Wednesday, December 4, 2013

Poem on Dreams in Hindi


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Hindi Poem : Dreams / Wishes

देख रही हूँ कबसे 
तुम्हारे जीवन में आई 
इस नयी सुबह के सूरज को. 

माँगना चाहती हूँ उससे 
मेरे हिस्से की रौशनी भी 
तुम्हारे लिए. 

और लौट जाना चाहती हूँ 
फिर से उन गुमनाम अंधेरों में 
जहाँ से एक दिन लाये थे तुम मुझे 
सपनों की धूप से खिलखिलाते सवेरों में.

ताकि कल जब मैं ना रहूँ 
तब भी मेरे हिस्से की धूप
चहकती रहे तुम्हारे आँगन में 
और तुम्हारे सपने 
बनकर मेरी चाहत 
पलते रहे तुम्हारे जीवन में.

तुम्हे अच्छा लगे या लगे बुरा 
पर इसमें भी मेरा ही स्वार्थ है 
तेरा मेरा ना सही
पर हमारे हिस्सों की
धूप का तो साथ है.

हाँ जानती हूँ कई शिकायते हैं तुम्हें 
ना जाने कब से 
और नहीं चाहते हो तुम अपने लिए 
कोई भी दुआ अब मुझसे.

पर एक दिन मिलकर 
बताना चाहूंगी तुम्हें 
कि मैंने ऐसा क्यूँ किया ?
क्यूँ बार-बार खुद को 
और तुम्हे बेवजह दर्द देकर
अपने से दूर किया.

क्यूँ बढ़ ना पायी उन रास्तों पर 
जिन पर चलने की हमारी चाहत थी 
क्यूँ बदल डाली वो राहें 
जिन पर खिलखिलाती सी 
तेरी और मेरी मुस्कुराहाट थी.

तब तक के लिए सीख लूंगी
तुम्हारी नफरत और शिकायतों 
के साथ जीना 
तुम्हें क्या पता 
कितना अच्छे से आता हैं मुझे 
जिंदगी का दर्द पीना. 

खेर! कल के सूरज के साथ 
मैं नहीं रहूंगी तुम्हारे जीवन में 
हाँ! मेरी दुआएं शामिल होंगी 
तुम्हारी राहें रौशन करने वाली 
हर एक किरण में.

बस चाहती हूँ तुम्हारा जीवन 
सफलता का पर्याय बन जाए 
और तुम्हारी उम्मीदों का आसमां
तुम्हें बुलंद ऊंचाइयों पर ले जाए. 

प्यार की तुम्हारे जीवन में 
कुछ ऐसी बारिश हो 
बन जाए वह तुम्हारी 
जिसे पाने की 
तुमने की ख्वाइश हो. 

उठ रहे होंगे ना जाने 
कितने सवाल 
तुम्हारे भी जहन में 
हाँ नहीं समझ पाओगे तुम 
क्या चल रहा है मेरे मन में. 

गर समझना चाहो तो बस 
इतना ही समझ लो 
अब ऐसे ही सपने बुनती है
 तुम्हारी ये मिष्ठी
और ऐसे ही उड़ता है 
उसके मन का पंछी.

Monika Jain ‘पंछी’

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