Friday, September 13, 2013

Poem on Hidden Feelings in Hindi, Expression


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आज लिखना चाहती हूँ मैं वह सब 
जो बहुत कुछ लिखते हुए भी 
अनलिखा रह जाता है.

लिखना चाहती हूँ वह दर्द 
जो अक्सर मुस्कुराते होठों में 
छिपा रह जाता है.

लिखना चाहती हूँ वह प्यार 
जो इजहार-ए-मोहब्बत में भी 
बयां नहीं हो पाता है.

हाँ लिखना चाहती हूँ वह द्वेष 
जो दिलों में पाता है पनाह 
पर नज़र नहीं आता है. 

हाँ हाँ लिखना है मुझे वह आक्रोश 
जो बेरहम मजबूरियों के तले
दबा रह जाता है. 

क्यूँ ना लिखूं मैं वह जहर 
जो बड़ी ख़ामोशी से 
अपना असर दिखाता है. 

लिखूंगी मैं वह ममता 
जिसे एक अहसान फरामोश
नहीं समझ पाता है.

लिखना ही होगा वह स्वार्थ 
 जो बड़ी आसानी से 
स्थानांतरित हो जाता है. 

लिखनी है वह मासूमियत 
जिसे एक धूर्त बड़ी चालाकी से 
निगल जाता है. 

उफ्फ! कब से लिख रही हूँ 
पर जो कहना है मुझे 
वह सदा अनकहा ही रह जाता है. 

Monika Jain 'पंछी'