Wednesday, November 23, 2016

Poem on About Me, Myself, I in Hindi

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Poem on About Me, Myself, I in Hindi

पहेली हूँ मैं

दुनिया की भीड़ में अकेली हूँ मैं
कोई न सुलझा पाए वो पहेली हूँ मैं।

आकाश कवि की कविता
दिशा विहीन एक सरिता
अदृश्य ख्वाबों की सहेली हूँ मैं
कोई न सुलझा पाए वो पहेली हूँ मैं।

पंख बिना ही उड़ने वाली
दिशा बिना ही बहने वाली
बिना राह की चलने वाली अलबेली हूँ मैं
कोई न सुलझा पाए वो पहेली हूँ मैं।

शब्द विहीन एक परिभाषा
सोयी आँखों की जागृत भाषा
खामोश जुब़ा की भाषा अनकही हूँ मैं
कोई न सुलझा पाए वो पहेली हूँ मैं।

By Monika Jain 'पंछी'


  To read the english version of this poem about me, myself and I click here.

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