Poem on Labour Day in Hindi


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क्या सिर्फ इसलिए कि 
वह सड़क झाड़ता है 
और तुम 
सूट बूट पहन कर 
ऑफिस में बैठते हो 
उसका काम छोटा 
और तुम्हारा काम 
बड़ा हो जाता है ?

सोचो!
अगर महीनों तक 
तुम्हारी गली की सड़के और नालियों की 
 साफ़-सफाई ना हो पाए 
और तुम्हारे मौहल्ले में 
कचरे का ढ़ेर लग जाए।

तब अपने ही घर में तुम्हारा 
सांस लेना भी मुश्किल हो जायेगा 
तब तुम्हारा ऑफिस के बड़े पद वाला 
रुबाब कहाँ जायेगा ?


इसलिए 
काम तो कोई भी 
छोटा या बड़ा नहीं  होता 
बल्कि अपनी जगह 
हर काम 
महत्वपूर्ण होता है।

श्रम तो बस एक पूजा है 
जिसमें ना कोई ऊँचा 
और ना कोई नीचा है। 

Monika Jain 'पंछी' 

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