Saturday, June 22, 2013

About Kanhaiyalal Mishra Prabhakar in Hindi


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कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का जन्म 29 मई, 1906 ई०  को सहारनपुर जिले के देवबंद गाँव में हुआ था। वे पंद्रह वर्ष की आयु में विद्यालय की पढ़ाई छोड़, स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। उन्होंने 1929 में अपने को स्वतंत्रता-संग्राम के लिए गांधीजी के हाथों सौंप दिया और 1930 से 1947 तक स्वतंत्रता - संग्राम की जुझारू टोली में रहे। साथ ही 1930, 1932 और 1942  में वे जेल भी गए। 

वे उन थोड़े से साधकों में हैं, जिन्हें साहित्य और पत्रकारिता में एक साथ प्रथम श्रेणी की सफलता मिली। उनके साहित्य पर अनेक विश्वविद्यालयों में शोध - कार्य हो चुका है और हो रहा है। मेरठ विश्वविद्यालय ने उन्हें डी०  लिट ०  की मानक उपाधि  से सम्मानित किया है। उन्होंने लघुकथा, निबन्ध, संस्मरण और रिपोतार्ज को नई शक्ति दी तथा अनेक विधाओं में लिखा। उनकी अपनी शैली के इतने भेदोपभेद हैं कि उन्हें 'शैलियों का शैलीकार' कहा जाता है। 

प्रमुख रचनाएँ - 'तपती पगडंडियों पर पद यात्रा', 'ज़िन्दगी मुस्कुराई', 'बाज पायलिया के घुंघारे', 'मोटी हो गयी सेना', 'क्षण बोले कण मुस्काए', 'दीप जले, शंख बजे' आदि।