Sunday, August 25, 2013

Poem on Cheating in Love in Hindi


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जानती हूँ तुमने मुझसे कभी 
प्यार किया ही नहीं 
किया था तुमने जो इजहार 
वैसा कुछ कभी था ही नहीं।

जानती हूँ 
झूठी थी तुम्हारी सारी बाते 
और खोखले थे 
तुम्हारे सारे वादे।

जानती हूँ तुम्हारा मेरी परवाह करना 
बस एक दिखावा था 
हाँ जानती हूँ मैं तुम्हारा प्यार 
बस कोरा छलावा था।

 लिखी थी तुमने जो प्रेम कवितायेँ
आज मुझ पर अट्टाहस कर रही है
मेरी  मासूमियत और पागलपन पर 
देखो ! आज वो भी हँस रही है।

हर हाल में मुझको चाहने के 
जीवन भर साथ निभाने के 
वादें तेरे बड़े-बड़े 
थे बस मुझको बहलाने के।

मेरी ना को हाँ में बदलना 
बस यहीं जूनून तुझ पर सवार था 
जानती हूँ इश्क तेरा एक धोखा 
और झूठा तेरा प्यार था।

सब जानते हुए भी ये पागल दिल 
क्यों अनजान बनना चाहता है 
झूठा ही सही लेकिन तेरा 
क्यों प्यार पाना चाहता है ?

Monika Jain 'पंछी'