Thursday, August 1, 2013

Story on Mistakes in Hindi


Story on Mistakes in Hindi, Learning from Mistake, Life, Self Improvement, Improve Knowledge, Error, Fault, Imperfection, Perfection, Understanding, Kahani, Tales, Katha, Politeness, Humbleness, Down to Earth, हिंदी कहानी, भूल, गलती, समझ, पूर्णता, अपूर्णता, दोष, आत्म सुधार, कथा, विनम्रता 



ज्ञानप्रकाश जी आज तकरीबन 35-40 साल बाद अपने पौते के साथ शहर से पैतृक गांव जा रहे थे। रास्ते में पुलिस वाले ने उनकी गाड़ी को रोककर चालान कटवाने को कहा। ज्ञान प्रकाश जी ने कहा कि भाई हमसे क्या भूल हो गयी है? पुलिस वाले ने अपनी भाषा में डांटते हुए कहा कि अब तुम गलती नही करोगे तो क्या हम चालान काटने के लिये तुम्हारी गलती का इंतजार करते रहेंगे ? जैसे-तैसे इस किस्से को निपटा कर गांव की जमीन पर कदम रखते ही उनकी आखों से आंसू बहने लगे। उनके पौते ने थोड़ा हैरान होकर अपने दादा से कहा कि क्या बात है ? आपकी तबीयत तो ठीक है? आप बच्चो की तरह क्यूं रो रहे हैं ? ज्ञान प्रकाश जी ने आखें साफ करते हुए कहा - बेटा मेरा सारा बचपन इस गांव की मिट्टी में खेलते हुए बीता है। पौते ने कहा तो क्या हुआ, आप तो बहुत हिम्मत रखते हो, आप जैसे इंसान की आखों में आसूं अच्छे नही लगते। बातचीत करते-करते ज्ञानप्रकाश जी की नज़र सामने लगे हाई स्कूल के बोर्ड पर पड़ गयी। चंद पल उसे अच्छे से निहारने के बाद ज्ञानप्रकाश जी ने अपने पौते से कहा कि बेटा मैंने अपनी स्कूल की सारी पढ़ाई इसी स्कूल से की थी। मैं जब इस स्कूल से पढ़ाई पूरी करके निकला था तो उस समय कभी सोचा भी नही था कि दौबारा इस गांव मे इतने अरसे तक आना ही ना होगा। 

यदि तू बुरा न माने तो कुछ देर इस स्कूल के अंदर घूम आये। पौते ने कहा लेकिन अब आपको यहां कौन पहचानता होगा? खामख्वाह अंदर जाकर समय बर्बाद करने वाली बात है। ज्ञानप्रकाश ने कहा एक बार अंदर जा कर स्कूल देखने का बहुत मन कर रहा है। दादा के कहने पर उनका पौता उन्हें अंदर ले गया। ज्ञानप्रकाश जी थोड़ी देर इधर-उधर घूमने के बाद सीधा प्रिंसीपल के कमरे की ओर बढ़ गये। दरवाजे पर चपरासी ने रोकते हुए कहा कि साहब अभी मीटिंग में है, आप थोड़ा इंतजार करो। कुछ देर बाद प्रिंसीपल ने चपरासी को कह कर उन्हें अंदर आने को कहा। ज्ञान प्रकाश जी ने अपना परिचय देने के साथ बताया कि समाज की बेहतरी के लिये वे कहानियां और अनेक किताबे लिख चुके हैं। प्रिंसीपल ने कुछ मशहूर पुस्तकों के नाम लेकर जब पूछा कि क्या यह सारी आपकी ही लिखी हुई है ? ज्ञानप्रकाश जी के हां कहते ही प्रिंसीपल साहब अपनी कुर्सी छोड़ कर उनके पैर छूने के लिये आगे आ गये। 

ज्ञानप्रकाश जी ने भी आशीर्वाद देते हुए कहा कि आप जैसे अध्यापक को यहाँ देख कर सच में मन बहुत खुश हो गया। प्रिंसीपल ने हाथ जौड़ कर ज्ञानप्रकाश जी से कहा कि मैंने तो कभी सपने में भी नही सोचा था कि जिस महान लेखक की पुस्तकें हम बरसों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं उस महान लेखक से अचानक इस तरह से मुलाकात हो जायेगी। इतनी देर में चाय-नाश्ता आ गया। चाय पीते-पीते प्रिंसीपल ने ज्ञानप्रकाश जी से कहा कि आपकी किताबो को एक नज़र देखते ही कोई  भी कह सकता है कि आपने जिंदगी को बहुत ही करीब और अच्छे से समझा है। अगर आपकी इजाजत हो तो मैं आपसे एक बात जानना चाहता हूँ। ज्ञान प्रकाश जी ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा कि आपके मन में जो कोई  भी शंका हो आप खुलकर मुझ से बात कर सकते हो। प्रिंसीपल ने कहा कि जीवन में सब कुछ पा लेने के बाद भी ऐसी कौन सी चीज है जो हमें चैन से नही रहने देती। बिना एक पल की देरी किये ज्ञान प्रकाश जी ने प्रिंसीपल साहब को कहना शुरू किया कि हमारी छोटी-छोटी गलतियां ही हमें जीवन में सबसे अधिक परेशान करती है। हम लोग अक्सर भूल कर बैठते हैं, जब हम यह मानने लगते हैं  कि हम सब कुछ जानते है। जबकि असलियत तो यह है कि दुनियां में कोई भी इंसान ऐसा नही है जो सब कुछ जानता हो। इसी के साथ हमें यह नही भूलना चाहिये कि हर इंसान कुछ न कुछ जरूर जानता है। आमतौर पर हम एक और बड़ी भूल यह करते हैं  कि हम किसी भी बात को आधा-अधूरा सुनते हैं, उसके चौथाई  हिस्से को भी ढंग से नही समझते और उस बात पर बिना विचार किये झट से अपनी प्रतिक्रिया देने लगते हैं। 

अब प्रिंसीपल साहब ने कहा कि इस परेशानी से बचा कैसे जा सकता है? ज्ञान प्रकाश जी ने अपने ज्ञान का खज़ाना खोलते हुए कहा कि भूल छोटी हो या बड़ी उसे सुधारने का एक मात्र तरीका यही होता है कि उस विषय के बारे में पूर्ण रूप से ज्ञान प्राप्त किया जाये। वैसे सही समय और समझ दोनो एक साथ खुशकिस्मत लोगों को ही मिलते हैं। इतना तो आपने भी देखा होगा कि अक्सर समय पर समझ नही आती और समझ आने तक समय निकल जाता है। इसलिये जीवन में कभी भी दूसरों के दोष और कमियां ढूंढने की भूल मत करो, क्योकि जब तक आप ऐसा करते रहोगे उस समय तक आप किसी दूसरे की भूल तो क्या अपनी भूल भी नही सुधार पाओगे। ज्ञान प्रकाश जी से ज्ञान की झलक पाने के बाद जौली अंकल को तो यही ज्ञान समझ आ रहा है कि उम्र भर यही भूल हम करते रहे हैं , धूल तो थी चेहरे पर और हम आईने को साफ करते रहे। 


 By Jolly Uncle
Email Id : jollyuncle@gmail.com
Website : www.jollyuncle.com