Sunday, June 16, 2013

Story on Heaven and Hell in Hindi


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एक साधक था। एक योद्धा उसके पास आया और कहने लगा - महाराज! स्वर्ग क्या है और नरक क्या है, मुझे बताएं। उसके हाथ में तलवार थी। उसे देखकर साधक बोला - तुम बहुत बड़े योद्धा बनते हो। व्यर्थ ही तलवार लटका रखी है किन्तु तुममें तेज नाम की चीज नहीं है। इतना कहना योद्धा का अपमान करना था। वह सोचने लगा - मैंने तो इन्हें कुछ कहा भी नहीं और इन्होंने इतनी बकवास कर डाली। साधक ने जब देखा की उसने क्रोध में आकर तलवार खींच ली है और क्रोध में उबलने लगा है तब उसने कहा - यही नरक है। यह सुनते ही योद्धा के हाथ से तलवार गिर गयी। वह क्षमा मांगने लगा। तब साधक ने कहा - यही स्वर्ग है। 
वस्तुतः अपने अहम् पर चोट लगने से जो कषाय बढ़ता है वह नरक का द्वार है और कषाय की उपशांति ही स्वर्ग का द्वार है। 

Courtesy : Swadhyay Sandesh