Wednesday, October 30, 2013

Lal Bahadur Shastri Stories in Hindi


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Lal Bahadur Shastri : Life Incidents and Stories / Prerak Prasang

(1) सस्ती साड़ियाँ 

एक बार लाल बहादुर शास्त्री जी एक कपड़े की दूकान पर साड़ियाँ खरीदने गए. शास्त्री जी को देखकर दुकानदार बहुत खुश हुआ. उसने शास्त्री जी का बहुत आदर सत्कार किया. शास्त्री जी ने दूकान के मालिक से कहा, ‘ मैं जल्दी में हूँ. मुझे चार-पांच साड़ियाँ चाहिए.’ 

दूकान का मालिक शास्त्री जी को महंगे-महंगे दामों की एक से बढ़कर एक साड़ियाँ दिखाने लगा. शास्त्री जी ने कहा, ‘ भाई, मुझे इतनी कीमती साड़ियाँ नहीं चाहिए. कम दाम वाली साड़ियाँ दिखाओं.’ 

इस पर मालिक बोला, ‘ हमारा तो सौभाग्य है कि आप हमारी दूकान पर पधारे. आप सब कुछ अपना ही समझिये. दाम की तो कोई बात है ही नहीं. ‘ शास्त्री जी उनका आशय समझ गए. 

शास्त्री जी ने कहा, ‘ मैं तो कीमत देकर ही कुछ भी खरीदूंगा. तुम मेरी बात पर ध्यान दो और मुझे कम दाम वाली साड़ियाँ ही दिखाओ और सबके दाम भी बताते जाओ.’ 

तब मैनेजर ने थोड़ी सस्ती साड़ियाँ दिखाना शुरू किया. पर शास्त्री जी बोले, ‘ ये साड़ियाँ भी मेरे लिए महँगी है. इससे भी कम कीमत की साड़ियाँ दिखाओ. ‘ 

दूकान के मालिक को इतने कम दाम की साड़ियाँ दिखाने में संकोच हो रहा था. शास्त्री जी यह भांप गए. वे बोले, ‘ दूकान में जो सबसे कम कीमत की साड़ियाँ हैं, वही साड़ियाँ मुझे बताओ. ‘ 

अंततः मैनेजर ने उनकी इच्छानुसार सबसे सस्ती साड़ियाँ दिखाना शुरू किया. शास्त्री जी ने उनमें से कुछ साड़ियाँ चुनी और उनकी कीमत चुका कर चले गए. शास्त्री जी के जाने के पश्चात् वहां उपस्थित सभी कर्मचारी और ग्राहक उनकी सादगी की चर्चा करते हुए उनके प्रति श्रद्धा से भर उठे. 

(2) पक्षपात न किया जाए 

जब शास्त्री जी गृह मंत्री थे वे इलाहबाद में रहते थे. ऐसे समय जब नेता सरकारी सुविधाएँ प्राप्त करने के लिए मारामारी करते हैं, यह हैरान करने वाली बात थी कि लाल बहादुर शास्त्री जी किराये के मकान में रहते थे. इस कारण उन्हें ‘बिना मकान का गृहमंत्री’ कहा जाता था. 

एक बार मकान मालिक को मकान की आवश्यकता थी. इसलिए उन्होंने अपना निवास स्थान खाली कर दिया. किराये पर दूसरा मकान लेने के लिए उन्होंने आवेदन पत्र भरा. बहुत समय बीत गया पर शास्त्री जी को मकान नहीं मिला. उनके एक मित्र ने अधिकारीयों से पता लगवाया. अधिकारीयों ने जानकारी दी कि 176 आवेदकों के नाम शास्त्री जी से पहले अंकित है और शास्त्री जी का कड़ा आदेश है कि उनका आवेदन पत्र जिस क्रम में दर्ज है उसी क्रम में उन्हें मकान आवंटित किया जाए. उनके पद को देखते हुए किसी भी तरह का पक्षपात ना किया जाए. 

How are these short hindi stories and incidents ( prerak prasang ) of Lal Bahadur Shastri Ji ‘s life ?