Tuesday, July 9, 2013

Poem on Busy Life in Hindi


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घर और दफ्तर के काम 
बिजली के बिल का पैगाम 
मोबाइल का रिचार्ज 
होमलोन इ.एम.आइ. की डेट है आज
कार का इंश्योरेंस 
बच्चों की कम्प्लेंट्स।

इन समस्याओं से जूझते-जूझते 
सो जाता है वह कुछ बूझते-बूझते
फिर सुबह वही सारा रूटीन 
आदमी बन गया है इक मशीन।

समय नहीं है 
समाज और खुद के लिए 
जो जीता है जिंदगी 
सिर्फ अपने हमसफ़र और बच्चों के लिए। 

अगर आँख मूंदकर सोचे 
पिछले एक साल में क्या किया देश के लिए
तो आएगा परिणाम शून्य 
हजारों बहाने साथ में लिए। 

पैसो के पीछे भागती यह जिंदगी 
क्या सचमुच तुम्हें अच्छी लगती है ?
रुको, सोचो और पूछो खुद से 
क्या बस इसलिए ही पाई तुमने ये मनुष्य गति है ?

Monika Jain 'पंछी'