Wednesday, July 31, 2013

Family Quotes in Hindi


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  • Being a good husband / wife is not enough. The only key to happy family is balance between each and every relation ~ Monika Jain 
  • केवल एक अच्छा पति या पत्नी बनना पर्याप्त नहीं हैं. हर एक रिश्ते के बीच संतुलन ही एक सुखी परिवार का आधार है. 
  • A family in harmony will prosper in everything ~ Chinese Proverb . 
  • वह परिवार जिसमें एकता होती है वह हर तरह से समृद्ध बनता है. 
  • The strength of a family, like the strength of an army, is in its loyalty to each other ~ Mario Puzo, The Family 
  • एक सेना की तरह ही एक परिवार की शक्ति एक दुसरे के प्रति निष्ठा में होती है. 
  • Love makes a family ~ Gigi Kaeser 
  • परिवार प्यार से बनता है. 
  • Family is not an important thing, it's everything ~ Michael J. Fox 
  • परिवार एक महत्वपूर्ण चीज नहीं है यह सब कुछ है. 
  • परिवार ही संसार में सबसे महत्वपूर्ण है ~ लेडी डायना 

Monday, July 29, 2013

Story on Ideal Life in Hindi


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एक बार एक व्यक्ति संत कबीर के पास आया और पूछा - मुझे गृहस्थ बनना चाहिए या फिर सन्यासी ? कबीर ने कहा - जो भी बनो पर उसमें पूर्णता प्राप्त करने की कोशिश करो. कबीर ने अपनी धर्मपत्नी को आवाज़ दी. दोपहर का समय था फिर भी उन्होंने अपनी पत्नी से दीपक जलाकर लाने को कहा. पत्नी ने कुछ भी नहीं कहा और दीपक जलाकर ले आई. कबीर ने कहा - अगर गृहस्थ बनकर जीवन यापन करना हो तो एक दूसरे पर भरोसा होना चाहिए जिससे दूसरे की इच्छा हमारी इच्छा बन जाए. 

इसके बाद कबीर उस व्यक्ति को एक पहाड़ी पर ले गए जहाँ एक वृद्ध महात्मा निवास करते थे. कबीर ने सन्यासी से पूछा - आपकी आयु कितनी है ? महात्मा ने उत्तर दिया - अस्सी वर्ष. कुछ समय तक वार्तालाप करने के बाद कबीर ने सन्यासी से पुनः उनकी आयु पूछी. महात्मा ने फिर से कहा - 80 वर्ष.  कबीर व्यक्ति के साथ नीचे आ गए और महात्मा से भी नीचे आने को कहा. वृद्ध महात्मा हाँफते हुए नीचे आये. महात्मा ने नीचे बुलाने का कारण पूछा तो कबीर ने फिर से प्रश्न किया - आपकी उम्र कितनी है ? महात्मा के चेहरे पर कोई भी भाव नहीं आया और उन्होंने उत्तर दिया - 80 वर्ष. कबीर ने व्यक्ति से कहा - अगर तुम सन्यासी बनना चाहते हो तो ऐसे सन्यासी बनो कि तुम्हे कभी क्रोध ना आये.


Alfred Nobel Story in Hindi


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अल्फ्रेड नोबेल एक बार अखबार पढ़ रहे थे। शोक समाचार वाले कॉलम में उन्हीं की मृत्यु की सूचना देखकर वे चौंक उठे। समाचार पत्र ने गलती से किसी और व्यक्ति की जगह अल्फ्रेड नोबेल का नाम प्रकाशित कर दिया था। अल्फ्रेड नोबेल ने सोचा- अगर सच में मेरी मृत्यु हो गयी होती तो लोग मुझे कैसे याद करते ? यह सोचकर उन्होंने पूरा शोक समाचार पढ़ा। उन्हें जानकर बहुत हैरानी हुई कि उनके लिए 'मौत का व्यापारी' और 'डाइनामाइट किंग' जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया था। क्योंकि उन्होंने डाइनामाइट का अविष्कार किया था। यह सब पढ़कर अल्फ्रेड नोबेल सोच में पड़ गए कि क्या मेरे इस दुनिया से जाने के बाद लोग मुझे ऐसे याद करेंगे ? उन्हें दुःख हुआ और उन्होंने तय किया कि वे 'मौत के व्यापरी' जैसी पहचान के साथ बिल्कुल नहीं मरेंगे। 

इस घटना के बाद से ही अल्फ्रेड नोबेल ने दुनिया भर में शांति स्थापित करने के प्रयास किये। उन्होंने 'नोबेल पुरस्कार' भी शुरू किये और इन्हीं पुरस्कारों के नाम से आज वे सारी दुनिया में पहचाने जाते हैं।

Moral : हमें अपने जीवन में अच्छे कार्य करने चाहिए ताकि हमारी मृत्यु के बाद हमें एक अच्छे व्यक्ति के रूप में जाना जाए।


Tuesday, July 23, 2013

Poem on Rose Flower in Hindi


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गुलाब !

कितना सुन्दर रंग तुम्हारा 
कितने हो मनभावन 
काँटों में भी खिलकर तुम 
लगते कितने पावन। 

सूरज की रश्मि शर्माती 
देख तुम्हारी आभा 
फूलों का राजा कहला
बन जाते बाग़ की शोभा।

कहीं किताबों में रहकर 
 बन जाते  प्रेम कहानी 
प्यार के रंग में रंगी शाम 
 बन जाती और रूमानी।

जीवन को महकाते तुम 
होठों को चहकाते तुम 
काँटों में मुस्काते तुम 
मुश्किल को धता बताते तुम। 

ईश्वर के चरणों में अर्पित 
भाग्य तुम्हारा इठलाता 
काँटों में खिलता जीवन 
जीने की राह दिखाता। 

Monika Jain 'पंछी'

Chanakya Quotes in Hindi


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  • फूल की सुगंध तो सिर्फ उसी दिशा में फैलती है जिस दिशा में हवा चलती है लेकिन किसी शख्स की अच्छाई की सुगंध हर दिशा में फैलती है.
  • भूतकाल के बारे में पछतावा या भविष्य की चिंता न करें. विवेकी लोग वर्तमान में जीते हैं.
  • दूसरों की गलतियों से सीखें क्योंकि ऐसी सभी गलतियाँ खुद करने के लिए आप जीवित नहीं रह पाएंगे.
  • ईश्वर मूर्तियों में नहीं, आपकी भावनाओं में है और आपकी आत्मा ही आपका मंदिर है. 
  • विदेश में विद्या ही माता के समान रक्षा करती है इसलिए विद्या को गुप्त धन कहा गया है. 
  • दुष्टों और काँटों से बचने के केवल दो ही उपाय हैं, जूतों से उन्हें कुचल देना या उनसे दूर रहना. 

Monday, July 22, 2013

Poem on Camel in Hindi


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रेगिस्तान का जहाज माना जाने वाला 
बन गया है उपेक्षा का शिकार 
मानव का था जो सच्चा साथी 
उसकी उपयोगिता हुई दरकिनार। 

ऊँट से मिलने वाला दूध 
करता असाध्य रोगों को दूर 
ऊन से बनते ढेरों सामान 
फिर हम क्यों हैं इतने क्रूर। 

ऊँटों को नहीं है कोई संरक्षण 
माँस के रूप में हो रहा है भक्षण 
पशुपालकों का नहीं कोई संगठन 
अंधी सरकार अपने में है मग्न। 

ऊँट पालक घुमक्कड़ ठहरे 
वोटों पर ना उनका प्रभाव 
वोट बैंक ना होने से 
उनकी नहीं कोई खैरख्वाह।

आओ नये विकल्प तलाशें 
पशुधन का हम करे बचाव 
अन्न, दूध पर भी होगी विदेशी निर्भरता 
समय रहते ना किया गर कोई उपाय। 

Monika Jain 'पंछी'

Sunday, July 21, 2013

Poem on Nonviolence in Hindi



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एक समय था जब 
पशु थे मानव की जीविका का आधार 
पर जब से इंसान ने की है तरक्की 
पशु हो रहे हैं हिंसा के शिकार।

पशुपालन में रूचि ना रही 
मिलावटी उत्पादों ने जगह बनायी है
 जैविक उर्वरकों को छोड़ 
रासायनिक खाद अपनायी है। 

चरागाहों पर भवन निर्माण 
पशु हो रहे बेघर हैं 
मांसाहार का बढ़ता उपभोग 
जबकि शाकाहार ही बेहतर है। 

सम्मान करें जीवों का हम 
प्रकृति उनकी भी माता है 
इतनी निर्दयता ठीक नहीं 
जीना सबको ही भाता है। 

Monika Jain 'पंछी'

Saturday, July 20, 2013

Great Quotes in Hindi



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  • मनुष्य को सिर्फ दो महान आध्यात्मिक चीज़ों की जरुरत होती है. पहला, दूसरों की गलतियों को भूलना और दूसरा, अपने अन्दर अच्छाई लाना ~ बिली ग्राहम 
  • संसार भर में सबसे महान चीज अगर कोई है तो वह है अच्छाई. हर इंसान के चरित्र में यह गुण जरुर होना चाहिए. बिना इसके मनुष्य, मनुष्य नहीं रहता है ~ फ्रैंसिस बैकॉन 
  • शक्ति के अभाव में विश्वास किसी काम का नहीं है. विश्वास और शक्ति, दोनों ही किसी महान काम को करने के लिए अनिवार्य है ~ सरदार वल्लभभाई पटेल 
  • किसी निर्माण और रचना में बड़ा अंतर यह है कि निर्माण को उसके बनने के बाद सराहा जाता है, लेकिन रचना, सृजन के अस्तित्व में आने से पहले भी उसके लिए दिल में चाहत होती है ~ चार्ल्स डिकेंस 
  • यह एक बहुत बड़ी भूल है कि बिना अच्छाई के कोई महान बन सकता है. मेरे अनुसार तब तक कोई शख्स महान नहीं बन सकता है जब तक कि उसके अन्दर अच्छाई का गुण मौजूद ना हों ~ बेंजामिन फ्रेंकलिन 
  • महान विचार केवल विचारशील व्यक्ति को समझ आते हैं। जबकि महान कर्म सम्पूर्ण मानवता को समझ आते हैं ~ थियोडोर रूजवेल्ट 

Friday, July 19, 2013

Mid Day Meal Scheme in Hindi



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एक बार तमिलनाडू के मुख्यमंत्री कामराज ने गाँव में कुछ बच्चों को अपनी गाय-भैंसों के साथ देखा। उन्होंने बच्चों से पूछा - आप स्कूल क्यों नहीं जाते हो ? एक बच्चा बोला- स्कूल जाने से क्या हमें खाना मिलेगा ? गाय भैंसों की देखभाल से तो हमें खाना मिलता है। इस घटना के बाद ही तमिलनाडु में मुख्यमंत्री के. कामराज ने 1960 में मिड डे मील की शुरुआत की। बाद में 28 नवम्बर, 2001 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस योजना को पूरे देश में लागू कर दिया गया। इस योजना को शुरू करने के निम्नलिखित उद्देश्य थे : 
  • पौष्टिक भोजन द्वारा गरीब बच्चों की भूख और कुपोषण से रक्षा करना। 
  • विद्यालयों में छात्रों की संख्या में वृद्धि करना। 
  • छात्रों को नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित करना। 
  • महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करवाना आदि। 
  • बच्चों में भाईचारे की भावना विकसित करना। 
  • जाति और धर्म के भेदभाव को दूर करना। 
मिड डे मील योजना को शुरू करने के उद्देश्य अच्छे थे। प्रारंभ में इसमें सफलता भी मिली पर बाकी योजनाओं की तरह ही यह योजना भी भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गयी। हर रोज अखबार में ऐसी ख़बरें पढ़ने को मिलती रहती है जिससे कभी-कभी ये लगता है कि ये योजना कुछ समस्याओं के निराकरण के लिए शुरू की गयी थी या फिर समाज की मुश्किलें बढ़ाने के लिए ?

कहीं पर अनाज शिक्षकों के घर पहुँच रहा है। कहीं पर पैसे खाने के चक्कर में ख़राब गुणवत्ता का अनाज पहुँचाया जा रहा है। कहीं खाने में छिपकली पड़ी हुई मिलती है तो कहीं खाने में जहर या कीड़े मिलते हैं।आये दिन बच्चें बीमार पड़ रहें है। कई बच्चें मृत्यु का ग्रास बन रहे हैं। लालच और स्वार्थ के चलते मासूम बच्चों की जिन्दगी को दांव पर लगाया जा रहा है। 

हाल ही में बिहार के छपरा जिले के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में विषाक्त मिड डे मील खाने से 23 बच्चों की मृत्यु हो गयी और 48 बच्चें बीमार पड़ गए। कोई इस घटना की वजह खाना पकाने में हुई लापरवाही को बता रहा है तो कोई इसे राजनैतिक साजिश बता रहा है। मासूमों की मौत पर भी राजनीति की जा रही है। 

अगर सख्ती से सही रूप में ऐसी योजनाओं का संचालन नहीं किया जा सकता है तो मासूमों की जिन्दगी और स्वास्थ्य की कीमत पर चल रही ऐसी योजनाओं का क्या फायदा? बेहतर है इन्हें बंद किया जाए। 

और कई सारे विकल्प है जो बच्चों को पढ़ाई जारी रखने के लिए लालायित कर सकते हैं। जैसे : 
  • पकाए गए भोजन की जगह फल, बिस्कुट के पैकेट या ऐसी ही अन्य वैकल्पिक चीजें वितरित की जा सकती है। 
  • किताबें, वस्त्र, स्टेशनरी का दूसरा सामान दिया जा सकता है। 
  • नियमित रूप से स्कूल आने वाले छात्रों को छात्रवृति दी जा सकती है। 
  • अन्य पारितोषिक जैसे स्कूल आने के लिए साइकिल की व्यवस्था आदि की जा सकती है। 
इसके अलावा बहुत जरुरी है बच्चों के स्वास्थ्य के साथ लापरवाही बरतने वालों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। सरकार द्वारा परिजनों को दिया गया मुआवजा घर के बच्चें की कमी को पूरा नहीं कर सकता। इसलिए जरुरी है सख्ती से योजना का पालन किया जाए या फिर अन्य वैकल्पिक उपाय अपनाये जाए। बच्चे देश का भविष्य है। उनके स्वास्थ्य के साथ की गयी लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। 

Wednesday, July 17, 2013

Tips to be Happy in Life in Hindi


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ज़िन्दगी खुश रहने का नाम है और खुश रहना इतना मुश्किल भी नहीं. Just try these ways :-
  • एकमात्र इंसान जो आपको सच्ची खुशी दे सकता है वो आप खुद है. इसलिए खुशी के लिए दूसरो पर depend रहना छोड़ दीजिए. 
  • खुशी आपको भूल जाए पर आप खुश रहना कभी मत भूलिए - Always Keep Smiling :) 
  • Love Unconditionally : बिना शर्तों के प्यार कीजिए. 
  • जो आपके पास है उसे celebrate कीजिए. जो नहीं है और आप पाना चाहते है उसके बारे में केवल सकारात्मक तरीके से सोचिए. One day you will get those things. 
  • कभी कभी आपके emotions बाहर आने दीजिए. Human have them for a reason. 
  • अपने comfort zone से बाहर कदम रखिए. आप सच में खुद को जिंदा महसूस करेंगे . 
  • जब आपको किसी से jealousy हो या किसी के लिए नफ़रत महसुस करें तो इसे तुरंत रोक दीजिए. क्योंकि ऐसा करके आप सिर्फ़ खुद को hurt कर रहे है. 
  • "black & white", " right or wrong" , "one way or another" संसार सिर्फ़ यही नहीं है. चीज़ो को ज़्यादा से ज़्यादा point of views से देखने की कोशिश कीजिए. 
  • अगर आप चाहते है लोग सोचे that you are amazing तो सबसे पहले आप खुद भरोसा कीजिए कि आप amazing है और तब लोग भी करने लगेंगे. 
  • अच्छा या बुरा जो भी हो रहा है उसे होने दीजिए बस आप निरंतर चलते रहिए क्योंकि अच्छा या बुरा कुछ भी स्थाई नहीं है. 
  • Gossip, past की problems,घटनाएँ जिन पर आपका नियंत्रण नहीं है, नकारात्मक विचार, इन्हें समय देना समय को व्यर्थ गँवाना है. 
  • महँगी, आकर्षक, नयी चीज़े आपको ये महसूस करवा सकती है कि आप बेहतर इंसान है पर दुख, भय या जब आपको ज़रूरत है तब ये आपको सुन नहीं सकती, आपका साथ नहीं दे सकती. इसलिए प्राथमिकताओं का निर्धारण सोच समझ कर कीजिए. 
  • अपनी खुशियों की तुलना दूसरो की खुशियों से करना छोड़िए. जो आपके पास है उसमे खुश रहिए. Because "Relative Happiness" is fake. 
  • किसी और के चहरे पर मुस्कुराहट लाइए वह दोगुनी होकर आपके चहरे पर खिलेगी. 
Follow These Ways & Happiness Will Follow You. Thanks

 Monika Jain 'पंछी'

Monday, July 15, 2013

Mere Sapno Ka Bharat Poem in Hindi


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जहाँ ना भ्रष्टाचार का वास
जहाँ ना महंगाई का निवास
जहाँ ना हिंसा की हो आस
जहाँ ना आतंकवाद हो पास

सपनो का ये भारत मेरा सच में होता, काश!

जातिवाद ना ले अंगड़ाई
धर्म-धर्म की ना हो लड़ाई
भिड़ते जहाँ ना भाई-भाई
ना हिंसा ना त्राहि - त्राहि

सपनो के भारत में मेरे ऐसी सुबह थी आई।

मानवता है जहाँ का धर्म
करते सभी जहाँ सत्कर्म
समझे एक दूजे का मर्म
जहाँ ना होता कोई अधर्म

काश! मेरे भारत में होता ऐसा मानव धर्म।

जीवन मूल्य जहाँ ना गिरते
गिरगिट जहाँ ना नेता बनते
ऊँच नीच के दाव ना चलते
कदम मिलाकर सब जन चलते

पलकों में मेरी भारत के ऐसे ख़्वाब है पलते।

Monika Jain 'पंछी' 

Sunday, July 14, 2013

Poem on National Language in Hindi


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शब्दों, वर्णों और छंदों की 
हिंदी है अनंत धरोहर 
है असीम इसकी प्रस्तुति 
अनुपम है इसका हर स्वर। 

हिंदी बहता नीर है 
धीर, वीर, गंभीर है 
नहीं है यह मात्र एक भाषा 
हिंदी है जन-जन की आशा।

भाषा नहीं भावना है यह 
अभिव्यक्ति का है आसमान 
परिवर्तन की चिर शक्ति इसमें 
यह है देश का स्वाभिमान। 

स्वतंत्रता आन्दोलन में उभरी 
बन हिंदी एक सशक्त हथियार 
राष्ट्रीय एकता और क्रांति की 
थी यह अनोखी सूत्रधार।

हिंदी है विज्ञान की भाषा 
कला और ज्ञान  की भाषा 
जन-जन के उत्थान की भाषा 
 गौरव और सम्मान की भाषा। 

Monika Jain 'पंछी'

Saturday, July 13, 2013

Poem on Friendship in Hindi


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दोस्तों की दोस्ती भी क्या चीज है
खट्टी-मीठी ये यारी बड़ी लजीज़ है
दोस्तों बिन दुनिया सूनी है यारो
हर दोस्त को ये दोस्ती बड़ी अजीज़ है।

वो बारिश की मस्ती में बरसता जो शोर
वो काग़ज की नावें बहाने की होड़
वो हाथ बदलती पतंगों की डोर
वो बिजली के जाने पर हो-हो का शोर
हर दिल के ये यादें बड़ी करीब है 
दोस्तों की दोस्ती भी क्या चीज है।

वो क्लासेस की बंकिंग कर कैंटीन में जाना 
वो चाय की चुस्की और गप्पे लड़ना 
वो असाईनमेंट की याद लास्ट डेट को आना 
और जैसे भी तैसे भी जुगाड़ बिठाना 
कुछ पाने और खोने की ये रीत है 
दोस्तों की दोस्ती भी क्या चीज है।

हंसाती-रुलाती है दोस्ती 
सताती-मनाती है दोस्ती 
मुस्कुराती-खिलखिलाती है दोस्ती 
गुदगुदाती-गुनगुनाती है दोस्ती 
हर दिल में समाया बस यही गीत है 
दोस्तों की दोस्ती भी क्या चीज है। 

Monika Jain 'पंछी' 

Friday, July 12, 2013

Motivating Poem in Hindi



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जिंदगी के मजे नहीं है उनके लिए 
जो रहते सदा फूलों की छाँव में 
जीवन का आनंद है उनके लिए 
जिन्होंने झेलें हो काँटे अपने पाँव में।

जो ना सूखा कभी धूप में 
वो पायेगा कैसे पानी में अमृत 
जो बैठा रहा किनारों पर 
वो कैसे लायेगा सागर के मुक्तक। 

भोजन में स्वाद उसी को मिलता 
जो रह पाता कुछ खाये बिन 
रातें उसकी चैन से कटती 
जो मेहनत करता सारा दिन।

जो चाल पड़ौसी की ना देखें 
और अपनी राह बनाएँ 
उसकी हिम्मत और साहस ही 
उसे मंजिल तक ले जाएँ।

आशाएँ जिन्दा रखता जो 
कभी ना डरता संकट से 
वही बनाता है इतिहास 
जो लड़ता है हर झंझट से। 

Monika Jain 'पंछी'

Wednesday, July 10, 2013

Poem on Parliament in Hindi


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संसद में बैठे उम्रदराज 
कर युवाशक्ति को नजरंदाज़ 
60 साल के ऊपर हो गए 
पर है घोटालों के सरताज।

संसद को बना मैदान-ए-जंग 
लड़ते-भिड़ते हैं सांसद 
देश से मतलब कुछ भी नहीं 
बस प्यारा है उन्हें अपना पद।

लोकतंत्र को कर बेहाल 
बन रहे हैं ये मालामाल 
इनकी भूख कभी ना मिटती 
चाहे देश में पड़ जाये अकाल।

लकीर के फ़कीर बने रहेंगे 
वोट बैंक के खातिर 
नहीं बदलेंगे नियम कानून 
देखो कितने शातिर। 

बूढ़ी संसद, बूढ़े सांसद 
बदलाव ना होता कुछ भी यहाँ 
दो पैसे में बिकता है 
जमीर और ईमान जहाँ। 

Monika Jain 'पंछी'

Tuesday, July 9, 2013

Poem on Busy Life in Hindi


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घर और दफ्तर के काम 
बिजली के बिल का पैगाम 
मोबाइल का रिचार्ज 
होमलोन इ.एम.आइ. की डेट है आज
कार का इंश्योरेंस 
बच्चों की कम्प्लेंट्स।

इन समस्याओं से जूझते-जूझते 
सो जाता है वह कुछ बूझते-बूझते
फिर सुबह वही सारा रूटीन 
आदमी बन गया है इक मशीन।

समय नहीं है 
समाज और खुद के लिए 
जो जीता है जिंदगी 
सिर्फ अपने हमसफ़र और बच्चों के लिए। 

अगर आँख मूंदकर सोचे 
पिछले एक साल में क्या किया देश के लिए
तो आएगा परिणाम शून्य 
हजारों बहाने साथ में लिए। 

पैसो के पीछे भागती यह जिंदगी 
क्या सचमुच तुम्हें अच्छी लगती है ?
रुको, सोचो और पूछो खुद से 
क्या बस इसलिए ही पाई तुमने ये मनुष्य गति है ?

Monika Jain 'पंछी' 

Monday, July 8, 2013

Poem on Rape Victims in Hindi


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दामिनी! तुम नारी का बल हो।
न्याय मिलेगा अवश्य तुम्हें 
ये निश्चित है होना 
ऐसी उम्मीद का कल हो
दामिनी! तुम नारी का बल हो।

बेवजह तुम्हारा दुनिया से जाना 
बेकार न होगा, ये भी माना 
पर उस जननी के दिल को 
क्या मुमकिन है समझा पाना ?
अब और देर बर्दाश्त नहीं 
न्याय इसी क्षण तत्काल हो 
दामिनी! तुम नारी का बल हो।

जिस क्रूर क्षण ने 
तुम्हें हमसे छीना था 
लाडली थी तू बहार घर की 
तुम्हें अभी जीना था।
तेरी कुर्बानी से बुलंद 
नारी जीवन का हर पल हो 
दामिनी! तुम नारी का बल हो।

समाज संकल्प ले आज 
देने नारी को सुरक्षा 
आज़ादी हक़ है इनका भी 
न समझे इसे भिक्षा 
अब ये प्रण 
अंतिम अटल हो 
 दामिनी! तुम नारी का बल हो।

तोड़ डालो तुम 
पैरों की जंजीरों को 
रुढियों को छोड़ 
कुत्सित विचारों को मोड़ 
मन में जुटाओं तुम 
आगे बढ़ने की होड़।
अब तुम दीन हीन नहीं 
समर्थ सबल हो
दामिनी! तुम नारी का बल हो। 

Anil Kumar 'Bihari'
Baridih, Jamshedpur
                             

Sunday, July 7, 2013

Bal Gangadhar Tilak Biography in Hindi

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जीवन परिचय निबंध, जीवनी. Bal Gangadhar Tilak Biography in Hindi. Information About Freedom Fighter, Essay, Autobiography, Life Story.

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक

जीवन परिचय :
  • बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई, 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के चिखली नामक गाँव में हुआ था। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान, गणितज्ञ, दार्शनिक, राष्ट्रवादी नेता, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे।
  • उनका परिवार सुसंस्कृत ब्राह्मण परिवार था। उनके पिता का नाम गंगाधर रामचंद्र तिलक था जो एक लोकप्रिय शिक्षक थे। 
  • 15 वर्ष की आयु में उनका विवाह कर दिया गया। उनकी पत्नी का नाम तापी था जिसे बाद में सत्यभामा के नाम से जाना गया। 
  • 1876 में उन्होंने डेक्कन कॉलेज से बी. ए. ओनर्स की परीक्षा उत्तीर्ण की और 1879 में उन्होंने बम्बई विश्वविद्यालय से एल० एल० बी० की डिग्री प्राप्त की। 
  • वे मौलिक विचारों वाले संघर्षशील, परिश्रमी और परोपकारी व्यक्ति थे। वे स्वराज की मांग करने वाले पहले व्यक्ति थे।
 
सामाजिक / राष्ट्रीय / साहित्यिक योगदान :
  • भारत में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए 2 जनवरी, 1880 को उन्होंने विष्णु शास्त्री और नामजोशी के साथ मिलकर पूना में 'न्यू इंग्लिश स्कूल' शुरू किया। जिसमें बाद में उनके मित्र आगरकर और वी एस आप्टे भी शामिल हो गए। इसे बाद में 'डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी' का रूप दिया गया। सहयोगियों से विचार ना मिलने के कारण 1890 में उन्होंने इस सोसाइटी से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद उन्होंने कानून की शिक्षा देना शुरू किया। उनका संस्थान छात्रों को हाईकोर्ट और वकालत की परीक्षा की तैयारी करवाता था।
  • 1896 में 'बम्बई प्रेसीडेंसी' में अकाल पड़ने पर तिलक राहत कार्यों में जुट गए। पूना में उन्होंने सस्ते अनाज की दुकाने खोलकर अकाल के कारण होने वाले दंगो को रोका। 1902 में पूना में प्लेग के फैलने पर उन्होंने 'हिन्दू प्लेग अस्पताल' शुरू किया और इसके लिए धन एकत्रित किया और लोगों की सेवा की।
  • तिलक जी ने 'मराठा दर्पण' और 'केसरी' नाम के समाचार पत्रों के माध्यम से अंग्रेजी शासन के विरुद्ध बिगुल बजाया। उन्होंने कहा, ‘‘केसरी निर्भयता एवं निष्पक्षता से सभी प्रश्नों की चर्चा करेगा। ब्रिटिश शासन की चापलूसी करने की जो प्रवृत्ति आज दिखाई देती है,वह राष्ट्रहित में नहीं है। ‘केसरी‘ के लेख इसके नाम को सार्थक करने वाले होंगे।” इसमें प्रकाशित कुछ लेखों की वजह से उन्हें जेल जाना पड़ा।
  • तिलक जी कांग्रेस के गरम दल के नेता थे। गरम दल में इनके साथ लाला लाजपतराय और विपिन चन्द्र पाल भी थे। इन्हें 'लाल बाल पाल' के नाम से जाना जाता था।
  • भारत के वायसराय लार्ड कर्जन द्वारा बंगाल का विभाजन करने का उन्होंने तीव्र विरोध किया। 
  • 1908 में प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस के बम हमले का समर्थन करने की वजह से इन्हें बर्मा (वर्तमान म्यांमार) की जेल में भेज दिया गया। मांडले जेल में उन्होंने 'गीता रहस्य' नामक पुस्तक लिखी जो उनकी सर्वोत्कृष्ट कृति है, जिसका कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है। 
  • 'स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और इसे मैं लेकर रहूँगा' इस नारे के उद्गोष के साथ 1914 में इन्होंने 'इंडियन होमरूल लीग' की स्थापना की।
  • 1916 में उन्होंने मुहम्मद अली जिन्ना के साथ 'लखनऊ समझौता' किया। 
  • वे बाल विवाह और छुआछूत के विरोधी थे। उन्होंने हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने का समर्थन किया और लोगों को भारतीय संस्कृति और परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने स्वदेशी के प्रयोग और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार पर बल दिया। भारतीयों को एकसूत्र में पिरोने के लिए उन्होंने गणेशोत्सव और शिवाजी दिवस का शुभारम्भ किया।
 
प्रमुख कृतियाँ :
  • गीता रहस्य
  • The Orion or The Researches Into the Antiquity of the Vedas
  • The Arctic Home of The Vedas
 
पुरस्कार / सम्मान :
  • तिलक जी के कार्यों की वजह से उन्हें लोकमान्य की उपाधि दी गयी। उन्हें 'हिन्दू राष्ट्रवाद का पिता' भी कहा जाता था।
  • महात्मा गांधी ने उन्हें 'आधुनिक भारत का निर्माता' और पंडित नेहरु ने उन्हें 'भारतीय क्रांति का जनक' कहा।
 
मृत्यु :
  • 1 अगस्त, 1920 को बम्बई में उनकी मृत्यु हो गयी।
  • उन्होंने कहा था, ‘राष्ट्र की स्वाधीनता मुझे सर्वाधिक प्रिय है। यदि ईश्वर मुझे मुक्ति और स्वर्ग का राज्य दे तो भी मैं उसे छोड़कर ईश्वर से स्वाधीनता की ही याचना करूँगा।’
 
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Poem on Eyes in Hindi, Aankhen Poetry


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नैन परिंदे भर उड़ान पहुँच गए आकाश
मतवाले पगले ये नैना जाने करते क्या तलाश.

इन्द्रधनुष से रंग चुराकर ख़्वाब सजाये सपनीले
बदरा संग खेले आँख-मिचौनी ये दो नैन सजीले.

बदरा से बरसी बूंदे, धरती की प्यास बुझाये 
सूखे रह गए मेरे नैना, जाने किसकी आस लगाये.

सांझ का काजल भर अंखियन में करते है शृंगार 
रस्ता देखे जाने किसका, ना चैन ना करार.

रात को टिमटिम तारों से करते ये हंसी-ठिठोली
पर चंदा से नज़र चुराए ये दोनों हमजोली.

शायद चंदा दिखलाता वो ही अनजाना चहरा
फिर हर पल यादों पे हो जाता उस अनजाने का पहरा.

 Monika Jain 'पंछी'

Thursday, July 4, 2013

Article, Essay on Corruption in Hindi

भ्रष्टाचार समस्या निबंध, राजनीति व्यंग्य लेख, नेतागिरी भाषण. Corruption Essay in Hindi. India Politics Article, Political Satire Speech, Politicians Paragraph.

नेतागिरी का कॉलेज

चुनावों का मौसम था। हर रोज कुर्सी के लिए खड़े होने वालों का ताँता लगा रहता था। चेहरे नये-नये होते पर वोट माँगने का तरीका सभी का एक सा था। हाथ जोड़कर कोई गली में नया हैंडपंप लगाने की कहता तो कोई नयी सड़क बनवाने का आश्वासन देता, तो कोई कुछ और...

ये सब देखकर एक दिन मुझे बचपन के स्कूल की एक बात याद आई। एक बार हमारी अध्यापिका ने सभी बच्चों से प्रश्न पूछा था, ‘आप सभी बड़े होकर क्या बनोगे?’ कुछ ने इंजीनियर कहा, कुछ ने डॉक्टर कहा, कुछ ने टीचर आदि। पर एक बच्चे ने जवाब दिया, ‘मैं बड़ा होकर नेता बनूंगा।’ उस वक्त तो सारी क्लास हंस पड़ी थी पर आज मैं सोचती हूँ कितना समझदार बच्चा था वह।

पूरी जिंदगी कंप्यूटर के सामने बैठे-बैठे आँखे अन्दर धंस जाती है पर फिर भी हमारे इंजीनियर साहब नेताजी जितना पैसा नहीं कमा पाते। CA की पढ़ाई करते-करते ही सर के आधे बाल उड़ जाते है पर कोई भी CA नेताजी से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता। पहले जानवरों और फिर इंसान की चीड़-फाड़ करने वाले चिकित्सक संवेदना रहित हो जाते है...मरीजों से मनमाना धन वसूलते हैं पर हमारे नेताजी से पीछे ही रह जाते हैं। क्योंकि हमारे राजनेता तो बिना कोई डिग्री लिए, बिना कोई परीक्षा पास किये चारे और कोयले जैसी चीजों से भी करोड़ों रुपये कमा लेते हैं। धन्य है हमारे नेताजी!

निराशा के कुछ भाव मेरे चहरे पर उभरे क्योंकि नेता बनने के लिए या तो हत्या, घोटाला जैसे कुछ अपराध खाते में होने चाहिए या फिर पापा-मम्मी, दादा-दादी, परदादा-परदादी आदि में से कोई नेतागिरी में होना ही चाहिए। ऐसे में हम जैसे सामान्य इंसान तो नेता बनने के बारे में सोच भी नहीं सकते क्योंकि हमारे दादा-दादी ने तो कभी स्टेज पर खड़े होकर दो पंक्तियाँ तक नहीं बोली...नेता बनना तो दूर की बात है और हत्या खून का तो नाम सुनते ही हम थर-थर कांपने लगते है ऐसे में नेता बनना हम जैसे लोगों के लिए तो दिवा स्वप्न मात्र है।

काश! नेता बनने के लिए भी एक कॉलेज होता और पाठ्यक्रम कुछ इस तरह होते :

BP - Bachelor of Politics
MP - Master of Politics.

मैं सोचने लगी...कैसा होता नेतागिरी का कॉलेज?

कोर्स के नाम तो सोच लिए पर अध्यापक कौन होते? नेतागिरी नेताजी से ज्यादा अच्छी कोई नहीं पढ़ा सकता पर हमारे नेता तो कितने भी बूढ़े हो जाये सेवानिवृत्ति का नाम तक नहीं लेते ऐसे में भावी नेताओं की क्लासेज कौन लेगा? पर तभी ख़याल आया कि हमारे नेताजी ठाले ही तो बैठे रहते हैं। उद्घाटन और रिबन काटने के अलावा करते भी क्या हैं सो एक-एक पीरियड का समय तो निकाल ही लेंगे।

टीचर्स की समस्या भी दूर हो गयी पर विषय क्या-क्या होते और क्लासेज किस-किस की होती? मैं सोचती हूँ पहली क्लास होती ‘Indian Constitute and Law’ की जिसमे भारत का संविधान, कानून, नीति निर्देशक तत्त्व, मूल अधिकार, मूल कर्त्तव्य आदि के बारे में पढ़ाया जाता। अब कोई नेताजी तो ये क्लास लेने से रहे इसके लिए तो किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को ही नियुक्त करना पड़ता। इसमें कोई दो राय नहीं कि इस कक्षा में उपस्थित होने वाले छात्रों की संख्या सबसे कम होती क्योंकि सुबह-सुबह अपनी नींद ख़राब करके हमारे देश के नौनिहाल इस थ्योरी क्लास को तो अटेंड करने से रहे। वही होता जो सब कॉलेजेज में होता है। परीक्षा के दिनों में इधर-उधर से नोट्स कबाड़ लेते और पर्चे के एक दिन पहले पढ़ लेते। चलो इसी बहाने फोटोस्टेट वाले भाईसाहब की अच्छी कमाई हो जाती है।

ये तो बात हुई पहली क्लास की। अब दूसरी क्लास मेरे ख्याल से होती ‘Divide and Rule’ की जिसमें फूट डालो-राज करो के नए-नए रचनात्मक तरीके सिखाए जाते और हमारे नेताजी तो इस विषय में पारंगत है ही पर फिर भी कभी कभी कोई गेस्ट लेक्चर लेने के लिए इंग्लैंड से किसी अधिकारी को बुला लिया जाता। आखिर Divide and Rule के दम पर ही 200 साल तक उन्होंने हम पर राज किया।

अगली क्लास होती ‘Demand and Supply of Votes’ की। इस क्लास में बताया जाता कैसे जनता को उनकी मांगें पूरी करने के दिलासे देकर और आरक्षण जैसी नयी-नयी मांगें पैदा करके वोट्स पाए जा सकते हैं और अगर इससे काम न चले तो कैसे दारु, पैसे आदि की पूर्ति करके वोट्स अपनी मुट्ठी में कैद किये जा सकते हैं।

और भी कई क्लासेज हो सकती है जैसे :

How To Fight In Parliament?
When To Transfer From One Party To Another?
How To Present Effective Speech Containing Big-Big Promises?
When To Use Other Sources Like : Rath Yatra etc.

पर अब जिस क्लास के बारे में मैं बताने जा रही हूँ वो सबसे रोचक क्लास होती और मुझे पूरा विश्वास है कि इस क्लास की उपस्थिति शत % होती और सबसे ज्यादा विद्वान शिक्षक भी इसी क्लास के लिए मिलते। कोई अनुमान? चलो, मैं ही बता देती हूँ। ये क्लास होती घोटाले की क्लास! मुस्कराहट आ गयी ना सबके चहरे पर।

चारा घोटाला, कोयला घोटाला, स्पेक्ट्रम घोटाला, जमीन घोटाला...और भी घोटाले के कौन-कौन से क्षेत्र हो सकते है और किस तरह भ्रष्टाचार को बखूबी अंजाम दिया जा सकता है इस विषय पर शोध और चिंतन इस क्लास का अहम् मुद्दा रहेगा।

घोटाले की क्लास के बारे में सोच ही रही थी तभी दरवाजे की घंटी बजी। दरवाजा खोला तो देखा एक और नेताजी हाथ जोड़कर वोट मांगने आये थे।

Monika Jain 'पंछी'
(04/2012)

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Monday, July 1, 2013

Poem on Hindu Muslim Unity in Hindi


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लाशों के ढ़ेर पर बने मंदिर मस्जिद 
जिनकी बुनियाद है नफ़रत और जिद
जो इंसानियत की मौत के गवाह हैं 
जो हिन्दू मुस्लिम जंग से तबाह है।

एक ऐसी जंग 
जिसमें जीत ना हिन्दू की हुई
 ना मुसलमान की 
हुई है बस हार 
 इंसानियत और इंसान की।

ऐसा हिन्दू और मुसलमान होना 
जिसके लिए अपने भीतर का इंसान खोना 
दया, करुणा और प्रेम का खात्मा 
जहाँ धर्म के नाम पर मर गयी है आत्मा।

क्या नहीं बन सकता इंसान ऐसा 
ईश्वर जिसके दिल में बसता हो 
देखकर दूसरों का दर्द 
आंसू जिसकी आँख से छलकता हो। 

Monika Jain 'पंछी'