैं बाजार चला जाऊँगा तो बगीचे की रखवाली कौन करेगा?’ उदास बोनी ने कहा।

‘मेरे रहते आपको चिंता करने की कोई जरुरत नहीं। अगर आप चाहें तो अब से मैं आपके बगीचे की देखरेख कर लूंगी। बस हाँ, भोजन के समय मुझे घर जाना होगा।’ चंपा ने कहा।

‘भोजन के लिए तुम्हें कहीं ओर जाने की क्या जरूरत है? जब भी तुम्हें भूख लगे तुम बगीचे से अंगूर खा लेना। तुम मेरे लिए इतना कुछ कर रही हो तो क्या मैं तुम्हारे लिए इतना भी नहीं कर सकता।’ यह कहकर बोनी बाजार चला गया।

बोनी और टोनी कई बार रास्ते में एक दूसरे को मिलते पर बिना बात किये आगे बढ़ जाते। बचपन के इतने अच्छे दोस्त अब एक दूसरे को फूटी आँख भी ना सुहाते। पर जब से दोनों अलग हुए थे तब से ही उदास रहने लगे थे। दोनों के व्यवसाय में भी घाटा होने लगा था क्योंकि पहले तो टोनी बोनी के बगीचे की बहुत अच्छे से देखभाल करता था पर अब चंपा लोमड़ी इतना ध्यान नहीं देती थी और ढेर सारे अंगूर खा जाती थी। उधर टोनी अब खुद बाजार में कपड़े बेचने जाता था। पर वह बेचने की कला में माहिर नहीं था। इसलिए ज्यादा कपड़े नहीं बेच पाता। इसलिए दोनों बहुत परेशान रहने लगे।

बोनी और टोनी की दोस्ती टूटने की खबर पूरे सुन्दर वन में फ़ैल गयी। सभी को बहुत आश्चर्य हुआ।

जम्बो हाथी और लम्बू जिराफ दोनों सुन्दर वन में सबसे समझदार और वृद्ध थे। दोनों को जब ये खबर मिली तो उन्हें बहुत दुःख हुआ।

‘जब से ये चंपा लोमड़ी आई है तभी से सुंदरवन में सब उल्टा हो रहा है। कई जानवर चंपा की शिकायत लेकर आते हैं। जरुर चंपा ने ही कुछ किया होगा।’ जम्बो हाथी ने कहा।

‘आप बिल्कुल सही कहते हो जम्बो भाई! हमें टोनी और बोनी को वापस मिलाने और चंपा को सबक सिखाने के लिए कुछ सोचना चाहिए।’ लम्बू जिराफ ने कहा।
दोनों ने एक उपाय सोचा। जम्बो हाथी बहुत अच्छा चित्रकार था। उसने बचपन से ही बोनी और टोनी की दोस्ती देखी थी। उसने अपने घर के एक कमरे की दीवारों पर बोनी और टोनी की दोस्ती को दर्शाते, एक दूसरे को गले लगाते और एक दूसरे के साथ खेलते बोनी और टोनी के कई चित्र बनाये और बोनी और टोनी के घर अपने यहाँ दावत का निमंत्रण भेज दिया। जब शाम को बोनी और टोनी जम्बो हाथी के घर आये तो वहाँ कोई नहीं था और चारों तरफ उन दोनों के कई चित्र बने हुए थे। उन चित्रों को देखकर उनकी दोस्ती की यादें ताजा हो गयी और दोनों की आँखों में आंसू आ गए। पर फिर भी उन्होंने एक दूसरे से बात नहीं की और जाने लगे। तभी पीछे से जम्बो हाथी और लम्बू जिराफ आये।

‘बोनी और टोनी तुम दोनों को मैं बचपन से जानता हूँ और तुम्हारी दोस्ती को भी। तुम दोनों सपने में भी एक दूसरे का बुरा नहीं सोच सकते। जरुर तुम लोगों को कोई ग़लतफ़हमी हुई है। किसी दूसरे की बातों में आकर अपनी इतनी अच्छी दोस्ती मत तोड़ो। जो भी गलतफहमी है वह अभी दूर करो। मुझे बताओ क्या हुआ है?’ जम्बो हाथी ने कहा।

जम्बो हाथी की बात सुनकर दोनों ने जो-जो चंपा लोमड़ी ने उनसे कहा था वह सब बताया। सारी बातें सुनकर दोनों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। उन्हें समझते देर न लगी कि चंपा लोमड़ी ने उन दोनों को झूठ बोलकर एक दूसरे के खिलाफ भड़काया था। उन्हें अपने किये पर बहुत पछतावा हुआ। दोनों ने एक दूसरे से माफ़ी मांगी, गले लगाया और कहा, ‘काका अगर आप दोनों ना होते तो हमें कभी सच का पता न चलता। आपका बहुत-बहुत आभार। अब हम उस चंपा लोमड़ी को नहीं छोड़ेंगे।’ यह कहकर दोनों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ा और लाठी लेकर चंपा के घर की तरफ गए।

चंपा ने जब दोनों को साथ-साथ लाठी लेकर आते देखा तो वह समझ गयी कि उसकी चोरी पकड़ी गयी है। वह दुम दबाकर भागने लगी। बोनी और टोनी ने तब तक उसका पीछा किया जब तक वह सुन्दर वन की सीमाओं से बहुत दूर नहीं चली गयी।

इसके बाद बोनी और टोनी ने वादा किया कि अब वे किसी और की बातों में आकर अपनी दोस्ती कभी नहीं तोड़ेंगे। बोनी और टोनी फिर से हँसी-ख़ुशी रहने लगे।

By Monika Jain ‘पंछी’


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