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Poem on Papa in Hindi


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पूरे घर की संभाले कमान 
बात मन की जो ले जान 
अपनी खुद की सुध छोड़ 
जो रखे सबका पूरा ध्यान 
वो पिता ही है श्रीमान्

पल-पल हर पल 
अपनों की खुशियों की खातिर 
अंगारों पे चल-चल 
करता रहता जो श्रम संधान 
वो पिता ही है श्रीमान्

मांगे सबकी वह पूरा करता 
पर कभी ना आँहें भरता 
सबके चेहरे पर लाता जो 
एक प्यारी-सी मुस्कान 
वो पिता ही है श्रीमान्

गम का घूँट पीया अकेले 
सबकी मुसीबत जो अपने सर ले ले 
टूटता जुड़ता संभलता 
हर दिन देता नया इम्तिहान 
वो पिता ही है श्रीमान्

बूँद नहीं आंसू के आँखों पर 
अन्दर उमड़ रहा समंदर 
सुना ना पाए सबको अपनी 
जो व्याकुल मन की गान 
 वो पिता ही है श्रीमान्

अनिल कुमार बिहारी
ट्यूब बारीडीह, जमशेदपुर 
                   

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