Sunday, April 28, 2013

Poem on Female Infanticide in Hindi

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गर्भ मे पलती बेटी, पल-पल करे गुहार
माँ! मुझे मत मार, ओ माँ! मुझे मत मार

मैं भी दुनिया देखूँगी, चिड़ियाँ सी मैं चहकुंगी
तेरे आँगन की बन फुलवारी, फूलों सी मैं महकुंगी

गुड़ियों संग मैं खेलूँगी, कोयल सी मीठी बोलूँगी
पायल की छम-छम करती माँ, तेरे आँगन डोलूँगी

बन जाऊँगी माँ मैं तेरे, आँगन की झंकार
माँ! मुझे मत मार, ओ माँ! मुझे मत मार

मिश्री सी बोली घोलूँगी, माँ तेरे कानों में
आँसू ना कभी आने दूँगी, माँ तेरी आँखों में 

नन्हें हाथ बटाऊंगी, माँ तेरे कामों में
मलहम सी लग जाऊँगी, माँ तेरे घावों में

तेरे सुख की ख़ातिर दूँगी, अपना तन-मन वार
माँ! मुझे मत मार, ओ माँ! मुझे मत मार

तेरे आँगन की तुलसी बन, मैं बढ़ती जाऊँगी
पूजा की कलसी का पानी बन, बहती जाऊँगी

तेरे घर आँगन की माँ!, शोभा मैं बढ़ाऊंगी
बेटी, बहन, माँ, पत्नी, हर रिश्ते को निभाऊँगी

रोशन कर दूँगी घर आँगन, बन सूरज की दमकार 
माँ! मुझे मत मार, ओ माँ! मुझे मत मार

तेरे भीतर नन्हीं जान हूँ माँ!
तेरी ममता का सम्मान हूँ माँ!
स्नेह, प्यार और दुलार की
मैं ही तो पहचान हूँ माँ! 

बन जाऊँगी माँ! मैं तेरी, खुशियों का संसार
माँ! मुझे मत मार, ओ माँ! मुझे मत मार

- Monika Jain 'पंछी' 

Friday, April 26, 2013

Healthy Bread Slice Recipe in Hindi


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Ingredients : 20 पीसेज ब्रेड स्लाइस (चारों तरफ से डार्क ब्राउन किनारे निकले हुए ), 1 कटोरी गाढ़ी फैटी हुई मलाई / क्रीम, 1 कटोरी टमाटर ( बारीक़ कटे हुए), 1  कटोरी पनीर ( grated ), नमक ( स्वादानुसार ), काली मिर्च पाउडर, ताज़ा हरा धनिया पत्ती ( बारीक़ कटी हुई )



Method : 
सबसे पहले एक-एक करके सारी स्लाइस की एक तरफ चम्मच की सहायता से मलाई या क्रीम की एक मोटी परत पूरे ऊपरी हिस्से पर अच्छे से फैलाकर एक बड़ी ट्रे या प्लेट में रखते जाइये. याद रखे परत वाली साइड ऊपर की तरफ हो. फिर एक बड़े बर्तन में हलके हाथो से टमाटर के टुकड़े , पनीर , नमक, काली मिर्च मिलाये. फिर दो-दो चम्मच यह मिक्सचर सभी स्लाइस पर रखते जाए और फैलाते जाए. आखिर में हरा धनिया डालकर सजावट कर दे. चाहे तो स्लाइस को दो टुकड़े में काट ले चाहे चार. चाहे तो ऐसे ही पेश करे, चाहे तो ओवन में थोडा सा टोस्ट कर ले या फिर फ्रिज में 1मिनट रखकर पेश करे.

By Monika Goyal

Wednesday, April 24, 2013

Kanya Bhrun Hatya Essay in Hindi


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संसार का हर प्राणी जीना चाहता है और किसी भी प्राणी का जीवन लेने का अधिकार किसी को भी नहीं है. अन्य प्राणियों की तो छोड़ो आज तो बेटियों की जिंदगी कोख में ही छीनी जा रही है. "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता" अर्थात जहाँ नारियों की पूजा की जाती है वहां देवता निवास करते हैं. ऐसा शास्त्रों में लिखा है किन्तु बेटियों की दिनोदिन कम होती संख्या हमारे दौहरे चरित्र को उजागर करती है. 

माँ के गर्भ में पल रही कन्या की जब हत्या की जाती है तब वह बचने के कितने जतन करती होगी यह माँ से बेहतर कोई नहीं जानता. गर्भ में 'माँ मुझे बचा लो ' की चीख कोई खयाली पुलाव नहीं है बल्कि एक दर्दनाक हकीकत है. अमेरिकी पोट्रेट फिल्म एजुकेशन प्रजेंटेशन ' The Silent Scream ' एक ऐसी फिल्म है जिसमे गर्भपात की कहानी को दर्शाया गया है. इसमें दिखाया गया है कि किस तरह गर्भपात के दौरान भ्रूण स्वयं के बचाव का प्रयास करता है. गर्भ में हो रही ये भागदौड़ माँ महसूस भी करती है. अजन्मा बच्चा हमारी तरह ही सामान्य इंसान है. ऐसे मैं भ्रूण की हत्या एक महापाप है. 

वह नन्हा जीव जिसकी हत्या की जा रही है उनमे से कोई कल्पना चावला, कोई पी. टी. उषा, कोई स्वर कोकिला लता मंगेशकर तो कोई मदर टेरेसा भी हो सकती थी. कल्पना चावला जब अन्तरिक्ष में गयी थी तब हर भारतीय को कितना गर्व हुआ था क्योंकि हमारे भारत को समूचे विश्व में एक नयी पहचान मिली थी. सोचो अगर कल्पना चावला के माता पिता ने भी गर्भ में ही उसकी हत्या करवा दी होती तो क्या देश को ये मुकाम हासिल करने को मिलता ? 

जीवन की हर समस्या के लिए देवी की आराधना करने वाला भारतीय समाज कन्या जन्म को अभिशाप मानता है और इस संकीर्ण मानसिकता की उपज हुयी है दहेज़ रुपी दानव से. लेकिन दहेज़ के डर से हत्या जैसा घ्रणित और निकृष्ट कार्य कहाँ तक उचित है ? अगर कुछ उचित है तो वह है दहेज़ रुपी दानव का जड़मूल से खात्मा. एक दानव के डर से दूसरा दानविक कार्य करना एक जघन्य अपराध है और पाशविकता की पराकाष्ठा है. 

हिंसा का यह नया रूप हमारी संस्कृति और हमारे संस्कारों का उपहास है. नारी बिना सृष्टि संभव नहीं है. ऐसे में बढ़ते लिंगानुपात की वजह से वह दिन दूर नहीं जब 100 लड़कों पर एक लड़की होगी और वंश बेल को तरसती आँखे कभी भी तृप्त नहीं हो पायेगी. 

Monika Jain 'पंछी'

Sunday, April 14, 2013

Success Mantra in Hindi


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दुनिया में हर कोई सफल बनना चाहता है पर कुछ लोग ही सफलता के ऊँचे पायदानों पर पहुँच पाते हैं. जबकि कुछ लोगों को लाख चाहने पर भी सफलता नहीं मिलती. सफल व्यक्ति हमसे अलग नहीं होते. बस ज़रूरत है कुछ खास बातों पर अमल करने की फिर सफलता हमसे भी दूर नहीं रह सकती. 

Be Determined : सफलता पाने के लिए दृढ़ संकल्प का होना बहुत आवश्यक है. यह दृढ़ संकल्प ही होता है जिसकी वज़ह से व्यक्ति सफलता के मार्ग में आने वाली हर चुनौती, संकट और विपत्ति का हिम्मत, धैर्य और साहस के साथ सामना कर पाता है. हेलन केलर, पी. टी. उषा, कल्पना चावला, न्यूटन ऐसे कई नाम है हमारे सामने जिन्होंने इतिहास बनाया है क्योंकि वे अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्पित थे. 

Know Yourself : सफलता के लिए ज़रूरी है हम अपनी जमीनी हकीकत पहचाने और अपने शक्ति और सामर्थ्य को भी जाने. सपने अवश्य देखने चाहिए पर जीवन की कठोर सच्चाइयों का ज्ञान भी होना चाहिए. लक्ष्य का निर्धारण हमेशा अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए अन्यथा असफलता का सामना करना पड़ सकता है और इसकी वज़ह से हम निराशा से गिर सकते हैं. इसलिए सफलता के लिए अपनी strengths and weaknesses जानना बहुत ज़रूरी है. 

Be Focused : कई व्यक्ति जीवन भर अपना मार्ग निर्धारित नहीं कर पाते क्योंकि उनका मन संशयग्रस्त रहता है और इधर-उधर दोलायमान रहता है. एक कार्य की ओर अग्रसर होते ही बीच में ही उसे छोड़कर दूसरा कार्य करने लगना जिससे कोई भी कार्य पूरा नहीं हो पाता है. हमें मात्र भावनाओं के भरोसे नहीं रहना चाहिए. क्योंकि अनिर्णय की स्थिति की वज़ह से समय हाथ से निकल जाता है. अतः अपने निर्धारित लक्ष्य पर धयान केन्द्रित कर निर्धारित मार्ग का अनुसरण करना बेहद ज़रूरी है. 

Self Confidence : वह आत्मविश्वास ही है जो हमें कभी भी अपने मार्ग से विचलित नहीं होने देता. जिसने आत्मविश्वास खो दिया उसने सब कुछ खो दिया. अतः अपनी शक्तियों को जान कर उन पर भरोसा करना सफलता के लिए बहुत ज़रूरी है. चाहे हममें कितनी भी प्रतिभा हो पर अगर हार का डर हमेशा सताता रहेगा तो हमारी हार निश्चित है. 

Have Patience : अत्यधिक अधीरता हमें अपने लक्ष्य पर केन्द्रित नहीं रहने देती. मंजिल मिलने में समय लग सकता है. कई बार विफलता का सामना भी करना पड़ सकता है पर हमने धैर्य नहीं रखा तो हमारी अब तक की गयी सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है. नन्ही चींटी ऊंचाई पर चढ़ते समय सेकड़ों बार गिरती है पर अपना लक्ष्य नहीं बदलती और उसे हासिल करके ही दम लेती है. इसलिए धैर्य ओर विश्वास के साथ अपने लक्ष्य पर डंटे रहना बेहद ज़रूरी है. 

इन सबके साथ ही सफलता के लिए धारा के विपरीत जाने का साहस होना भी बेहद ज़रूरी है. इतिहास गवाह है सफलता उन्हीं लोगों को मिली है जिन्होंने अपने रास्ते खुद बनाये है. किसी ने सच ही कहा है : 

इरादे नेक हो तो सपने साकार होते हैं, 
अगर सच्ची लगन हो तो रास्ते आसान होते हैं. 

- Monika Jain 'पंछी'

Friday, April 12, 2013

Poem on Sympathy in Hindi


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नहीं चाहिए तुम्हारी संवेदना 
नहीं चाहिए कोई हमदर्दी 

क्या ले सकता है कोई किसी का दुःख 
और दे सकता है बदले में सुख 
नहीं 
ये महज धोखे का व्यापार है  
झूठ और कोरा भ्रम ही तो प्यार है

जिस रास्ते के अंत में हमेशा एक नया रास्ता हो 
मैं खड़ी हूँ उस रास्ते पर 
क्या चल पाओगे साथ मेरे 
ये जानते हुए कि नहीं पहुंचेंगे हम किसी मंजिल पर

डर गए ना सिर्फ बातों से ही 
और नकार दिया अपने वादों को ही 
इसलिए कहती हूँ रखो अपनी संवेदना 
ये नहीं हर सकती मेरी वेदना

Monika Jain 'पंछी'

Poem on Save Girl Child in Hindi


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माँ! मैं कुछ कहना चाहती हूँ
माँ! मैं भी जीना चाहती हूँ

तेरे आँगन की बगिया में
पायल की छमछम करती माँ!
चाहती मैं भी चलना

तेरी आँखों का तारा बन
चाहती झिलमिल करना
तेरी सखी सहेली बन माँ!
चाहती बाते करना

तेरे आँगन की बन तुलसी
मान तेरे घर का बन माँ!
चाहती मैं भी पढ़ना

हाथ बँटाकर काम में तेरे
चाहती हूँ कम करना
तेरे दिल के प्यार का गागर
चाहती मैं भी भरना

मिश्री से मीठे बोल बोलकर
चाहती मैं हूँ गाना
तेरे प्यार दुलार की छाया
चाहती मैं भी पाना

चहक-चहक कर चिड़ियाँ सी
चाहती मैं हूँ उड़ना
महक-महक कर फूलों सी

Monika Jain 'पंछी' 

Wednesday, April 10, 2013

Romantic Love Poem for Her in Hindi


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हर रोज़ तेरे जाने के बाद, तेरा एहसास समा जाता है 
जैसे रख देता हूँ, गुलाब की सूखी पंखुरियाँ... पूरानी किताबों के संग 
और हर सांस में महसूसता हूँ, उनकी तेज़ होती सुगंध.
हर बार सोने के पहले, कई बार जागता हूँ 
जैसे थप्पी दे जाती है, मेरे सर पे तेरी मखमली हथेलियाँ 
और लोरियाँ सुना, बालों को सहलाती है, शरारती उँगलियाँ.
नींद आते ही जाग जाती है, मेरी सारी सुसुप्त चेतनायें 
जहाँ तुम कर देती हो स्वयं को समर्पित 
उस आनन्द की चाह में, जो प्रेम की पराकाष्ठा है. 
जहाँ मौसम का मिज़ाज बदल जाता है
जैसे सूर्य ने बदल लिया हो गोलार्द्ध. 
भीषण उष्णता पिघला देती है, बरसों से राह तकते ग्लेशियर को 
जो पिघलते हुये, उतर आती है, तीव्रता से दिल की जमीन पर 
और निकल पड़ती है फिर से जागने के लिए, स्वप्नों की दुनिया में 
कि कोई इंतज़ार कर रहा है, इन मीठी दरियाओं का 
जहाँ बैचेन समुंदर आता है और फिर निराश हो लौट जाता है.

Randhir 'Bharat' Chaudhary

Tuesday, April 9, 2013

Dard bhari Kavita in Hindi


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दर्द ने हंस कर कहा मुझसे 
एक दिन तुझे जिंदगी से रूठना होगा 
चाहे कितना भी लड़ ले तू मुझसे 
पर एक दिन तुझे टूटना होगा. 
तेरी कोशिशे बेकार है 
तेरे सपने निराधार है 
मेरी ताकत के आगे 
तेरी जिद लाचार है. 
तू नही सह पायेगी मुझे 
जब मैं हद से गुजर जाऊंगा 
रूह काँप उठेगी तेरी 
जब मैं अपना कहर ढ़ाउंगा.
कोई ना देगा तेरा साथ
तेरे अपने छोड़ देंगे तेरा हाथ
तब तू कैसे सांस ले पायेगी 
कुछ भी कर तेरी आस टूट ही जाएगी. 

Monika Jain 'पंछी' 

Monday, April 8, 2013

Poem on Feelings in Hindi


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रात में एक सच्ची बात बताता हूँ
जो मैंने अभी तक नहीं कही
तुम पूछती हो ना
कि मैं इतने कम समय में 
तुम्हें लेकर इतना स्योर कैसे हूँ ???
हाँ तो बात सिम्पल है
एक अजीब सी खुशी मिलती है
जब तुम्हारा जिक्र आता है
मन मयूर नाच उठता है
जब भी तुम्हें पाने का एहसास हो आता है
और कैसे बताऊँ
कैसे उसे संक्षिप्त करूँ
संक्षिप्त क्या 
किन शब्दों में वर्णित करूँ
उस पल के हालात को
मेरे मिज़ाज़ को
जो भी मैं कहना चाहूँ
बर्बाद करें अल्फाज़ मेरे।

Randhir 'Bharat' Chaudhary


Sunday, April 7, 2013

Dosa Recipe in Hindi


Keywords : Dosa Recipe in Hindi, Plain Dosa of Rice, Urad Dal, Chana Dal, सादा डोसा बनाने की विधि, चावल दाल का डोसा, Indian Recipes

Ingrediants : धुली हुई उड़द की दाल 1 कप, मोटे /टुकड़ा चावल 3 कप, पोहा (चावल वाला) 1 कप, चने की दाल 1/4 कप, हींग पाउडर 1/4 छोटा चम्मच, मेथी दाना 1/2 छोटा चम्मच, नमक 1 छोटा चम्मच 

Method :  ऊपर दी गयी सामग्री (उड़द  दाल, चावल, पोहा, चना दाल) को एक बड़े बर्तन में डालकर अच्छे से धो ले. फिर सारा गन्दा पानी निकाल कर 4-5 गिलास साफ़ पानी में ( हींग पाउडर, नमक, मेथी दाना डालकर ) 4-5 घंटे के लिए भिगोने रख दे. फिर अतिरिक्त पानी एक अलग गिलास में निकाल कर ऊपर दी गयी सामग्री को मिक्सर में अच्छे से महीन पीस ले. ( ध्यान रखिये घोल न ज्यादा पतला हो न गाढ़ा. अगर ज़रुरत महसूस हो तो अलग रखा हुआ पानी आप घोल में डाल सकते है ) फिर इस पीसे हुए घोल को 6-7 घंटे के लिए खमीर उठाने के लिए ढककर रख दे. डोसा बनाते समय तवे को अच्छे से गर्म कर ले. फिर उस पर पानी और तेल की कुछ बूंदे डालते हुए गोल कच्चे प्याज के आधे टुकड़े से तवे को अच्छे से रगड़ ले (इससे तेल तवे के अन्दर तक चला जायेगा और डोसा तवे पर चिपकेगा नहीं ). फिर एक बड़े गहरे चम्मच की मदद से घोल को तवे पर गोलगोल फैलाते जाए और दोनों तरफ से पोनी की मदद से दबा-दबाकर तेल डालते हुए पलटकर सुनहरी करारा डोसा गरमागरम लाल टमाटर/ प्याज की चटनी / धनिया चटनी / नारियल चटनी या फिर सांभर के साथ परोसिये.

By Monica Goyal

Saturday, April 6, 2013

Poem on Love Memories in Hindi


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तुम नयी तो नहीं हो न मेरे लिए 
हमारी पहचान पुरानी है 
कितनी ?
ये याद नहीं 
पर याद है 
तुम्हारी आँखों की वो गहराईयाँ 
जिसने न जाने कितने 
मीठे-मीठे ख़्वाब संजो रखे थे 

मुझे याद है
जब भी नमकीन हो आती थी
तुम्हारी आँखें 
मेरे धडकनों के भूचाल से 
निकल आते थे कई हिमालय 

मुझे याद है
तुम्हारी कूँक  
उन दिनों शक्कर कहाँ यूज करते थे हम

याद है ?
जब भी तुम्हारी साथ बैठ कर 
कॉफ़ी पिता था, तो हर बार 
मिठास ज्यादा होने की शिकायत करता था।

By Randhir 'Bharat' Chaudhary

Essay on Hindi, English and Hinglish Language


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कई बार Facebook पर हिंदी को roman letters में लिखने को लेकर कुछ हिंदी प्रेमियों ने मुझे टोका और सलाह दी कि मैं google transliteration या hindi fonts की help से हिंदी देवनागरी में लिख सकती हूँ . उनके अनुसार हिंदी को रोमन में लिखना या hinglish का उपयोग करना हिंदी का अपमान है. ऐसे सभी हिंदी प्रेमियों की भावनाओं का मैं सम्मान करती हूँ . मुझे खुद भी हिंदी सबसे अच्छी भाषा लगती है. पर जहाँ तक बात google transliteration की है तो वहां भी देवनागरी में लिखने के लिए सबसे पहले आपको रोमन में ही लिखना पड़ेगा. 

भारत में हम सब के जो नाम रखे जाते हैं वे सब ज्यादातर हिंदी भाषा के शब्द ही होते हैं जैसे : आकाश, रवि, अरविन्द, कुशल, आरती आदि. पर ऐसी कई जगह हैं जहाँ पर हमें अपने नाम को रोमन में लिखना पड़ता है : Aakash, Ravi, Aarti, Kaishav etc. जो हिंदी प्रेमी हिंदी को रोमन में लिखना गलत मानते है वे खुद भी अपने नाम रोमन में लिखते हैं और नाम ही क्या कई शब्द कई जगह हमें रोमन में लिखने पड़ते हैं . रही बात hinglish के उपयोग की तो इसके लिए नयी पीढ़ी को जिम्मेदार मानना बिलकुल गलत है. गलती उन लोगों की है जिन्होंने आज़ादी के समय अंग्रेजों को तो भारत से बाहर निकाल दिया पर अंग्रेजी को नहीं निकाल पाए. 

सामान्य बोलचाल की तो छोड़िये हमारे देश की पूरी शासन व्यवस्था, संविधान, न्यायपालिका सब कुछ hinglish या english भाषा के साथ ही चलायी जा रही है. Higher Education पूरी तरह english based है. ऐसे मैं रोमन और देवनागरी के उपयोग जैसी छोटी छोटी बातों को महत्त्व देना कहाँ तक उचित है ? English अब भारत में इस कदर रच बस गयी हैं कि उसे बाहर निकलना अब संभव नहीं है और Globalization के इस दौर में ऐसा करना उचित भी नहीं. अगर कुछ जरुरी है तो वह है हिंदी के अस्तित्व की रक्षा करना लेकिन हिंदी के कई ऐसे शब्द है जिन्हें आज की पीढ़ी नहीं समझती. शुद्ध हिंदी भाषा में ज्यादातर लोग रूचि नहीं लेते. क्योंकि वह समझने और बोलने में कठिन होती है. ऐसे मैं शुद्ध हिंदी भाषा के प्रयोग पर जोर दिया जायेगा तो उसके सकारात्मक परिणाम नहीं मिलने वाले हैं. Hinglish देश की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है ऐसे में अपने विचारों को लोगों तक पहुँचाने का यहीं सबसे आसान जरियां है. 

वैसे भी भाषा तो विचारों के आदान प्रदान का साधन मात्र है. इसलिए बोलने और लिखने में किस भाषा का उपयोग किया जा रहा है इससे ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि क्या बोला और क्या लिखा जा रहा है. विचार भाषा से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं . आपने शुद्ध हिंदी भाषा और बड़े भारी-भारी शब्दों का उपयोग करके एक बहुत अच्छा लेख लिख तो दिया पर अगर 20 से ज्यादा लोग उसे समझ न पाए तो आपके लिखने का क्या फायदा? 

समय के साथ बदलाव जरुरी है. वैसे भी हिंदी ने हर भाषा से शब्द लिए है और हिंदी राष्ट्र भाषा बनने के योग्य इसलिए भी मानी जाती है क्योंकि सभी भाषाओँ के शब्दों को इसमें आसानी से समाहित किया जा सकता है और इसी वजह से ये सभी की पसंद बन सकती है. Facebook पर रोमन में हिंदी लिखना कई लोगों की मजबूरी भी है क्योंकि technical knowledge सभी को नहीं होता और न ही सभी के पास साधन होते हैं. समय बचाने के लिए भी ऐसा करना जरुरी है और सबसे बड़ी बात भाषा को लिखने के तरीके से ज्यादा महत्वपूर्ण है अच्छे और उपयोगी विचारों का प्रसार. साधन को साध्य से ज्यादा महत्त्व देना उचित नहीं है. 



- Monika Jain 'पंछी'


Friday, April 5, 2013

Gulab Jamun Recipe in Hindi


Keywords : Gulab Jamun Recipe in Hindi, How to Make Gulaab Jamun, Indian Sweets, गुलाब जामुन बनाने की विधि, Dessert 

No of Pieces : 10, Preparation Time : 20 Minutes 

Ingredients : 3/4 कप खोया, पनीर 1/4 कप, मैदा 1 बड़ा चम्मच, मीठा सोडा 1 चुटकी, पानी 1 गिलास, चीनी 1 गिलास, इलायची पाउडर 1 चुटकी, केसर 5-6 टुकड़े, गहरा तलने के लिए घी या तेल (रिफाइंड)

Method : एक बड़े से कटोरे में खोया और पनीर को हलके हाथों से रगड़कर अच्छे से मिलाये। ध्यान रखिये कोई भी छोटी से छोटी गाँठ नहीं रहे। फिर धीरे-धीरे इस मिश्रण में मैदा और मीठा सोडा मिलाये। एक बार फिर से चारों सामग्री को एकसार करके हलके हाथ से मसलते हुए मिलाये और आटे की तरह गूँद ले। फिर इसकी छोटी-छोटी लोईया तोड़ते हुए हथेली के बीच दबाते हुए छोटे-छोटे गोले बना ले। याद रखिये कि गोले बनाते समय गोलों की ऊपरी परत पर कोई फटी हुई दरार नहीं दिखाई दे और ऊपरी परत बिलकुल एकसार चिकनी हो। सारे गोले बनाकर प्लेट में रखते जाईये। एक बड़ी सी फैली हुई कड़ाई में घी या रिफाइंड तेल गरम करिए याद रखिये की यह बहुत गरम नहीं हो। गैस की आंच मंदी करते हुए सारे गोले तल ले और जितना हो सके तलते हुए गोलों पर कलछी कम से कम छूए। हो सके तो दोनों तरफ से कपड़े से पकड़कर कड़ाई के तेल को हिलाए। सारे गोले गहरे सुनहरे तलकर प्लेट में टिश्यू पेपर पर रखते जाए इससे अतिरिक्त तेल निकल जायेगा। गैस पर एक भगोनी रखे उसमे पानी, चीनी, इलाइची, केसर सब डालकर उबाला देकर एक तार की चाशनी बना ले। गैस बंद कर दे। चाशनी को थोड़ा ठंडा होने दे। फिर इसमें पेपर पर रखे हुए सारे गोले एक-एक करके धीरे-धीरे डाल दे। लगभग एक घंटे के लिए चाशनी में डूबे रहने दे। इससे अन्दर तक मिठास चली जाएगी। खाते समय गरम करके परोसे।

By Monica Goyal 

Wednesday, April 3, 2013

Poem on Nature in Hindi


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खयालों के समंदर में खोयी सोचती हूँ कभी-कभी 
क्यों रौशनी हर रात अंधेरे में समा जाती है ?
क्यों ओस की बूंदे भाप बनकर उड़ जाती है ?
जब लौटना ही है किनारों पे आकर
तो क्यों लहरे बार-बार थपेड़े खाती है?

सवालों के ज़वाब कुछ यूं भी मिलते हैं कभी-कभी

जो न होता अँधेरा तो रौशनी को कौन सराहता ?
जो न उड़ती ओस तो उसकी सुन्दरता कौन निहारता ?
जो न लौट कर आती लहरे किनारों पे फिर से
तो तूफानों में फँसा नाविक हौंसला कहाँ से पाता ?

Monika Jain 'पंछी'

Love Proposal Poem in Hindi


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By Randhir 'Bharat' Chaudhary

हाँ कल्पित है, मेरी प्रेम कहानियाँ 
हाँ ठीक मेरी नाम की तरह, ‘भारत’
पर तुम्हें ऐतराज क्यों हैं ?
क्यों नहीं स्वीकार पाते तुम... सत्य 
हमारी मुस्कुराहटों का 
पंछियों के करलव करते स्वरों का 
नदी-झरनों की करकल पदचाप का 
पहाड़ों की वादियों में गूँजते अनुनाद का 
कैसे नकार सकते हो तुम कोशिशों को 
मीठे दरियाओं का, जो उड़ेल रही है 
अपना बूंद-बूंद, करवाहट लिए विशाल सागर में 
परवानो की आहुति, नहीं देखते तुम 
जो शमा की चाहत में, झुलसा लेता है अपना जिस्म 
क्यों नहीं भाते तुम्हें, हिमालय के तेजोमय शिखर 
लहलहाते गेहूँ के साथ, सरसों के फूलों से आच्छादित 
धरती की मादकता, आकर्षित नहीं करती तुम्हें 
ऊँघते-अलसाए जंगल… क्या बाध्य नहीं करती तुम्हें 
कुछ देर ठहर कर, झांक सको अपने अंदर 
उलझनों से परे एक ऐसे संसार की रचना में 
जहां सिर्फ हमतुम हैं, और प्रेम है...

Monday, April 1, 2013

Poem on Farewell in Hindi


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तुम्हें याद है वो दिन 
जब हम आखिरी बार मिले थे 
फिर कभी ना मिलने के लिए 
तुम्हें क्या महसूस हुआ 
ये तो नहीं जानती 
पर जुदाई के आखिरी पलों में 
मैं बिल्कुल हैरान थी.

कुछ ऐसा लग रहा था जैसे 
अलग कर दिया है मेरी रूह को 
मेरे ही जिस्म से 
दिल काँप रहा था मेरा 
इस अनचाही विदाई की रस्म से.

एक अनजाने से खौफ ने 
जकड़ लिया था मुझे 
और तेरे आँखों से ओझल होने के बाद भी 
अपलक देखती रही मैं बस तुझे.

Monika Jain 'पंछी'

Poetry on Trees in Hindi



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वृक्ष धरा के भूषण हैं
करते दूर प्रदूषण हैं
हम सबको भाते हैं वृक्ष
हरियाली लाते हैं वृक्ष.
पत्थर खाकर भी फल देते
हवा के विष को ये हर लेते
प्राणवायु हर पल ये देते
फिर भी हमसे कुछ ना लेते.
क्या दुनिया में कोई भी
पेड़ों सा हितकारी है ?
बिना स्वार्थ के सब कुछ देते
पेड़ बड़े उपकारी हैं.
उपकार मानना दूर ये मानव,
कितना अत्याचारी है
खुद पाँव कुल्हाड़ी मारी है.

- Monika Jain 'पंछी'