Thursday, June 13, 2013

Poem on Hindustan Pakistan in Hindi


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ये जो हिन्द पाक में तनातनी है 
स्थिति इनकी ये कबसे बनी है ?

इतने सालों में निकला नहीं 
इसका कोई हल 
सरकारे भी राजनीति कर 
जनता को रही है छल 
निदान नहीं सिर्फ आपसी वार्तालाप 
संपर्क ट्रेने और मेल मिलाप 
मिटनी चाहिए दिल से आपसी दुश्मनी है 

ये जो हिन्द पाक में तनातनी है 
स्थिति इनकी ये कबसे बनी है ?

इंसान से इंसान की नफरत 
ये तो हो गयी है इंसानी फितरत 
आतंक मचाना, खून बहाना 
चोट करना लगाकर घात 
अब हो गयी है आम बात 
कठिन नहीं यह काम 
होती बहुत आसानी है 

ये जो हिन्द पाक में तनातनी है 
स्थिति इनकी ये कबसे बनी है ?

कुर्सी की खातिर हुआ बँटवारा 
फिर दंगों ने हजारों को मारा 
बच्चे बूढ़े हुए अनाथ 
औरतें हुई बेघर बेसहारा 
रुक सी गयी जीवन की धारा 
वर्षों से खेलते रहें 
सरहदों पर खेल खूनी है

ये जो हिन्द पाक में तनातनी है 
स्थिति इनकी ये कबसे बनी है ?

आतंकियों ने की सीमाएँ पार 
लिए हाथ में बन्दूक और तलवार 
झूठी नफ़रत और घृणा से 
किया इंसानी सीने पर वार 
करुण क्रंदन और चीखें कह रही है 
सुहागनों की मांग और माताओं की गोद 
अब तो हो गयी सूनी है 

ये जो हिन्द पाक में तनातनी है 
स्थिति इनकी ये कबसे बनी है ?

अनिल कुमार बिहारी 
ट्यूब बारीडीह, जमशेदपुर