Monday, June 3, 2013

Poem on Hope in Hindi


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आशा! आशा! आशा! 
सबकी है ये आशा 
कब पूरी होगी 
अपनी अभिलाषा 

जितना जाओ पास 
उतना दूर वो जाती है 
फिर भी ये अभिलाषा 
छोड़ी नहीं जाती है 

मन की इस अभिलाषा को 
हम श्रम से सजाते हैं 
और अपने जीवन पथ पर 
आगे बढ़ते जाते हैं 

जीवन में वे ही सफल कहलाते हैं 
जो आशा को कर्म के साथ अपनाते हैं 
वो नहीं जो सारी उम्र 
आशा के भरोसे रह जाते हैं 

Naveen Kumar