Tuesday, September 10, 2013

Poem on Hate in Hindi


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नफ़रत की आग दिलों में जल रही है 
ईर्ष्या, द्वेष और घृणा हृदयों में पल रही है 
प्यार के लिए छोटी है जिंदगी 
और नफ़रत की राह मनुजता चल रही है.

जाति, धर्म के झंझावातों में उलझ 
खो रहे हैं हम अपनी पहचान 
ना हिन्दू, ना मुस्लिम, ना ही ईसाई
सबसे पहले हैं हम एक से इंसान.

धर्म की दूकान सब को छल रही है 
अपराधियों की राजनीति इसमें फल रही है 
प्यार के लिए छोटी है जिंदगी 
और नफ़रत की राह मनुजता चल रही है.

तुम बनते हो साधन उनका 
पैसा, सत्ता सपना जिनका 
झोंक तुम्हे हिंसा की आग 
चमक रहा है सिक्का उनका.

ऐसे ही अवसरवादियों की दाल गल रही है 
निर्दोष जनता बस अपने हाथ मल रही है 
प्यार के लिए छोटी है जिंदगी 
और नफ़रत की राह मनुजता चल रही है.

निर्दोषों का खून बहा 
राजनीति की रोटियां सेकी जाती है 
वोट बैंक के खातिर ही 
भूखी जनता को बोटियाँ फैंकी जाती है. 

इंसानियत की उम्र अब ढल रही है  
हैवानीयत इसे निगल रही है 
प्यार के लिए छोटी है जिंदगी 
और नफ़रत की राह मनुजता चल रही है.

Monika Jain 'पंछी'