Monday, June 10, 2013

Poem on Eye Donation in Hindi


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आज जब देखा एक नेत्रहीन को 
सोचा 

कितने भाग्यशाली हैं हम 
जो देख सकते हैं सारी दुनिया
सोचो जरा उनके बारे में 
जिन्हें नसीब ना हो पायी 
जीवन की रंग बिरंगी झलकियाँ 

जीवन के हर रंग से है वो बेखबर 
प्रकृति की सुन्दरता देखने को 
नहीं मिली उन्हें कोई नज़र 

क्या हमारा कर्त्तव्य नहीं 
कि हम कर दें उनके अंधेरों को रोशन 
मृत्यु के बाद अपने नेत्र दान कर 
दे दें उन्हें एक नया जीवन 

कितना अच्छा होगा 
जब हमारे जाने के बाद भी हमारी आँखें 
इस रंग बिरंगी दुनिया को देख पायेगी 
अब तक जिनके सोये थे सपने 
उनके जीवन में नए रंग लाएगी 

Monika Jain 'पंछी'