Sunday, July 24, 2016

Poem on Gender Equality in Hindi

नर नारी एक समान. Poem on Gender Equality in Hindi. Ling Bhed par Kavita, Sex Discrimination, Males Females Inequality, Women Sensitization, Bias Slogans.

समानता मैं तब मानूंगी...

मुझे पुरुष के बराबर हक़ दिलाने की
बातें चल रही है न जाने कब से।
पर एक बात मैं कहना चाहती हूँ
आप सबसे -

जमाना ख़राब है...यह कहकर
न जाने कितने प्रतिबन्ध
लगे हैं मुझ पर अब तक।
समानता मैं तब मानूंगी -
जब घर से अकेले कॉलेज जाने तक
नहीं घूरेंगी मुझे गिद्ध दृष्टियां एकटक।

रात के अँधेरे में भी
जब चल सकूंगी मैं बेख़ौफ़!
समानता तो तभी होगी
जब नहीं सताएगा मुझे कोई खौफ।

‘लड़की हो’, यह कहकर
नहीं किया जायेगा कोई भेदभाव।
भाई की इच्छाओं के आगे
नहीं स्वीकारना होगा मुझे कोई अभाव।

सिर्फ कानून नहीं दिला सकता
मुझे समानता का अधिकार।
इसके लिए जरुरी है
संकीर्ण मानसिकता का बहिष्कार।

By Monika Jain 'पंछी'

To read the english version of this poem about gender equality click here