Saturday, February 18, 2017

Inspirational Story in Hindi

प्रेरणादायक कहानी, प्रेरक प्रसंग, जिम्मेदारी. Inspirational Story in Hindi. Sardar Vallabhbhai Patel Life Incident. Responsibility, Duty, Will Power Tales.
Inspirational Story in Hindi

(1)

फर्ज

वकालत के दौरान सरदार पटेल के पास हत्या का एक बेहद उलझा हुआ केस आया। मुकदमे को अपने हाथ में लेने से पहले सरदार पटेल ने बहुत सोचा और जब उन्हें यह भरोसा हो गया कि आरोपी बेगुनाह है तो उन्होंने मुकदमा अपने हाथ में ले लिया। पैरवी में हुई छोटी सी भूल भी आरोपी को फांसी दिला सकती थी इसलिए उन्होंने आरोपी को बचाने के लिए दिन-रात एक कर दिए।

एक दिन जब इस विषय पर महत्वपूर्ण बहस चल रही थी और फैसला इसी बहस पर टिका था और सरदार पटेल बहस में व्यस्त थे, तभी उनके नाम से एक तार आया। सरदार पटेल ने तार पढ़ा तो उनके चेहरे पर दुःख के भाव साफ-साफ नजर आने लगे। उन्होंने तार को वापस अपनी जेब में रख लिया और फिर बहस करने लगे।

जब मुक़दमे की बहस खत्म हो गयी तो उनके एक साथी ने उनसे उस तार के बारे में पूछा। सरदार पटेल ने बताया कि उनकी पत्नी की मृत्यु हो गयी है और इसी का समाचार उस तार में था। सरदार पटेल का जवाब सुनकर सब हैरान रह गए। उनके करीबी मित्र ने उनसे पूछा, ‘तुमने बहस जारी क्यों रखी?’ सरदार पटेल ने कहा, ‘वह दुनिया छोड़ चुकी थी, मैं अगर बहस छोड़ देता तो एक बेगुनाह को फांसी हो जाती। मुझे बहस जारी रखना ही सही लगा। यही मेरा फर्ज था।’

Source - Unknown

(2)

सच्ची लगन

नॉर्वे में एक रईस रहता था जिसका नाम फलेरा था। उसके यहाँ एंटोनियो नाम का एक नौकर काम करता था। पास ही में एक मूर्तिकार की दूकान थी। एंटोनियो को जब भी खाली समय मिलता वह मूर्तिकार की दूकान के पास खड़ा होकर मूर्तियाँ बनते हुए देखता था। उसे मूर्तियों की काफी कुछ समझ आ गयी थी और वह कभी-कभी वहां कार्य कर रहे कारीगरों की मदद भी कर देता था।

एक दिन दुकानदार ने कहा, ‘यहाँ आकर तुम अपना समय क्यों नष्ट करते हो?’ एंटोनियों बोला, ‘मुझे यहाँ आकर मूर्तियाँ बनते देखना अच्छा लगता है।’ इस तरह उसका आना निरंतर जारी रहा।

एक बार मालिक फलेरा के यहाँ दावत थी। भोजन स्थल की सजावट का कार्य मुख्य बैरे को सौंपा गया था लेकिन उससे सजावट का कार्य सही ढंग से नहीं हो पा रहा था। वह परेशान हो गया। उसे परेशान देखकर एंटोनियो ने कहा, ‘अगर तुम चाहो तो मै तुम्हारी मदद कर सकता हूँ।’ बैरे ने हामी भर दी।

एंटोनियों ने सबसे पहले बाज़ार से मक्खन मंगवाया। जमे हुए मक्खन से उसने चीते की एक आकर्षक मूर्ति बनायीं और उसे दावत स्थल के बीचोंबीच मेज पर सजा दिया। सभी मेहमानों ने मूर्ति की बहुत तारीफ की। उन्हीं मेहमानों में से एक व्यक्ति मूर्तिकला विशेषज्ञ था। उसे जब यह मालूम चला कि यह मूर्ति एक सामान्य से नौकर ने बनायी है तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। उसने हैरान होकर एंटोनियो से पूछा, ‘तुमने मूर्तिकला का प्रशिक्षण कहाँ से लिया?’ एंटोनियो ने जवाब दिया, ‘पास की ही दूकान पर वह रोज मूर्तियाँ बनते हुए देखता है। बस वहीँ से उसे प्रेरणा मिली।’

Moral : लगन, निष्ठा, समर्पण और इच्छाशक्ति हमें कुछ भी सिखा सकती है और हर कार्य में सफलता दिला सकती है।

Source - Unknown

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