Monday, July 29, 2013

Alfred Nobel Story in Hindi


Story of Alfred Nobel in Hindi, Nobel Peace Prize, Recognition, Tale, Kahani, Katha, Tales, Death, Remembrance, Memories, Recollections, Dynamite King, Pehchan, अल्फ्रेड नोबेल, हिंदी कहानी, कथा, नोबेल पुरस्कार, मौत का व्यापारी, डाइनामाइट किंग, पहचान 


अल्फ्रेड नोबेल एक बार अखबार पढ़ रहे थे। शोक समाचार वाले कॉलम में उन्हीं की मृत्यु की सूचना देखकर वे चौंक उठे। समाचार पत्र ने गलती से किसी और व्यक्ति की जगह अल्फ्रेड नोबेल का नाम प्रकाशित कर दिया था। अल्फ्रेड नोबेल ने सोचा- अगर सच में मेरी मृत्यु हो गयी होती तो लोग मुझे कैसे याद करते ? यह सोचकर उन्होंने पूरा शोक समाचार पढ़ा। उन्हें जानकर बहुत हैरानी हुई कि उनके लिए 'मौत का व्यापारी' और 'डाइनामाइट किंग' जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया था। क्योंकि उन्होंने डाइनामाइट का अविष्कार किया था। यह सब पढ़कर अल्फ्रेड नोबेल सोच में पड़ गए कि क्या मेरे इस दुनिया से जाने के बाद लोग मुझे ऐसे याद करेंगे ? उन्हें दुःख हुआ और उन्होंने तय किया कि वे 'मौत के व्यापरी' जैसी पहचान के साथ बिल्कुल नहीं मरेंगे। 

इस घटना के बाद से ही अल्फ्रेड नोबेल ने दुनिया भर में शांति स्थापित करने के प्रयास किये। उन्होंने 'नोबेल पुरस्कार' भी शुरू किये और इन्हीं पुरस्कारों के नाम से आज वे सारी दुनिया में पहचाने जाते हैं।

Moral : हमें अपने जीवन में अच्छे कार्य करने चाहिए ताकि हमारी मृत्यु के बाद हमें एक अच्छे व्यक्ति के रूप में जाना जाए।