Friday, November 22, 2013

Poem on Politicians in Hindi


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Poem : Indian Politicians / Neta 

दुनिया के सारे अभिनेता 
नेताओं के आगे फेल हो जाते हैं 
हीरो की फिल्म पिटी तो वे फ्लॉप 
पर हमारे नेताजी फ्लॉप होकर भी 
हिट हो जाते हैं. 

चुनावों का दौर आते ही 
बरसाती मेढंको की तरह सब टर्राने लगते हैं
पांच साल बैठ कर मलाई खाने के लालच में 
सब अपना रेडियो बजाने लगते हैं.

जैसे हर शादी बारात में 
बहारो फूल बरसाओं जैसे गाने 
सुनाई देते हैं
वैसे ही चुनावों के मौसम में 
‘हमारा नेता कैसा हो’ जैसे नारे 
कानो पर पड़ते हैं. 

नेताओं का अपनी मंडली के साथ आना 
नारे लगाना, माला पहनाना और तालियाँ बजाना 
मुस्कुराकर ढेर सारे फोटो खिंचवाना
चुनावों तक बस यहीं तमाशा है
उसके बाद दम तोड़ती नज़र आती 
हर उम्मीद और आशा है. 

नेताओं के लच्छेदार भाषण से 
डूबती अर्थव्यवस्था भी 
तरक्की करती नज़र आती है 
उनकी आँखों से देखें तो 
सूखी बंझर जमीन भी 
हरी-भरी नज़र आती है. 

जनता की सेवा ही धर्म है मेरा 
ये कुछ रटे रटाये डॉयलॉग जो 
नेताजी चुनावों के मौसम में 
बार-बार दोहराते हैं. 
दो चार महीने सेवक बनने का दिखावा 
फिर पूरे पांच साल हमें इशारों पर नचाते हैं. 

बिकाऊ मीडिया भी शैतानों को 
सबसे शरीफ़ और सेवाभावी 
बनाकर पेश करता है.
जनता के विश्वास के साथ धोखा और
अपराधियों के सपनों को कैश करता है. 

पक्ष-विपक्ष के एक दूसरे पर 
मढ़े आरोपों में 
जनता उलझ कर रह जाती है 
दोनों के हित सध जाते हैं और 
राजनीति की रोटियां सिक जाती है.

एक धर्म की बुराइयाँ सुन 
दुसरे धर्मावलम्बी पट जाते हैं 
और नेताओं के नाटक को सच मान 
हम आपस में बंट जाते हैं.

मेरे देश के नौजवानों 
प्रचार से प्रभावित ना होकर 
व्यक्ति के चरित्र और कार्यों को आधार बनाओं.
झूठे वादों के पर्चे बांटने वालों को नहीं 
सच्चाई की शपथ लेने वालों को विजेता बनाओं. 

Monika Jain ‘पंछी’

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