Thursday, November 28, 2013

Poem on Sadness in Hindi


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Hindi Poem : Sadness / Sad

अक्सर लोग पूछते हैं 
कहाँ से लाती हो इतना दर्द 
जो छलकता है
तुम्हारी कविताओं में 
बनकर बेदर्द. 
मैं बस मुस्कुरा देती हूँ 
और इस मुस्कराहट के पीछे 
ना जाने क्या-क्या छिपा लेती हूँ. 
क्योंकि अब बस कोरे काग़ज ही 
मेरे दर्द और अकेलेपन के साथी हैं 
आंसुओं से भीगी ना जाने कितनी राते 
मैंने बस इन कोरे पन्नों से ही तो बांटी हैं. 
और सच कहूँ तो 
इनसे अच्छा और सच्चा साथी
कोई और हो नहीं सकता. 
देहाकर्षण और स्वार्थ से लिपटे चेहरों में 
मेरे ह्रदय के प्रेम कलश को छूने वाला 
कोई ह्रदय हो नहीं सकता. 

एक बहुत बड़ा गुण होता है भावुकता 
पर आज के परिप्रेक्ष्य में यह 
लगता है जैसे हो मुर्खता.
पर मेरा युवा मन, युवा सपने और 
उसमें छिपा ढेर सारा शाश्वत प्रेम
यह सब कहाँ समझता था.
वह तो हर पल, हर लम्हा 
सनातन प्रेम के सपने बुनता था.

अत्यंत संवेदनशील और 
करुण सपनों में जीने वाली मैं 
यह कहाँ जानती थी कि
जब होगा ज़िन्दगी की हकीकत से सामना 
तो मेरे ह्रदय की कोमल भावनाएं 
एक दिन मर जायेगी.
मेरे स्नेह का स्त्रोत सूख जाएगा 
और खुद अपने हाथों ही मैं 
अपने सपनों की चिता जलाऊंगी.

मैंने बना ली है 
अपने ह्रदय के चारो ओर 
एक अभेद दीवार
जिसे पार करने की कोशिश 
अब है बिल्कुल बेकार.
क्योंकि मेरा निर्लिप्त मन 
अब किसी को इजाज़त नहीं देता 
दीवार के उस पार झाँकने की
जहाँ एक बंद दरवाजा हैं 
जिसमें रखी है मेरे आहत मन की 
टूटी-फूटी किरचें 
जो वक्त बेवक्त चुभती रहती है.

Monika Jain ‘पंछी’ 

How is this poem on deep sadness, broken heart and resulted detachment and insensitivity ?