Saturday, June 1, 2013

Poem on Aids Day in Hindi


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पार्क में आँख मिचौनी खेल रहे बच्चों से 
कुछ पल के लिए नज़रें हटी 
तो देखा 
एक कोने में 
एक मासूम सी बच्ची 
अकेले खुद से बातें करते 
खेल रही थी कुछ पत्थर के टुकड़ों से 

उसकी मासूमियत से खिंची 
 मैं उसके पास गयी 
पर मुझे देख वो मासूम 
सहम सी गयी
मैंने प्यार से उसके सर पे हाथ फेरा 
 वो अचानक उठकर 
दूर जा खड़ी हुई 

उसका ये बर्ताव 
मैं समझ नहीं पायी 
बच्चे होते हैं मनमौजी
 यह सोचकर लौट आई  

खेलते बच्चों के ग्रुप से 
एक बच्चा पास आया 
और दूर बैठी उस लड़की कि ओर
 इशारा करके बोला

दीदी अब उस लड़की को कभी नहीं छूना 
उसे एड्स है आप उससे दूर ही रहना 
हमारे मम्मी पापा ने हमें मना किया है 
उसके साथ कभी ना खेलने का आदेश दिया है 

यह कहकर वह बच्चा फिर से खेलने दौड़ गया 
पर मेरे मन मस्तिष्क में 
ना जाने कितने सवाल छोड़ गया 

मैं देर तक उस मासूम को देखती रही
क्यों घिरा उस पर ये वज्र 
जिसकी कोई गलती भी नहीं 
उस पर उसका बहिष्कार करता यह संकीर्ण समाज 
उफ्फ ! जितना भी सोचूं 
मैं खुद में और ज्यादा उलझती गयी

Monika Jain 'पंछी'