Tuesday, July 23, 2013

Poem on Rose Flower in Hindi


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गुलाब !

कितना सुन्दर रंग तुम्हारा 
कितने हो मनभावन 
काँटों में भी खिलकर तुम 
लगते कितने पावन। 

सूरज की रश्मि शर्माती 
देख तुम्हारी आभा 
फूलों का राजा कहला
बन जाते बाग़ की शोभा।

कहीं किताबों में रहकर 
 बन जाते  प्रेम कहानी 
प्यार के रंग में रंगी शाम 
 बन जाती और रूमानी।

जीवन को महकाते तुम 
होठों को चहकाते तुम 
काँटों में मुस्काते तुम 
मुश्किल को धता बताते तुम। 

ईश्वर के चरणों में अर्पित 
भाग्य तुम्हारा इठलाता 
काँटों में खिलता जीवन 
जीने की राह दिखाता। 

Monika Jain 'पंछी'