Monday, July 8, 2013

Poem on Rape Victims in Hindi


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दामिनी! तुम नारी का बल हो।
न्याय मिलेगा अवश्य तुम्हें 
ये निश्चित है होना 
ऐसी उम्मीद का कल हो
दामिनी! तुम नारी का बल हो।

बेवजह तुम्हारा दुनिया से जाना 
बेकार न होगा, ये भी माना 
पर उस जननी के दिल को 
क्या मुमकिन है समझा पाना ?
अब और देर बर्दाश्त नहीं 
न्याय इसी क्षण तत्काल हो 
दामिनी! तुम नारी का बल हो।

जिस क्रूर क्षण ने 
तुम्हें हमसे छीना था 
लाडली थी तू बहार घर की 
तुम्हें अभी जीना था।
तेरी कुर्बानी से बुलंद 
नारी जीवन का हर पल हो 
दामिनी! तुम नारी का बल हो।

समाज संकल्प ले आज 
देने नारी को सुरक्षा 
आज़ादी हक़ है इनका भी 
न समझे इसे भिक्षा 
अब ये प्रण 
अंतिम अटल हो 
 दामिनी! तुम नारी का बल हो।

तोड़ डालो तुम 
पैरों की जंजीरों को 
रुढियों को छोड़ 
कुत्सित विचारों को मोड़ 
मन में जुटाओं तुम 
आगे बढ़ने की होड़।
अब तुम दीन हीन नहीं 
समर्थ सबल हो
दामिनी! तुम नारी का बल हो। 

Anil Kumar 'Bihari'
Baridih, Jamshedpur