Tuesday, October 22, 2013

Poem on Moon in Hindi


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मेरा चाँद 

ऐ चाँद ! 
क्या मेरा एक काम करोगे ?
वो जो दूर चला गया है मुझसे 
क्या उसकी एक झलक मुझे ला दोगे ? 

देखो ना ! कितने साल हो गए हैं 
उसे देखे हुए, उससे मिले हुए 
एक अरसा हो गया 
उससे लड़े और झगड़े हुए. 

आज मुझे उससे जुड़ी हर बात 
बहुत याद आ रही है 
सबके पास होगा अपना चाँद 
और मेरे हिस्से आई बस ये तन्हाई है. 

तुम तो गवाह हो ना 
हर उस रात के 
जब हाथों में डाले हाथ 
अँधेरी सुनसान राहों पर 
हम बेख़ौफ़ निकलते थे 
रास्ते हो जाते थे कितने छोटे 
जब प्यार के दो मुसाफिर 
हर कदम साथ-साथ चलते थे. 

वह एक दम शांत था 
बिल्कुल तुम्हारे जैसा 
इसलिए लड़ाई का बहाना 
हमेशा मुझे ही ढूंढना होता था. 
और लड़ने-झगड़ने के बाद 
बच्चों की तरह मेरा ही रोना छूटता था. 

बस वो भीगे पल और उसका प्यार भरा स्पर्श 
बयां करना चाहूँ तो भी नहीं कर सकती 
प्यार बस किया जा सकता है महसूस 
इससे ज्यादा कुछ और मैं कह भी नहीं सकती.

याद करने लगी जो सारी बातें 
और कर दी बयां जो सारी मुलाकाते 
तो सच आज फिर से रों पडूँगी 
मचल रहा है कब से जो यादों का तूफ़ान 
बन कर झरना आज मैं बिखर ही पडूँगी. 

पढ़ेगा जब वो मेरी तड़प 
जानती हूँ आँखें उसकी भी भीग जायेगी 
और उसकी आँखों में जो आये आंसू 
तो सच मेरी जान ही निकल जायेगी.

ऐ चाँद बस तुम इतना कर दो 
या तो मेरा चाँद ले आओ 
या फिर आज मेरे लिए अमावस कर दो 
क्यूंकि आज की रात जो तुम्हे देखा 
तो अपना दर्द छिपा नहीं पाउंगी 
गर ना आया मेरा चाँद 
तो सच आज मैं टूट ही जाउंगी. 

Monika Jain ‘पंछी’ 

How is this poem on Moon of Karva Chauth, Love, Separation and Memories ?