Mahatma Gandhi Stories in Hindi



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Mahatma Gandhi Life Incidents and Stories

(1) छूत-अछूत

गांधी जी के पिता का ट्रांसफर जब पोरबंदर से राजकोट हुआ था तब राजकोट में उनके पड़ोस में उका नाम का एक सफाई कर्मी काम करता था. गांधीजी उका को बहुत पसंद करते थे. एक बार किसी अवसर पर गांधीजी को मिठाई वितरण का कार्य सौंपा गया था. गांधीजी मिठाई लेकर सबसे पहले उका के पास गए. उका गांधीजी से दूर होते हुए बोला, ‘मैं अछूत हूँ. मुझे मत छुईये.’ गाँधी जी ने उका का हाथ पकड़ा और यह कहकर मिठाई थमा दी, ‘अछूत कोई नहीं होता, हम सब इंसान हैं. ‘ 

माँ पुतली बाई को जब इस बारे में मालूम पड़ा तो उन्होंने गांधीजी को डांट लगायी और कहा, ‘जाओ नहा कर आओ. तुम्हे नहीं पता उका अछूत है.’ गांधीजी ने कहा, ‘ माँ साफ़ सफाई करना कोई बुरा कार्य तो नहीं है. मैंने तो सुना है कि भगवान् श्री राम ने भी गुह नामक अछूत को गले लगाया था और रामायण को तो हमारे धर्म में भी माना जाता है. मैं तो बस समाज से छूत-अछूत जैसी बुरी धारणाओं को हटाना चाहता हूँ. 

(2) पैसे का महत्त्व 

गाँधी जी जब अफ्रीका में थे तब उनके पास उनका परपोता आया हुआ था. गांधीजी ने एक नयी पेंसिल अपने परपोते को दी. लिखते-लिखते जब पेंसिल छोटी हो गयी तो बच्चे ने सोचा कि अगर मैं इस पेंसिल को फ़ेंक दूँ तो मुझे नयी पेंसिल मिल जायेगी. ऐसा सोचकर उसने पास ही की झाड़ियों में वह पेंसिल फ़ेंक दी. 

उसने गांधीजी से नयी पेंसिल मांगी. गांधीजी ने उसे पुरानी पेंसिल लाने को कहा. बच्चे ने कई बहाने बनाये पर आखिरकार उसे झाड़ियों से ढूंढ कर वह पेंसिल लानी पड़ी. पेंसिल देखकर गांधीजी ने कहा, ‘अभी भी यह पेंसिल किसी ना किसी के काम आ सकती है.’ बच्चा समझ गया और उसने उसी पेंसिल से लिखना शुरू कर दिया. 

गांधीजी जानते थे कि देश में ऐसे कई परिवार हैं जिन्हें दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता. पढ़ना - लिखना तो बहुत दूर की बात थी. इसलिए गांधीजी पैसे का महत्त्व बहुत अच्छे से जानते और समझते थे. 

(3) चोर भी तो भूखा है 

गांधीजी के आश्रम में एक बार एक चोर आ गया था. आश्रम के निवासियों ने उसे एक कोठरी में बंद कर दिया. सुबह जब गांधीजी नाश्ता करने बैठे तब चोर को उनके सामने लाया गया. गांधीजी ने आश्रम वासियों से पूछा , इसे नाश्ता करवाया या नहीं ? पहले इसे नाश्ता करवाओ फिर मेरे पास लाओ. ‘ एक व्यक्ति ने आश्चर्य से पूछा , ‘ चोर को नाश्ता ? ‘ 

गांधीजी ने कहा, ‘ चोर से पहले ये भी एक इंसान है और इसे भी भूख लगी होगी.’ 

(4) कर्तव्य 

गांधीजी एक बार रेल में यात्रा कर रहे थे. पास ही में बैठे एक व्यक्ति ने डिब्बे में ही थूंक दिया. गांधीजी को यह अच्छा नहीं लगा पर वे चुप रहे. उन्होंने कुछ कागज के टुकड़े उठाये और गंदगी को साफ़ कर दिया. उस व्यक्ति ने सोचा कि यह मुझे नीचा दिखाना चाहता है इसलिए उसने फिर से थूंक दिया. गांधीजी ने भी वापस साफ़ कर दिया. यह सिलसिला लगातार चलता रहा. जब स्टेशन आ गया तो लोगों की भीड़ गांधीजी की जय जयकार करते हुए उनके डिब्बे की तरफ बढ़ी. थूंकने वाले आदमी को जब पता चला कि जो व्यक्ति थूंक को साफ़ कर रहा था वह गांधीजी है और लोग उनकी जयकार कर रहे हैं तो उसे बहुत पछतावा हुआ. उसने गांधीजी के पैरों में गिरकर माफ़ी मांगी. गांधीजी ने उससे कहा, ‘मैंने तो बस अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है. अगर कभी तुम्हारे सामने भी ऐसी स्थिति आये तो तुम भी अपने कर्तव्य को याद रखना. ‘ 

How are these short hindi stories and incidents ( prerak prasang ) of mahatma gandhi's life ? 

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