Wednesday, January 30, 2013

Poem on Truth in Hindi


Keywords : Poem on Truth in Hindi, Poetry, Satya par Kavita, Asatya, Sachai, Truthfulness, Jhooth, Shayari, Sms, Messages, Slogans, हिंदी कविता, सत्य, असत्य, सच्चाई, शायरी, Poems, Lies and Deceit 

सत्य तुम रुकना नहीं 
सत्य तुम झुकना नहीं.
हो भले असत्य की 
काली घटाएं सामने 
बन के सूरज तुम चमकना 
पर कभी छिपना नहीं 
सत्य तुम रुकना नहीं.
है अंधेरों से भरे 
दूर तक ये रास्ते 
बाँट जोते हैं तुम्हारी 
रौशनी के वास्ते 
इन अंधेरों से कभी 
सत्य तुम डरना नहीं 
सत्य तुम रुकना नहीं.
बढ़ रहा असत्य का 
साम्राज्य चहुँ ओर ही 
अन्याय और अनीति की 
फैली हवा सब ओर ही 
बन के खुशबूं तुम महकना 
पर कभी खोना नहीं 
सत्य तुम रुकना नहीं.

Monika Jain 'पंछी'

Tuesday, January 29, 2013

Poem on Courage in Hindi



Keywords : Poem on Courage in Hindi, Sahas par Kavita, Determination Poetry, Difficulties in Life, Problems, Shayari, Sms, Messages, हिंदी कविता, साहस, दृढ़ संकल्प, निश्चय, शायरी, Never Give Up Slogans

चल रही है ये धरा 
चल रहा है ये गगन 
एक क्षण भी ना रुके जो 
चल रही है वो पवन 
ऐ मुसाफिर! हार कर 
सांस जब तक चल रही है 
दर्द के बादल हैं छाये 
गम के ये साये रुलाये 
पर इन्हें तू ना बनाना 
बैठ जाने का बहाना 
गम के इन सायों में डूबा 
तू समय बेकार ना कर 
साँस जब तक चल रही है 
मुश्किलों को पार कर।

Monika Jain 'पंछी'

Monday, January 28, 2013

Judai Poem in Hindi


Keywords : Poem on Judai in Hindi, Sacrifice, Poetry, Kavita, Shayari, Sms, Messages, हिंदी कविता, जुदाई, विरह, अलगाव, बिछोह, शायरी, त्याग, बलिदान, Poems

Sookhi daalon se bichhudne ka
Kya shok karna
Tum Ped ban khadi rahna
Main sookhe patton sa 
Alag ho jaunga
Utha legi mujhe 
Jalavan beenne valiyan 
Jhonk dengi mujhe 
Kansaar ke aanch mein
Bhoon legi apne
Armaano ka bhunja
Ya fir kisi ghoore ka indhan banunga 
Tu karte rahna sheetal sabko 
Main jal jal taap badhaunga.


By Randhir 'Bharat' Chaudhary

Sunday, January 27, 2013

Hindi Shayari on Distance


Keywords : Hindi Shayari on Distance, Love, Closeness, Poem, Poetry, Kavita, Sms, Messages, Nazdeekiyan, हिंदी कविता, नजदीकियां, दूरियां, शायरी, Dooriyan, Faasle Poems
 
सच कहूं
तो 
ना बढ़ो नजदीकियां
ये तेज़ी से बढ़ती नजदीकियां 
एक दिन 
बहुत दूर कर देगीं हमें
तुम्हे नहीं होगा एहसास
मगर
एक हद के बाद 
हमारा सामीप्य 
कारण बनेगा 
सबसे बड़े फासले का
देखो 
शायद नहीं मानोगी तुम
पर मान जाती तो अच्छा होता
समझ पाती तो अच्छा होता
तुम मुझसे प्यार कर भी
दूर रह पाती तो अच्छा होता

 By Randhir 'Bharat' Chaudhary

Saturday, January 26, 2013

Poem on Republic Day in Hindi


Keywords : Poem on Republic Day of India in Hindi, 26 January, Gantantra Diwas par Kavita, Loktantra, Jantantra, Prajatantra, Democracy, Democratic Country, Poetry, Shayari, Sms, Messages, हिंदी कविता, 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस, लोकतंत्र, जनतंत्र, प्रजातंत्र, शायरी, Slogans

पास ही के एक स्कूल से 
सुनाई पड़ रही थी 
देशभक्ति के गीतों की 
स्वर लहरियां
और गूँज रहे थे 
माँ भारती की 
जय - जयकार के 
गगनचुम्बी नारे 
बिना स्कूल बेग के 
आते जाते बच्चे 
अहसास करा रहे थे 
गणतंत्र दिवस के 
आगमन का 
एक ऐसा गणतंत्र 
जिसमें रह गया है 
सिर्फ तंत्र 
और नदारद है 
आम जन 
एक ऐसा जनतंत्र 
जो जनता का
जनता के लिए 
जनता के द्वारा शासन नहीं 
बल्कि नेताओं का
नेताओं के लिए 
एक ऐसा लोकतंत्र 
जिसमें लोगों को 
याद तो किया जाता है 
लेकिन बस
चुनावों के समय 
एक ऐसा प्रजातंत्र 
जिसमें प्रजा तरसती है 
और मंत्री उड़ाते हैं मौज 
पांच सितारा होटलों में 
रकम जेब में मोटी लिए  
सोच रही हूँ कब से 
क्यों हम हो गयें है इतने विवश 
जो मना रहे हैं गणतंत्र दिवस
यह  तंत्र हमारा है ही नहीं 
फिर हम क्यों हैं इतने बेबस ?

Monika Jain 'पंछी'

Friday, January 25, 2013

Prem Kavita in Hindi


Keywords : Prem Kavita in Hindi, Pyar ka Ehsas Poem, Ehsaas Poetry, Ajnabi Shayari, Prem Kahni, Love Story Sms, Messages, Slogans, हिंदी कविता, प्रेम कहानी, प्यार का अहसास, शायरी, Poems

एक अजनबी से मुलाकात हुई 
धीरे-धीरे कुछ बात हुई 
अल्फाज़ बयां उसने जो किये 
दिल को वो मेरे छू से गए।
जादू सा जैसे छाने लगा 
सपनों में अब वो आने लगा 
बिन बात के मैं मुस्काने लगी 
मदहोशी सी कुछ छाने लगी।
बातों का दौर चलने लगा 
मुलाकातों में वो बदलने लगा 
हर रोज नया सवेरा हुआ 
ख्वाबों पर उसका पहरा हुआ 
हर शाम मेरी मस्तानी हुई 
जब शुरू प्यार की कहानी हुई 
इनकार में भी इकरार हुआ 
हाँ माना मैंने प्यार हुआ। 

Monika Jain 'पंछी'

Poem on Education System in Hindi


Keywords : Poem on Education System in Hindi, Modern Purpose of Education in India, Adhunik Shiksha Pranali, National Education Day, Shiksha Diwas par Kavita, Poetry, Shayari, Slogans, Sms, Messages, Educating Humanity, हिंदी कविता, शिक्षा दिवस, आधुनिक शिक्षा प्रणाली, शायरी, Poems


  चाहतें
जो रोज़ अंकुरित होती रही

जीव विज्ञान पढ़कर

पंछियों की तरह 


भौतिकी,जो प्रोपेलेंट की तरह 

उकसाती रही

प्रकाश की गति प्राप्त करने को 

पर मैं उलझता रहा

जैविक रसायनिक प्रक्रियायों में

कोशिश करता रहा समझने की 

सिद्धांतों को पुन: प्रतिपादित करने की 

व्याख्यायित करता रहा सूत्रों को
और हल करता रहा गणित की 
अवकल समीकरणों को 
ज्यामिति की परिधियों ने कोशिश की
संक्षेपित करने की, मेरा आकाश
त्रिकोणमिती ने बाँट डाला
मेरी सुबहों और शामों को
और लगा रहा सत्यापित करने में 
अनमने सम्बन्धों को
कि धकेल दिया गया मैं 
मानवों द्वारा प्रचारित 
छद्म प्रौद्योगिकी की दुनिया में
मेरा साहित्य रोता है
शिक्षित होना था मुझे 
संसाधन नहीं बनना था 
अगर यही है इंसानियत
तो छोड़ दो मेरे लिए कुछ जंगल के टुकड़े 
मुझे जीविका के लिए
इन्सान नहीं बनना था

Randhir 'Bharat' Chaudhary

Thursday, January 24, 2013

Poem on Women Empowerment in Hindi


Keywords : Poem on Women Empowerment in Hindi, Woman Power, Nari Sashaktikaran, Women's Day, Mahila Diwas par Kavita, Safety, Discrimination, Rights, Abuse, Suraksha, Poetry, Shayari, Slogans, Sms, Messages, हिंदी कविता, महिला दिवस, नारी सशक्तिकरण, औरत, महिला सुरक्षा, शायरी, Poems

हाँ मैं हूँ एक विलुप्त प्रजाति 
जिसकी सुरक्षा और सशक्तिकरण की 
बातें हो रही है, देश भर में।
जिसे इन्साफ दिलाने के लिए 
बन रहें हैं महिला कोर्ट 
जिसके अस्त्तित्व की रक्षा के लिए 
गढ़े जा रहें हैं कानून के नए समीकरण।
लेकिन सच तो सिर्फ इतना है कि 
चुनौती बन गया है मेरे लिए 
मैं पूछना चाहती हूँ 
इस पुरुष प्रधान समाज से 
क्या अपनी सभ्यता के विकास के लिए 
वो बना पाएंगे ऐसे कारखाने 
जहाँ खत्म हो जाती है 
जरुरत एक औरत की।


Monika Jain 'पंछी'

Wednesday, January 23, 2013

Poem on Marriage in Hindi


Keywords : Poem on Marriage in Hindi, Shadi par Kavita, Vivah, Gender Discrimination, Inequality, Crime against Women, Shayari, Poetry, Sms, Messages, Slogans, हिंदी कविता, शादी, विवाह, नारी, शायरी, Poems

 मुझे माफ करना प्रिय !
पर साथ रहने के लिए
हमारा प्रेम में होना काफी नहीं 
हमे विवाह करना होगा
लेनी होगी आज्ञा समाज की।
हाँ उसी समाज की 
और समाजवादियों की
जहां कई बेटियाँ 
ताकि बचाया जा सके 
शादी का खर्च।
जहां कई बेटियों को
पढ़ने का समान अवसर 
नहीं दिया जाता 
क्योंकि उन्हे ब्याह कर 
पराए घर जाना है।
जहां कई बेटियाँ 
जिंदा जला दी जाती है
और कुछ बेटियाँ 
अपने सपने जला कर
जीने को विवश कर दी जाती है।
मर्जी से जीने की 
क्योंकि उसके पिता और भाइयों के 
नज़र के पहरे के साथ 
कई भेड़ियों की नज़रें भी घूमती है
और कई तो पहरेदार ही भेडियें हैं 
क्योंकि कभी भी, कहीं भी
अस्मत लूटी जा सकती है उनकी
और समाज स्वीकार कर लेगा 
उन दरिंदों को 
पर कोई दामिनी स्वीकार नहीं इन्हें 
क्योंकि विवाह शोषण के लिए होता है 
शोषितों का विवाह नहीं होता।

 By Randhir 'Bharat' Chaudhary

Tuesday, January 22, 2013

Poem on Money in Hindi


Keywords : Poem on Money in Hindi for Kids, Poor Children, Garib Bache, Sapne, Dreams of Poor People, Paise par Kavita, Dhan, Shayari, Slogans, Messages, Sms, हिंदी कविता, पैसे, गरीब बच्चे, सपने, धन, शायरी, Poems, Poverty, Poor Child

काश! हमें भी मिल जाते 
खूब सारे पैसे 
सच हो जाते फिर तो मन के 
सपने कैसे कैसे।
खाते लड्डू, पेड़े, बर्फी 
रसगुल्ले की मिठाई 
चॉकलेट और टॉफी के संग 
करते मौज मनाई।
नए-नए खिलौने लाते 
हम तो करते मस्ती 
हाथ कटोरा लेकर फिर ना 
फिरते बस्ती बस्ती।
कूड़े और कचरे में हम ना 
बचपन अपना खोते 
आधी सूखी रोटी खाकर 
भूखे हम ना सोते।
स्कूल पढ़ने जाते हम भी 
नया-नया बस्ता लेकर 
पढ़ लिखकर बन जाते अफसर 
नहीं मारता कोई ठोकर।
जाते पिकनिक सैर, सपाटा 
कुल्लू और मनाली 
जेबे रहती गरम-गरम 
कभी ना होती खाली।

Monika Jain 'पंछी'


Poem on Bhartiya Nari in Hindi


Keywords : Poem on Bhartiya Nari in Hindi, Indian Women Independence, Freedom, Woman  Safety, Nari Shakti par Kavita, Shayari, Sms, Messages, Slogans, Mahila Suraksha, हिंदी कविता, नारी शक्ति , महिला सुरक्षा, आज़ादी, स्वतंत्रता, शायरी, Poems

जिस देश में अजन्मी बिटिया को 
कोख में मारा जाता हो 
जिस देश में दहेज़ का दानव 
बहु को लील जाता हो 
उस देश में दुर्गा पूजा की 
बातें बेमानी लगती है 
नारी की आज़ादी बस इक 
झूठी कहानी लगती है।
जिस देश में लड़की का सड़कों पर 
चलना भी दुश्वार हुआ 
गिद्ध लगाये बैठे दृष्टि 
बार - बार बलात्कार हुआ 
उस देश में दुर्गा पूजा की 
बातें बेमानी लगती है 
नारी की आज़ादी बस इक 
झूठी कहानी लगती है।
खुद भारत माँ के भक्षक हो 
पुलिस के पहरेदार जहाँ 
खुद चोरों के ही रक्षक हो 
उस देश में दुर्गा पूजा की 
बातें बेमानी लगती है 
झूठी कहानी लगती है।

Monika Jain 'पंछी'

Poem on Separation in Hindi


Keywords : Poem on Adhura Pyar in Hindi, Respect, Samarpan, Separation, Judai  par Kavita, Poetry, Shayari, सम्मान, समर्पण, जुदाई, हिंदी कविता, शायरी, Astitva, Slogans, Sms, Messages

जब तुम्हीं अवहेलना करते रहे 
क्या करूँ दुनिया का मैं सम्मान लेकर 
अजनबी बनकर जो तुम चल दिए 
क्या करूँ विश्व की पहचान लेकर 
मिल ना पाया स्नेह मुझको जब तुझी से 
क्या करूँ इस जगत का मैं प्यार लेकर 
शब्द जो दिल को तुम्हारे छू न पाए 
क्या करूँ उन शब्दों को मैं गान देकर 
दूर तुमसे होके भी जो ना रुकी 
क्या करूँ उन साँसों को मैं जान देकर 
क्यूँ चलूँ मैं दिल में कोई अरमान लेकर 
जब मेरा अस्तित्व है तुझसे जुड़ा 
क्या करूँ मैं खुद को कोई नाम देकर

Monika Jain 'पंछी'

Poem on Lost Love in Hindi


Keywords: Poem on Lost Love in Hindi, End of Love Story, Prem Kahani ka Ant, Poetry, Shayari, Kavita, Sms, प्रेम कहानी का अंत, हिंदी कविता, शायरी, Messages

अनावर्तित धड़कने
लड़खड़ाती जुबान 
नज़रे छुपाने को खुलती आँखें 
लटके हाथ, ढीले कन्धे 
पेशानियों से भरा माथा 
नमकीन आसुओं के धब्बों से पटी 
सूजे से उसके गाल 
एक तस्वीर सी उभरी
ठीक अगले ही पल कट गयी जीभ
भींच गयी मांसपेशियाँ 
झूल गईं भौंए
और अनजान लगी छुअन 
थमती नब्ज, गाढ़ी होती लहू 
संक्षेपित यादों के संग 
अनपेक्षित इच्छाओं का 
आकस्मिक निधन
एक और प्रेम कहानी का 
आशातीत अन्त

By Randhir  'Bharat' Chaudhary 

Story on Greediness in Hindi




Keywords : Short Story on Greediness in Hindi, Greed, Selfishness, Lalach, Human Nature, Swarth, Cow, Animals, Kahani, Katha, Tales, लालच, स्वार्थ भावना, हिंदी कहानी, कथा, Tale



चार आदमियों ने मिलकर एक गाय खरीदी। गाय एक मालिक चार। एक व्यक्ति के घर पहले दिन गाय रही। दोनों समय दूध निकाला। चारा पानी का जब समय आया तो उसने सोचा - यह गाय तो मेरे पास आज है, कल जिसके पास रहेगी, वह खिलायेगा पिलाएगा। मैं क्यों चिंता करूँ। कल गाय दूसरे के पास रही। उसने भी तर्क सोचा कि कल गाय जिसके पास रही उसने इसे चारा डाला ही है और कल आगेवाला डालेगा ही। ऐसा सोचकर उसने भी चारा नहीं डाला। फलस्वरूप गाय ने दूध कम कर दिया। तीसरे और चौथे व्यक्ति ने भी यही तर्क सोचा। शने: शने: गाय का दूध ही सूख गया और गाय मर गयी। यह है मनुष्य की स्वार्थ भावना।

Courtesy  : Swadhayay Sandesh 

Story on Fear in Hindi


Keywords : Story on Fear in Hindi, Bhay, Dar, Rat, Cat, Dog, Lion, Shikari, Hunter, Human, Kahani, Katha, Tale, भय, डर, हिंदी कहानी, कथा, Tales


एक चूहा था, उसे बिल्ली से सदैव डर लगता था। एक बार एक ऋषि ने वरदान दिया और वह बिल्ली बन गया। बिल्ली का भय मिटा तो कुत्ते का भय सताने लगा। ऋषि ने अब उसे कुत्ता बना दिया। कुत्ता बनने पर अब उसे शेर का भय सताने लगा। सोचने लगा - अब मुझे किसी का भय नहीं है, सिर्फ शिकारी का डर लगता है। ऋषि ने पूछा अब तुम क्या चाहते हो ? मनुष्य बना दूँ ? नहीं, मैंने स्पष्ट अनुभव कर लिया है कि कहीं भी अभयता नहीं है, सर्वत्र भय है अतः मुझे तो पुनः चूहा बना दो। 

ऋषि ने कहा - 'पुनर्मुषको भव' - कहकर उसे चूहा बना दिया। इसी प्रकार जो अपरिपक्व साधना से आगे बढ़ने की सोचता है, उसे वापस लौटना पड़ता है। 

Courtesy : Swadhayay Sandesh

Poem on Exams in Hindi


Keywords : Poem on Exams in Hindi, Exam, Examination par Kavita, Pariksha, School Days, Life, Memories, School ke Din, Yaadein, Poetry, Shayari, Slogans, Sms, हिंदी कविता, स्कूल के दिन, यादें, परीक्षा, जीवन, शायरी, Messages

बचपन में स्कूल की परीक्षा बहुत सताती थी 
एग्जाम के नाम से ही कंपकपी छूट जाती थी।
अब जब असल जिंदगी में कदम रखा है 
तो सोचती हूँ ......................................
स्कूल की परीक्षाएं कितनी आसान थी 
जिंदगी की मुश्किलों से बिल्कुल अनजान थी। 
होते थे कुछ सलेक्टेड चेप्टर्स 
याद ना करने पर सुनने होते थे बस लेक्चर्स।
हर क्वेश्चन का लिखा हुआ जवाब होता था 
हमारा काम बस उन्हें याद करना होता था।
मार्क्स अच्छे आने पर शाबासी मिलती थी 
फेल हो जाने पर बस डांट ही तो पड़ती थी।
पर जिंदगी की ये परीक्षा कितनी बड़ी है 
कभी ना खत्म हो वो मुश्किलें खड़ी है।
यहाँ ना तो कोई फिक्स सिलेबस होता है 
ना एग्जाम की तारीख का अता-पता होता है। 
रोज - रोज नए सवाल होते हैं 
जिनके नहीं कोई जवाब होते हैं।
काश ! जिंदगी की परीक्षा भी उतनी आसान होती 
तीन घंटे का पेपर और छूटी हमारी जान होती। 

Monika Jain 'पंछी'