Friday, September 20, 2013

Thoughts of the Day in Hindi


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  • मैं तुझसे आकाश, प्रकाश, मन, प्राण किसी की भिक्षा नहीं मांगता. केवल यही चाहता हूँ कि मुझे प्रतिदिन लालसाओं से बचने योग्य बना दे, यही मेरे लिए तेरा महादान होगा ~ रवीन्द्र नाथ टैगोर 
  • सुख देने वाली चीजे पहले भी थी और अब भी हैं. फर्क यह है कि जो व्यक्ति सुखों का मूल्य पहले चुकाते हैं और उनके मजे बाद में लेते हैं, उन्हें स्वाद अधिक मिलता है. जिन्हें आराम आसानी से मिल जाता है, उनके लिए आराम ही मौत है ~ रामधारी सिंह 'दिनकर' 
  • शिक्षा का मूल उद्देश्य मस्तिष्क को ज्ञान से भरना नहीं, अपितु जन्मजात सुप्त दैवीय शक्ति को विकसित करके छात्र को आध्यात्मिक पूर्णता की ओर अग्रसर कराना है तथा छात्र को संकीर्ण सीमा से निकालकर उसे मानवतावादी बनाना है ~ योगीराज अरविन्द 
  • यदि हम चाहते हैं कि हमें कोई चस्का लगे, जो प्रत्येक दशा में हमारा सहारा हो और जो जीवन में हमें आनंद और प्रसन्नता प्रदान करें, उसकी बुराइयों से हमें बचाएं, हमें चाहिए कि हम पढ़ने का चस्का लगायें ~ आचार्य रामचंद्र शुक्ल 
  • मनुष्य की जिस प्रकार की भावना होती है या जिस तरह के कार्य वह करता है, उसी प्रकार की सिद्धि उसे प्राप्त होती है ~ सुभाष चन्द्र बोस 
  • हरेक अपनी व्यक्तिगत इकाई को सत्य सिद्ध करने का भ्रमपूर्ण प्रयास करता है. उसे इस भ्रम का ज्ञान अवश्य रहता है, क्योंकि हिंसा की भावना उत्पन्न होने से मनुष्य को कभी आनंद प्राप्त नहीं होता ~ अमृत लाल नागर 
  • निस्संदेह, यह आवश्यक है कि पहले अध्यापक स्वयं समझना आरम्भ करे. उसे निरंतर चौकन्ना रहना चाहिए तथा स्वयं अपने विचारों और भावनाओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए. जागरूकता से प्रज्ञा आती है ~ जे. कृष्णमूर्ति 
  • किसी अन्यायपूर्ण पद्दति को चुपचाप सहन करने का अर्थ होता है, उस पद्दति के साथ सहयोग करना. इस तरह दमित व्यक्ति भी उतना ही बुरा बन जाता है जितना कि दमन करने वाला. बुराई के साथ सहयोग करने की हमारी उतनी ही जिम्मेदारी है, जितनी अच्छाई के साथ सहयोग करने की ~ मार्टिन लूथर किंग 

Wednesday, September 18, 2013

Hasya Kavita in Hindi


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दोस्तों ने कहा 
ट्राइ करो कभी हास्य व्यंग्य
हमने कहा इसमें है 
हमारा हाथ तंग. 

अरे! एक कोशिश तो 
करके देखो 
थोड़े हंसी के फव्वारे भी कभी 
अपनी वाल पे फेंको.

हमनें कहा 
पढ़कर हमारी हास्य कविता 
गर किसी को हंसी ना आई 
तो बैठे बिठाये हो जाएगी 
हमारी जग हंसाई. 

अब वाल पर हम 
बैकग्राउंड हंसी तो चला नहीं सकते 
हँसना मना है कहकर 
लोगों को जबरन हंसा तो नहीं सकते. 

यहाँ लाफ्टर शोज के जजेज
नहीं बैठे हैं 
बिन बात के हा-हा-हा करने के 
किसी ने पैसे नहीं ऐंठे है. 

गर एक को भी हंसी ना आई 
तो हमारी आँखें भर आएगी 
झाँसी की रानी बनकर 
पायी है हमने जो इज्जत 
तुम्हारे इस हास्य व्यंग के 
आईडिया से 
मिट्टी में मिल जाएगी.

तम्हारा आईडिया मुझे 
लग रहा फ्लॉप है 
सड़े अंडे और टमाटर खाने का 
हमें नहीं शौक है. 

दोस्त ने कहा तो चलो 
हम एक काम करते हैं 
तुम्हारी पहली कविता का टाइटल 
हँसना जरुरी है रखते हैं. 

कोई तो तुम पर 
तरस खा ही लेगा 
दांत दिखाए ना दिखाए 
पर जरा सा मुस्कुरा ही लेगा 

नहीं तो 
हम एक जकास काम करेंगे 
फर्जी आई डी से कमेंट बॉक्स को 
हा हा हा हा हा से भर देंगे. 

ना तुम्हारी कमाई 
इज्जत कहीं जाएगी 
हंसी ना आई किसी को तो भी 
तुम्हारी कविता 
हास्य कविता कहलाएगी. 

Monika Jain 'पंछी'

Essay on Humanity in Hindi


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आज हमारे मानव समाज में जो भी धर्म प्रचलित हैं वें अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा नहीं कर रहे हैं. किसी भी धर्म का उद्देश्य होता है मानव को मानव और ईश्वर के निकट लाना और शांति स्थापित करना पर आज धर्म हमें एक करने की बजाय हमें बाँट रहे हैं. एक धर्म ही कई हिस्सों में बंटा हुआ है. जब धर्म खुद ही इतने हिस्सों में बंटे हुए हैं तो वह हमें एकता और शांति का पाठ कैसे पढ़ायेंगे. कई लोगों के लिए तो धर्म मात्र एक व्यवसाय बन गया है. धर्म विशेष के प्रति कट्टरता व्यक्ति को संकीर्ण विचारों वाला बना देती है और वह सत्य को स्वीकार नहीं कर पाता. धार्मिक कट्टरपंथियों ने तो हिंसा को ही धर्म का हिस्सा बना दिया है और धर्म के नाम पर अशांति फैला रहे हैं और हमारी स्वतंत्रता और खुशियों को तबाह कर रहे हैं. 

ऐसे समय में यह बहुत जरुरी है कि हम एक ऐसे धर्म को अंगीकार करे जो सभी धर्मों का सार हो और हम सभी को एकता के सूत्र में बाँध सके. मानवता ही एक मात्र ऐसा धर्म है जो इस संसार को रहने योग्य और शांतिपूर्ण बना सकता है और धर्म के वास्तविक उद्देश्य को पूरा भी कर सकता है. 

धर्म ने मानव को नहीं बनाया बल्कि मानव ने धर्म को बनाया हैं और सत्य तो यहीं है कि संसार के सभी प्राणी पञ्च तत्वों से मिलकर बने हैं. हमारी मंजिल भी एक ही है तो फिर इतनी अलग अलग धारणाएं अपनाने का क्या औचित्य है ?

एक नवजात शिशु सिर्फ प्यार की भाषा जानता है. जन्म के साथ वह किसी भी जाति, धर्म या सम्प्रदाय का हिस्सा नहीं होता बल्कि जिस घर में और जिन लोगों के बीच उसका लालन पालन होता है उन्हीं के धर्म, परम्पराओं आदि को स्वीकार करने को वो बाध्य होता है. अगर उसी बच्चे का पालन-पोषण किसी और घर में होता तो वह उस घर के धर्म और जाति को अपनाता. इससे यह सिद्ध है कि कोई भी मनुष्य किसी धर्म या जाति विशेष के साथ पैदा नहीं होता. 

मानवता धर्म की सबसे अच्छी बात यह है कि यह सभी लोगों को चाहे वे आस्तिक हो या नास्तिक हो को एक कर सकता है. ईश्वर है या नहीं इसकी चिंता करने की बजाय हमें एक अच्छा इंसान बनने की कोशिश करनी चाहिए. अगर हम एक अच्छे इंसान है तो फिर इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम ईश्वर में विश्वास करते हैं या नहीं. अगर हम प्यार शांति और ख़ुशी के बीज बोयेंगे तो बदले में हमें भी ढेर सारा प्यार, ख़ुशी और शांति मिलेगी. 

मैंने कई ऐसे लोगों को देखा है जो अहंकार, ईर्ष्या, क्रोध और निर्दयता से भरे होते है पर फिर भी धार्मिक अनुष्ठानों में निर्लिप्त दिखाई देते हैं. इनमे से कई ऐसे होते हैं जो ईश्वर की भक्ति को सभी बुरे कार्यों को करने का लाइसेंस मानते है. क्या ऐसे लोग सच में धार्मिक है ? कुछ धर्मों में पशुओं की बलि दी जाती है . मुझे आज तक समझ नहीं आया कि किसी की हत्या के द्वारा हम ईश्वर को खुश कैसे कर सकते हैं ? कुछ लोग सामने खड़े कुत्ते या भूखे इंसान को खाना नहीं देंगे और गाय का इंतज़ार करेंगे. ये कैसा धर्म है जो हमें बस भेदभाव और पक्षपात पूर्ण रवैया सिखाता है. 

अगर आप मानवता का अनुसरण करेंगे तो सभी भेदभावों से परे और खुले विचारों वाले बनेंगे. सभी प्राणी आपके लिए सामान होंगे और जरुरत मंद की सहायता ही आपका धर्म होगा. इससे आप खुद को ईश्वर के ज्यादा निकट पाएंगे और सच्चे अर्थों में ख़ुशी और शांति पा सकेंगे. 

Monika Jain 'पंछी' 

Monday, September 16, 2013

Poem on Positive Attitude in Hindi


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सुनो दर्द !
तुम चाहे हद से गुजर जाओ 
चाहे कितना भी कहर बरसाओं 
जुल्म करो ढेरो मुझ पर 
चाहे कितना भी सितम ढाओं.

पर लडूंगी मैं तुमसे 
जब तक चल रही मेरी साँस है 
किसी को हो ना हो 
पर मुझे खुद पर पूरा विश्वास है. 

मेरी कमजोरियों को 
अपनी ताकत ना समझना 
मेरी मजबूरियों को 
अपनी हिमाकत ना समझना.

क्योंकि मेरी हिम्मत ही मेरी 
सबसे बड़ी आस है  
किसी को हो ना हो 
पर मुझे खुद पर पूरा विश्वास है. 

हार मान लेना 
ये मुझसे हो ना पायेगा 
लडती रहूंगी मैं हर पल 
चाहे तू  कितना भी मुझे सताएगा. 

क्योंकि मनोबल के सिवा 
कुछ भी नहीं मेरे पास है 
किसी को हो ना हो 
पर मुझे खुद पर पूरा विश्वास है. 

हाँ, जीतना मेरा कोई 
ख़्वाब नहीं है 
पर रुक कर बैठ जाना 
ये भी तो कोई बात नहीं है. 

चलती रहूंगी निरंतर 
क्योंकि चलना ही मेरे लिए खास है 
किसी को हो ना हो 
पर मुझे खुद पर पूरा विश्वास है. 

Monika Jain 'पंछी'

Friday, September 13, 2013

Poem on Crime in Hindi


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चलो हो गयी फांसी की सजा 
खुश हूँ कि इस धरती से 
चार दरिंदों का बोझ 
कम हो जायेगा.
पर कुकुरमुत्तो की तरह 
उग आये बलात्कारियों 
के मन में ये फैसला 
क्या कोई खौफ जगा पायेगा?

ना जाने कितने बलात्कार है ऐसे 
जिनकी चीखे बंद दीवारों में 
कैद होकर रह जाती है 
और ना जाने कितने मासूम हैं ऐसे 
जिनकी रूह को 
हर रोज सजाये मौत दी जाती है. 

सिर्फ एक फैसलें में सजाये मौत 
ऊँट के मुंह में जीरे सी अटक रही है 
ना जाने कितने दरिन्दे 
घूम रहें हैं खुलेआम 
बस यहीं बात मुझे 
दिन-रात खटक रही है. 

सिर्फ फांसी समस्या का 
पूर्ण समाधान नहीं है 
जब तक ना बदलेगी मानसिकता 
तब तक अपराधों पर 
कोई लगाम नहीं है. 

सबसे पहले बदल डालो
ये महज़ डीग्रीयां देने वाली पढ़ाई
जिसने साक्षर कर दिया सबको 
पर इंसान को इंसान तक ना बना पाई.

मेरे देश के पिता और माताओं 
तुम भी कुछ अपनी भूमिका निभाओं 
भेद ना करो अपने बच्चों में 
और बचपन से ही 
संस्कारों की पौध उगाओं. 

नेता, पुलिस और 
कानून के ठेकेदारों 
जरा तुम भी लाज खाओं 
अपने पेशे और पद को 
अब इतना भी ना लजाओं.
इन्साफ करों अपने पद 
और कुर्सी के साथ 
मरने से पहले थोड़ा पून्य
तुम भी कमा कर जाओ. 

Monika Jain 'पंछी'

Poem on Hidden Feelings in Hindi, Expression


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आज लिखना चाहती हूँ मैं वह सब 
जो बहुत कुछ लिखते हुए भी 
अनलिखा रह जाता है.

लिखना चाहती हूँ वह दर्द 
जो अक्सर मुस्कुराते होठों में 
छिपा रह जाता है.

लिखना चाहती हूँ वह प्यार 
जो इजहार-ए-मोहब्बत में भी 
बयां नहीं हो पाता है.

हाँ लिखना चाहती हूँ वह द्वेष 
जो दिलों में पाता है पनाह 
पर नज़र नहीं आता है. 

हाँ हाँ लिखना है मुझे वह आक्रोश 
जो बेरहम मजबूरियों के तले
दबा रह जाता है. 

क्यूँ ना लिखूं मैं वह जहर 
जो बड़ी ख़ामोशी से 
अपना असर दिखाता है. 

लिखूंगी मैं वह ममता 
जिसे एक अहसान फरामोश
नहीं समझ पाता है.

लिखना ही होगा वह स्वार्थ 
 जो बड़ी आसानी से 
स्थानांतरित हो जाता है. 

लिखनी है वह मासूमियत 
जिसे एक धूर्त बड़ी चालाकी से 
निगल जाता है. 

उफ्फ! कब से लिख रही हूँ 
पर जो कहना है मुझे 
वह सदा अनकहा ही रह जाता है. 

Monika Jain 'पंछी'

Tuesday, September 10, 2013

Poem on Hate in Hindi


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नफ़रत की आग दिलों में जल रही है 
ईर्ष्या, द्वेष और घृणा हृदयों में पल रही है 
प्यार के लिए छोटी है जिंदगी 
और नफ़रत की राह मनुजता चल रही है.

जाति, धर्म के झंझावातों में उलझ 
खो रहे हैं हम अपनी पहचान 
ना हिन्दू, ना मुस्लिम, ना ही ईसाई
सबसे पहले हैं हम एक से इंसान.

धर्म की दूकान सब को छल रही है 
अपराधियों की राजनीति इसमें फल रही है 
प्यार के लिए छोटी है जिंदगी 
और नफ़रत की राह मनुजता चल रही है.

तुम बनते हो साधन उनका 
पैसा, सत्ता सपना जिनका 
झोंक तुम्हे हिंसा की आग 
चमक रहा है सिक्का उनका.

ऐसे ही अवसरवादियों की दाल गल रही है 
निर्दोष जनता बस अपने हाथ मल रही है 
प्यार के लिए छोटी है जिंदगी 
और नफ़रत की राह मनुजता चल रही है.

निर्दोषों का खून बहा 
राजनीति की रोटियां सेकी जाती है 
वोट बैंक के खातिर ही 
भूखी जनता को बोटियाँ फैंकी जाती है. 

इंसानियत की उम्र अब ढल रही है  
हैवानीयत इसे निगल रही है 
प्यार के लिए छोटी है जिंदगी 
और नफ़रत की राह मनुजता चल रही है.

Monika Jain 'पंछी'

Sunday, September 8, 2013

Mother Quotes in Hindi


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  • Becoming a Mother is not necessary for the realization of Motherhood. 
  • मातृत्व के अहसास के लिए माँ बनना जरुरी नहीं. 
  • Mother is the first teacher of her baby. Now its in her hand, she want to be the mother of humanity or the mother of her baby only. 
  • माँपने बच्चे की पहली गुरु होती है. अब यह उसके हाथ में है कि वह मानवता की जननी बनना चाहती है या सिर्फ अपने बच्चे की. 
  • The word 'Mother' is undefined. 
  • 'माँ' शब्द को परिभाषित नहीं किया जा सकता. 
  • Nowhere we can have a sleep as sound / deep as in mother's lap. 
  • माँ की गोद में जितनी गहरी नींद आती है और कहीं भी नहीं. 
  • We don't need to be deserved to get mother's love. 
  • माँ का प्यार पाने के लिए किसी योग्यता की जरुरत नहीं होती. 
  • संस्कारी माता ही संस्कारी बच्चों का निर्माण कर सकती है. 

Saturday, September 7, 2013

Poem on Chandra Shekhar Azad in Hindi


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गुलाम देश में भी जीता था 
जो बन आज़ादी का परवाज़ 
नहीं हुआ है, कभी ना होगा 
कोई चंद्रशेखर सा आज़ाद।

सहनशीलता की पहचान 
साहस का था दूजा नाम 
माँ की आज़ादी के खातिर 
सर्वस्व किया जिसने बलिदान।

जिसकी रग-रग में आज़ादी 
बनकर खून बहा करती थी 
जिसके ज़ज्बे और हिम्मत की 
चर्चा चहूँओर हुआ करती थी।

गौरों को भी डर लगता था 
जिसके क्रांति अभियान से 
जन-जन में अलख जगाई जिसने 
 निज प्राणों के बलिदान से।

आज़ादी जिसको अपने 
प्राणों से ज्यादा प्यारी थी 
जिसने अपनी सारी खुशियाँ 
माँ धरती पर वारी थी।

उस भारत माँ के वीर सपूत को 
मेरा शत-शत अभिनन्दन 
देश की माटी जिसके मस्तक 
पर सजती थी बन चन्दन। 

Monika Jain 'पंछी'

Friday, September 6, 2013

Essay on Independence Day in Hindi


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मुझे याद है बचपन में जब भी 15 अगस्त आने वाला होता था तो मैं खासा उत्साहित रहती थी। तब तो बस एक दम साफ़ सुथरी चमकती हुई यूनिफार्म पहनकर, रिबिन लटकाकर, पीटी, परेड में हिस्सा लेना या पारंपरिक वेशभूषा पहन कर किसी सांस्कृतिक प्रोग्राम में प्रस्तुति देना, पढ़ाई और भारी बस्ते से मिलने वाली छुट्टी, ग्राउंड में घूम-घूम कर अमरूद और चाट-पकोड़ी खाना यही बस मेरे लिए स्वतंत्रता दिवस के मायने थे। विविध प्रतियोगिताओं और पढ़ाई में अव्वल आने के लिए हर साल मिलने वाले ईनामों की वजह से यह दिन मेरे लिए बड़ा रोमांचकारी होता था और मुझे इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता था।  तब आज़ादी के सही मायने कहाँ पता थे ? 

जैसे-जैसे बड़ी हुई आज़ादी के इस उत्सव के प्रति रोमांच और उत्साह धीरे-धीरे जाता रहा। हाँ बस सुबह से ही सुनाई देने वाले देशभक्ति गीतों की स्वरलहरियों की वजह से मन देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत जरुर हो जाता है। पर देश के ताजा हालातों के बारे में सोचकर कई सवाल खड़े हो जाते हैं इस तथाकथित आज़ादी को लेकर। 

देश में हो रहे नित नए कांडों के  बारे में पढ़ती हूँ, सुनती हूँ तो सोचती हूँ जिन देशभक्तों ने हमें आज़ादी दिलाने के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं की, ना जाने कितनी यातनाएं सही उनके बलिदानों का क्या खूब मखौल उड़ाया है हमने। आज़ादी है लेकिन बलात्कारियों को बलात्कार करने की, आज़ादी है भ्रष्टाचारियों को गरीब के पेट पर लात मार अपनी जेबें भरने की, आज़ादी है पाखंडियों को धर्म की ए बी सी डी ही बदल देने की, आज़ादी है आतंकवादियों को लाखों निर्दोषों की जान लेने के बाद भी खुले आम घुमने की, आज़ादी है अपराधियों को सत्ता में रहकर हम पर शासन करने की.. अगर आज़ादी नहीं है तो बस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की और ईमानदार बनकर सुख-चैन से जीवन जीने की। 

जो चीज़े बिना किसी यत्न के आसानी से मिल जाती है उनकी क़द्र नहीं होती शायद यही वजह है कि स्वतंत्रता सेनानियों के रक्त से रंजित इस स्वतंत्रता को हम सही मायनों में संभाल नहीं पाए। और यह आज़ादी बनाम स्वछंदता बस राजनीति, धर्म, अपराधियों, पैसे, पद और कानून के ठेकेदारों की दासी बनकर रह गयी है। 


Monika Jain 'पंछी'

Thursday, September 5, 2013

Poem on Freedom in Hindi


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हाँ! ये है मेरा आज़ाद भारत 
और मैं हूँ इसकी आज़ाद नागरिक।

जहाँ दिन के उजाले में भी औरत को 
अकेले घर से निकलने से पहले 
दस दफ़ा सोचना पड़ता है
हो ना जाए किसी की दरिंदगी का शिकार 
इसलिए अपनी कई इच्छाओं का 
गला घोंटना पड़ता है।

जहाँ राजनीति अपराधियों का चहरा है 
 धर्म पर ढोंगियों का पहरा है 
अँधा कानून और बिकाऊ मीडिया 
खून से सना जहाँ का हर सवेरा है।

आम आदमी जहाँ महंगाई का शिकार है 
शिक्षा पाकर भी देश का युवा बेरोजगार है 
करोड़ों के  घोटालेबाज चैन से जी रहे 
और ईमानदार हर तरह से लाचार है। 

जहाँ आज़ादी पर पैसे वालों की लगाम है 
हैरान परेशां जनता-ए-आम है 
प्रजातंत्र का लेबल बस दिखाने के लिए 
गोरों की जगह कालों के अब हम गुलाम है।

हाँ ये है मेरा आज़ाद भारत 
और मैं हूँ इसकी आज़ाद नागरिक।

Monika Jain 'पंछी'

Poem on Teacher in Hindi


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ताउम्र मुझे तलाश रही 
एक सच्चे शिक्षक की 
और ना मिलने पर
 मैंने बना ली थी एक धारणा 
कि आसान नहीं है इस युग में 
एक अच्छा गुरु मिल पाना.

पर मैं अबोध ये कहाँ जानती थी 
कि हर रोज मैं मिल रही हूँ 
कई गुरुओं से 
जो रूबरू करवा रहें हैं मुझे 
जीवन के अनभिज्ञ पहलुओं से.

मेरी असफलताएं
क्या नहीं हैं मेरी शिक्षक 
उन्होंने ही तो मुझे दिखाई है 
मेरी वो कमियां 
जहाँ सुधार कर चढ़नी है 
मुझे सफलता की सीढियां.

ये प्रकृति 
ये तो सबसे बड़ी गुरु है 
जिसके हर कण-कण में बिखरी है 
ज्ञान की कड़ियाँ 
जिन्हें जोड़कर बनती है 
रोशनी की एक नयी दुनिया.

हमारे जीवन से जुडा हर व्यक्ति 
हमारा शिक्षक ही तो है 
क्योंकि हर कोई हमें कुछ नया 
सिखा जाता है 
एक दगाबाज भी हमें सच्चाई 
दिखा जाता है.

आज मेरी तलाश खत्म हो गयी है 
किसी एक गुरु की मुझे जरुरत नही है 
मुझे सीखना है जीवन के हर क्षण से 
मुझे पाना है ज्ञान प्रकृति के कण कण से.

Monika Jain 'पंछी' 

Monday, September 2, 2013

Dalai Lama Quotes in Hindi



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  • अपनी क्षमता को पहचानकर और उस पर विश्वास कर के कोई एक बेहतर दुनिया बना सकता है। 
  • जब आप कुछ गँवा बैठते हैं तो उससे प्राप्त शिक्षा को ना गंवाएं। 
  • जरुरी है कि हम अपना दृष्टिकोण और ह्रदय जितना संभव हो अच्छा करें। इसी से हमारे जीवन में, अल्पकाल और दीर्घकाल दोनों में खुशियाँ आएँगी। 
  • आप दूसरों की मदद नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें नुकसान तो मत पहुंचाइए। 
  • प्रसन्न रहना ही हमारे जीवन का उद्देश्य है।
  • अगर आप सोचते हैं कि आप बहुत छोटे हैं तो एक मच्छर के साथ सोकर देखिये।

Sunday, September 1, 2013

Poem on Love in Hindi


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कल-कल करती पानी की धारा जो तुझे छू जाएगी 
बन आँसू तेरी आँखों का मैं धीमे से बह जाऊँगी.

कूँ-कूँ करती कोयल जब तेरे द्वारे गाएगी 
मिश्री की डली मेरी बोली तेरे कानों में घुल जाएगी.

फूलों की कोई क्यारीं जब तेरे आँगन खिल आएगी 
बन खुशबूँ तेरी साँसों को मैं महकाती जाऊँगी.

अनजानी सूनी राहों पे जब हवा तुझे छू जाएगी 
मेरी यादें तेरा हथ थामें दूर तलक तक जाएगी.

रिमझिम बारिश की बूँदें जब तेरा तन भिगाएगी 
बन सिहरन तेरे तन-मन में मैं अहसास जगाऊँगी.

साँझ के ढलते सूरज पर जब तेरी नज़रे जायेगी 
मेरे चहरे की धुँधली सी एक छवि नज़र तुझे आएगी.

भीड़ में भी जब तनहाई रह रह कर तुझे सताएगी 
मेरी ख़ामोशी तेरी ख़ामोशी से घंटों बतियाएगी.

इन्द्रधनुषी रंगों को जब तेरी पलकें निहारेगी 
बन गुलाल तेरी यादों को उन रंगों से रंग जाऊँगी.

हर पल तेरी यादों को हर लम्हा तेरी बातों को 
मैं याद आऊँगी, तुझे मैं याद आऊँगी.

Monika Jain 'पंछी'