Thursday, September 5, 2013

Poem on Freedom in Hindi


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हाँ! ये है मेरा आज़ाद भारत 
और मैं हूँ इसकी आज़ाद नागरिक।

जहाँ दिन के उजाले में भी औरत को 
अकेले घर से निकलने से पहले 
दस दफ़ा सोचना पड़ता है
हो ना जाए किसी की दरिंदगी का शिकार 
इसलिए अपनी कई इच्छाओं का 
गला घोंटना पड़ता है।

जहाँ राजनीति अपराधियों का चहरा है 
 धर्म पर ढोंगियों का पहरा है 
अँधा कानून और बिकाऊ मीडिया 
खून से सना जहाँ का हर सवेरा है।

आम आदमी जहाँ महंगाई का शिकार है 
शिक्षा पाकर भी देश का युवा बेरोजगार है 
करोड़ों के  घोटालेबाज चैन से जी रहे 
और ईमानदार हर तरह से लाचार है। 

जहाँ आज़ादी पर पैसे वालों की लगाम है 
हैरान परेशां जनता-ए-आम है 
प्रजातंत्र का लेबल बस दिखाने के लिए 
गोरों की जगह कालों के अब हम गुलाम है।

हाँ ये है मेरा आज़ाद भारत 
और मैं हूँ इसकी आज़ाद नागरिक।

Monika Jain 'पंछी'