Wednesday, October 30, 2013

Lal Bahadur Shastri Stories in Hindi


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Lal Bahadur Shastri : Life Incidents and Stories / Prerak Prasang

(1) सस्ती साड़ियाँ 

एक बार लाल बहादुर शास्त्री जी एक कपड़े की दूकान पर साड़ियाँ खरीदने गए. शास्त्री जी को देखकर दुकानदार बहुत खुश हुआ. उसने शास्त्री जी का बहुत आदर सत्कार किया. शास्त्री जी ने दूकान के मालिक से कहा, ‘ मैं जल्दी में हूँ. मुझे चार-पांच साड़ियाँ चाहिए.’ 

दूकान का मालिक शास्त्री जी को महंगे-महंगे दामों की एक से बढ़कर एक साड़ियाँ दिखाने लगा. शास्त्री जी ने कहा, ‘ भाई, मुझे इतनी कीमती साड़ियाँ नहीं चाहिए. कम दाम वाली साड़ियाँ दिखाओं.’ 

इस पर मालिक बोला, ‘ हमारा तो सौभाग्य है कि आप हमारी दूकान पर पधारे. आप सब कुछ अपना ही समझिये. दाम की तो कोई बात है ही नहीं. ‘ शास्त्री जी उनका आशय समझ गए. 

शास्त्री जी ने कहा, ‘ मैं तो कीमत देकर ही कुछ भी खरीदूंगा. तुम मेरी बात पर ध्यान दो और मुझे कम दाम वाली साड़ियाँ ही दिखाओ और सबके दाम भी बताते जाओ.’ 

तब मैनेजर ने थोड़ी सस्ती साड़ियाँ दिखाना शुरू किया. पर शास्त्री जी बोले, ‘ ये साड़ियाँ भी मेरे लिए महँगी है. इससे भी कम कीमत की साड़ियाँ दिखाओ. ‘ 

दूकान के मालिक को इतने कम दाम की साड़ियाँ दिखाने में संकोच हो रहा था. शास्त्री जी यह भांप गए. वे बोले, ‘ दूकान में जो सबसे कम कीमत की साड़ियाँ हैं, वही साड़ियाँ मुझे बताओ. ‘ 

अंततः मैनेजर ने उनकी इच्छानुसार सबसे सस्ती साड़ियाँ दिखाना शुरू किया. शास्त्री जी ने उनमें से कुछ साड़ियाँ चुनी और उनकी कीमत चुका कर चले गए. शास्त्री जी के जाने के पश्चात् वहां उपस्थित सभी कर्मचारी और ग्राहक उनकी सादगी की चर्चा करते हुए उनके प्रति श्रद्धा से भर उठे. 

(2) पक्षपात न किया जाए 

जब शास्त्री जी गृह मंत्री थे वे इलाहबाद में रहते थे. ऐसे समय जब नेता सरकारी सुविधाएँ प्राप्त करने के लिए मारामारी करते हैं, यह हैरान करने वाली बात थी कि लाल बहादुर शास्त्री जी किराये के मकान में रहते थे. इस कारण उन्हें ‘बिना मकान का गृहमंत्री’ कहा जाता था. 

एक बार मकान मालिक को मकान की आवश्यकता थी. इसलिए उन्होंने अपना निवास स्थान खाली कर दिया. किराये पर दूसरा मकान लेने के लिए उन्होंने आवेदन पत्र भरा. बहुत समय बीत गया पर शास्त्री जी को मकान नहीं मिला. उनके एक मित्र ने अधिकारीयों से पता लगवाया. अधिकारीयों ने जानकारी दी कि 176 आवेदकों के नाम शास्त्री जी से पहले अंकित है और शास्त्री जी का कड़ा आदेश है कि उनका आवेदन पत्र जिस क्रम में दर्ज है उसी क्रम में उन्हें मकान आवंटित किया जाए. उनके पद को देखते हुए किसी भी तरह का पक्षपात ना किया जाए. 

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Tuesday, October 29, 2013

Mahatma Gandhi Stories in Hindi



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Mahatma Gandhi Life Incidents and Stories

(1) छूत-अछूत

गांधी जी के पिता का ट्रांसफर जब पोरबंदर से राजकोट हुआ था तब राजकोट में उनके पड़ोस में उका नाम का एक सफाई कर्मी काम करता था. गांधीजी उका को बहुत पसंद करते थे. एक बार किसी अवसर पर गांधीजी को मिठाई वितरण का कार्य सौंपा गया था. गांधीजी मिठाई लेकर सबसे पहले उका के पास गए. उका गांधीजी से दूर होते हुए बोला, ‘मैं अछूत हूँ. मुझे मत छुईये.’ गाँधी जी ने उका का हाथ पकड़ा और यह कहकर मिठाई थमा दी, ‘अछूत कोई नहीं होता, हम सब इंसान हैं. ‘ 

माँ पुतली बाई को जब इस बारे में मालूम पड़ा तो उन्होंने गांधीजी को डांट लगायी और कहा, ‘जाओ नहा कर आओ. तुम्हे नहीं पता उका अछूत है.’ गांधीजी ने कहा, ‘ माँ साफ़ सफाई करना कोई बुरा कार्य तो नहीं है. मैंने तो सुना है कि भगवान् श्री राम ने भी गुह नामक अछूत को गले लगाया था और रामायण को तो हमारे धर्म में भी माना जाता है. मैं तो बस समाज से छूत-अछूत जैसी बुरी धारणाओं को हटाना चाहता हूँ. 

(2) पैसे का महत्त्व 

गाँधी जी जब अफ्रीका में थे तब उनके पास उनका परपोता आया हुआ था. गांधीजी ने एक नयी पेंसिल अपने परपोते को दी. लिखते-लिखते जब पेंसिल छोटी हो गयी तो बच्चे ने सोचा कि अगर मैं इस पेंसिल को फ़ेंक दूँ तो मुझे नयी पेंसिल मिल जायेगी. ऐसा सोचकर उसने पास ही की झाड़ियों में वह पेंसिल फ़ेंक दी. 

उसने गांधीजी से नयी पेंसिल मांगी. गांधीजी ने उसे पुरानी पेंसिल लाने को कहा. बच्चे ने कई बहाने बनाये पर आखिरकार उसे झाड़ियों से ढूंढ कर वह पेंसिल लानी पड़ी. पेंसिल देखकर गांधीजी ने कहा, ‘अभी भी यह पेंसिल किसी ना किसी के काम आ सकती है.’ बच्चा समझ गया और उसने उसी पेंसिल से लिखना शुरू कर दिया. 

गांधीजी जानते थे कि देश में ऐसे कई परिवार हैं जिन्हें दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता. पढ़ना - लिखना तो बहुत दूर की बात थी. इसलिए गांधीजी पैसे का महत्त्व बहुत अच्छे से जानते और समझते थे. 

(3) चोर भी तो भूखा है 

गांधीजी के आश्रम में एक बार एक चोर आ गया था. आश्रम के निवासियों ने उसे एक कोठरी में बंद कर दिया. सुबह जब गांधीजी नाश्ता करने बैठे तब चोर को उनके सामने लाया गया. गांधीजी ने आश्रम वासियों से पूछा , इसे नाश्ता करवाया या नहीं ? पहले इसे नाश्ता करवाओ फिर मेरे पास लाओ. ‘ एक व्यक्ति ने आश्चर्य से पूछा , ‘ चोर को नाश्ता ? ‘ 

गांधीजी ने कहा, ‘ चोर से पहले ये भी एक इंसान है और इसे भी भूख लगी होगी.’ 

(4) कर्तव्य 

गांधीजी एक बार रेल में यात्रा कर रहे थे. पास ही में बैठे एक व्यक्ति ने डिब्बे में ही थूंक दिया. गांधीजी को यह अच्छा नहीं लगा पर वे चुप रहे. उन्होंने कुछ कागज के टुकड़े उठाये और गंदगी को साफ़ कर दिया. उस व्यक्ति ने सोचा कि यह मुझे नीचा दिखाना चाहता है इसलिए उसने फिर से थूंक दिया. गांधीजी ने भी वापस साफ़ कर दिया. यह सिलसिला लगातार चलता रहा. जब स्टेशन आ गया तो लोगों की भीड़ गांधीजी की जय जयकार करते हुए उनके डिब्बे की तरफ बढ़ी. थूंकने वाले आदमी को जब पता चला कि जो व्यक्ति थूंक को साफ़ कर रहा था वह गांधीजी है और लोग उनकी जयकार कर रहे हैं तो उसे बहुत पछतावा हुआ. उसने गांधीजी के पैरों में गिरकर माफ़ी मांगी. गांधीजी ने उससे कहा, ‘मैंने तो बस अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है. अगर कभी तुम्हारे सामने भी ऐसी स्थिति आये तो तुम भी अपने कर्तव्य को याद रखना. ‘ 

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Friday, October 25, 2013

Success Story in Hindi


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एक समय की बात है. लन्दन की एक बस्ती में एक अनाथ बालक रहता था. वह अखबार बेचा करता था और उससे ही अपना गुजारा करता था. कुछ समय पश्चात् उसे जिल्दसाज की एक दूकान पर जिल्द चढ़ाने का काम मिला. उस बालक की पढ़ने में बहुत रूचि थी. जब भी वह पुस्तकों पर जिल्द चढ़ाता था तो जिल्द चढ़ाते-चढ़ाते कुछ महत्वपूर्ण बातें और जानकारियां पढ़ लिया करता था. एक बार जिल्द चढ़ाते समय उसकी नजर विद्युत सम्बन्धी एक लेख पर पड़ी. 

वह लेख पढ़ने लगा. उसे लेख बहुत अच्छा लगा. उसने एक दिन के लिए दूकान के मालिक से वह पुस्तक अपने साथ ले जाने की अनुमति मांग ली और रात भर जाग कर वह लेख और पूरी पुस्तक पढ़ डाली. पुस्तक से वह बहुत प्रभावित हुआ. उसके मन में भी प्रयोग करने की जिज्ञासा जागी. इसके लिए वह विद्युत सम्बन्धी छोटी मोटी वस्तुएं इधर-उधर से जुटाने लगा ताकि अध्ययन और परीक्षण कर सके. बालक की यह रूचि देखकर एक ग्राहक उससे बहुत प्रभावित हुआ. उस ग्राहक को भी विज्ञान में बहुत दिलचस्पी थी. वह एक दिन उस बालक को भोतिक शास्त्र के एक प्रसिद्द विद्वान डेवी का भाषण सुनाने ले गया. बालक ने डेवी की सभी बातों को बहुत गौर से सुना और उन्हें नोट कर लिया. इसके बाद बालक ने भाषण की समीक्षा की और कुछ परामर्श लिखकर डेवी के पास भेज दिए. 

डेवी को बालक के दिए परामर्श बहुत अच्छे लगे. उन्होंने बालक को अपने पास बुला लिया और उसे यन्त्र व्यवस्थित करने का कार्य सौंप दिया. बालक उनके सहयोगी की भूमिका भी निभाता और उनके बाकी कार्य भी करता. दिन भर वह काम में व्यस्त रहता और रात्रि में पढ़ाई करता. कितना भी कार्य हो और कितनी भी थकान हो पर उसके चेहरे पर एक शिकन तक ना आती. वह भोतिकी और विशेष रूप से विद्युत के क्षेत्र में बहुत कुछ करना चाहता था. 

अपने कड़े परिश्रम और लगन के बल पर उसने अपना सपना पूरा किया. वह एक महान वैज्ञानिक बना जिसे हम माइकल फैराडे के नाम से जानते हैं.

The above real hindi story tell us how an orphan and poor boy became a successful scientist Michael Faraday with his determination, will power and hard work. This true story is quite inspirational for students to know the secret of success. With the strong will power, determination and hard work we can achieve anything in our life. 



Information About Elephant in Hindi


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  • हाथी जमीन पर रहने वाला सबसे बड़ा स्तनपायी प्राणी है.
  • मुख्य रूप से हाथी एशिया और अफ्रीका महाद्वीप के बड़े बड़े मैदानों में पाए जाते हैं. 
  • हाथी की तीन प्रजातियाँ होती है. उनमें से केवल दो प्रजातियाँ ही जीवित हैं : ऍलिफ़स तथा लॉक्सोडॉण्टा तथा तीसरी प्रजाति मॅमथस विलुप्त हो चुकी है. 
  • हाथी की त्वचा स्लेटी रंग की होती है. जिस पर झुर्रियां पायी जाती है. एक व्यस्क हाथी की त्वचा की मोटाई 3 सेंटीमीटर तक होती है. आश्चर्य की बात यह है कि यह त्वचा बेहद कोमल होती है और मक्खी, मच्छर, कीड़े, मकोड़े आदि इसे आसानी से भेद सकते हैं. कुछ हाथी सफ़ेद रंग के भी होते हैं जिन्हें एल्बिनो कहा जाता है. इन हाथियों को पवित्र माना जाता है और इनसे कोई काम नहीं लिया जाता. 
  • सभी प्रजातियों में हाथी दांत पाए जाते हैं जिनकी सहायता से हाथी सख्त, खनिज युक्त मिट्टी को खाने से पहले तोड़ता है. हाथी में लगभग 28 दांत होते हैं जिनमें से दो छेदक दांत लम्बे होकर उसके मुंह से बाहर की तरफ निकले होते हैं. जीवन पर्यंत ये बढ़ते रहते हैं. पेड़ों की झाड़ियों को उखाड़ने और अन्य हाथियों से लड़ाई करने में ये दांत काम आते हैं. 
  • हाथी के पैर मोटे स्तंभों या खम्बों की तरह होते हैं. खड़े रहने के लिए इन्हें बहुत ही कम शक्ति की आवश्यकता होती है. हाथी खड़े-खड़े ही आराम करते हैं. ये अपने कानों के द्वारा ऊष्मा का विकिरण करते हैं.
  • हाथी का सबसे विशेष अंग उसकी सूंड होती है. यह हाथी के नाक और उसके ऊपरी होठ का ट्यूब जैसी आकृति में विस्तार है. सूंड की लम्बाई 10 फीट तक हो सकती है. ऊपर से नीचे की ओर सूंड की चौड़ाई कम होती जाती है और आखिर में छोटा सा छिद्र रह जाता है. हाथी की सूंड नमक, कैल्शियम और डेन्टाइन से बनी होती है. शरीर को ठंडा रखने के लिए हाथी अपनी सूंड की मदद से ही कीचड़ और मिट्टी अपने शरीर पर डालता है. जब हाथी सतर्क होता है तो अपनी सूंड से चिंगाड़ने की आवाज़ निकालता है. हाथी की सूंड उसके हाथ की तरह उपयोग में आती है. इसकी सहायता से यह एक सिक्के जैसी छोटी वस्तु से लेकर 600 पौंड ( 272 kg ) वजन तक के लकड़ी के गट्ठर भी आसानी से उठा लेता है. गंध और श्वास के लिए भी सूंड ही काम आती है. 
  • हाथी मुख्य रूप से घास, पेड़ों की छाल और पत्तियां खाता है. हाथी 160 - 350 पौंड अर्थात 72 से 158 किलोग्राम भोजन रोज लेता है. घास और शाखाओं से पत्तियां तोड़ने में हाथी अपनी सूंड का उपयोग करता है और सूंड की मदद से ही भोजन मुंह में डालता है. पानी पीने के लिए हाथी पहले सूंड में पानी भरता है फिर इसे फुहार के द्वारा मुंह में छोड़ता है.
  • हाथी एक सामाजिक प्राणी है और हाथी समूह में रहते हैं. झुण्ड में ज्यादातर मादाएं होती है और बुजुर्ग तथा प्रभावशाली मादा ही समूह का नेतृत्व करती है. नर हाथी जब तक लैंगिक रूप से प्रोढ़ नहीं होता वह भी इसी समूह का हिस्सा होता है. लैंगिक रूप से प्रोढ़ हो जाने पर उसे समूह से निकाल दिया जाता है. झुण्ड की सभी मादा हाथी बहुत एकता से रहती है और एक दूसरे की सुरक्षा भी करती हैं. जब ये भोजन और पानी की खोज में निकलती है तो झुण्ड के सदस्यों से संपर्क में रहने के लिए एक कम डेसिबल की आवाज़ जिसे मनुष्य के कान नहीं सुन सकते का प्रयोग करती हैं. 
  • नर हाथी वनों में अकेले ही घूमते हैं या फिर अन्य नर हाथियों के साथ समूह बना लेते हैं. 
  • मादा हाथी को गाय कहा जाता है. नर हाथियों को बैल कहा जाता है.
  • हाथी का गर्भकाल जमीनी जीवों में सबसे लम्बा 22 महीनों का होता है. अधिकांशतः बच्चे वर्षा ऋतुके अंतिम दिनों में पैदा होते हैं. हाथी के बच्चों को बछड़ा/बछड़ी कहा जाता है और जन्म के समय उनका वजन 200 पौंड ( 90 किलोग्राम ) होता है. इसकी ऊंचाई 1 मीटर तक होती है. नर चौदह से पंद्रह वर्ष की आयु में यौन परिपक्वता पा लेते हैं और मादा 15-16 वर्ष की आयु में पहले बच्चे को जन्म देती है. 
  • हाथी कुशाग्र बुद्धि होते हैं. इनकी दृष्टि कमजोर होती है. श्रवण शक्ति अच्छी और घ्राण शक्ति बहुत अच्छी होती है. पानी की गंध को यह 4.5 किलोमीटर की दूरी से ही सूंघ सकता है. हाथी रोजाना 70 से ज्यादा तरह की ध्वनियां तथा 160 दृश्य व स्पर्शनीय संकेतों का उपयोग करता है. 
  • जब हाथी गुस्से या डर में होता है तो थोड़ी दूरी तक वह 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ता है. लम्बी दूरी की यात्रा के समय हाथियों का झुण्ड 16 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलता है. 
  • हाथी को पानी बहुत पसंद होता है. इन्हें अक्सर नदियों और तालाबों में नहाते हुए देखा जा सकता है. हाथी अच्छे तैराक भी होते हैं. ये नियमित रूप से नहाते हैं.
  • हाथी की औसत आयु 70 वर्ष होती है.
  • हाथी एक संकट ग्रस्त प्रजाति है. पर्यावास के विनाश और मनुष्य द्वारा शोषण के कारण हाथी विलुप्प्त प्राय है. हाथी दांतों की वजह से इनका अवैध शिकार किया जाता है.

Did you like these interesting and amazing informations and facts about elephants.


Wednesday, October 23, 2013

Positive Thinking Story in Hindi


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सोच का असर 


एक बार एक गाँव की सीमा पर एक घोड़े पर सवार यात्री पहुंचा. वहां खेत में काम कर रहे किसान को देखकर उसने पूछा, ‘भाई, यह गाँव कैसा है ? मुझे बहुत दूर तक जाना है इसलिए कुछ दिनों के लिए मैं यहाँ रुकना चाहता हूँ. ‘ किसान ने यात्री से पूछा, ‘ आप यहाँ से पहले जहाँ से आये हैं वह जगह कैसी थी ? ‘ 

यात्री ने उत्तर दिया, ‘ इससे पहले मैं एक गाँव में ही था. वहां के लोग बड़े ही झगड़ालू थे. बात-बात में लड़ना उनकी आदत थी. इसलिए मैं वहां ज्यादा समय के लिए नहीं रुक सका. ‘ 

किसान ने कहा , ‘मेरी सलाह है आपको कि आप यहाँ भी ना रुके क्योंकि यहाँ के लोग तो और भी ज्यादा बुरे हैं. ‘ यात्री यह सुनकर तुरंत वहां से चला गया. उसके जाने के कुछ समय पश्चात एक और यात्री वहां आया. उसने भी किसान से यही पूछा , ‘यह गाँव कैसा है ? क्या मैं यहाँ रुक सकता हूँ ? ‘ किसान ने उससे भी यही पूछा कि आप जिस जगह से आये हैं वह जगह कैसी थी ? यात्री ने कहा , ‘वह गाँव और वहां के लोग बहुत अच्छे थे. अगर मुझे आगे ना जाना होता तो मैं वहीं रुक जाता. मुझे दूर तक जाना है इसलिए बीच में रुकना चाहता हूँ. ‘ किसान तुरंत बोला, ‘ मित्र आपका इस गाँव में स्वागत है. यहाँ के लोग और भी ज्यादा अच्छे हैं. आप यहाँ रुक सकते हैं. ‘ 

पास ही के खेत में एक और किसान काम कर रहा था. उसने पहले किसान से पूछा, ‘भाई, तुमने पहले यात्री को तो गाँव के लोगों का बर्ताव बुरा बताया और दुसरे को अच्छा. ऐसा क्यों ? पहले किसान ने उत्तर दिया, ‘ भाई, पहला यात्री नफरत लेकर आया था इसलिए वह जहाँ भी जाएगा नफरत ही फैलाएगा. दूसरा अपने साथ प्रेम लेकर आया था इसलिए जहाँ भी जाएगा और रहेगा हमेशा प्रेम ही देगा. अगर पहला यात्री यहाँ रुकता तो उसका हमारे गाँव पर बुरा प्रभाव पड़ता इसलिए मैं नहीं चाहता था कि वह यहाँ रुके. 

दूसरा किसान पहले की बात से सहमत हो अपने काम में लग गया. 

The above hindi story tell us the importance of positive thinking and positive attitude in our life. When we start taking everything in a positive way, then we start having positive results. The people having positive attitude are loved and respected by everyone. Because wherever they go they spread love, peace and happiness. On the other hand the people with negative thinking always spread hate and envy. Its always good to keep yourself away from such people.

Note : The above story is not my own creation. 

Tuesday, October 22, 2013

Poem on Moon in Hindi


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मेरा चाँद 

ऐ चाँद ! 
क्या मेरा एक काम करोगे ?
वो जो दूर चला गया है मुझसे 
क्या उसकी एक झलक मुझे ला दोगे ? 

देखो ना ! कितने साल हो गए हैं 
उसे देखे हुए, उससे मिले हुए 
एक अरसा हो गया 
उससे लड़े और झगड़े हुए. 

आज मुझे उससे जुड़ी हर बात 
बहुत याद आ रही है 
सबके पास होगा अपना चाँद 
और मेरे हिस्से आई बस ये तन्हाई है. 

तुम तो गवाह हो ना 
हर उस रात के 
जब हाथों में डाले हाथ 
अँधेरी सुनसान राहों पर 
हम बेख़ौफ़ निकलते थे 
रास्ते हो जाते थे कितने छोटे 
जब प्यार के दो मुसाफिर 
हर कदम साथ-साथ चलते थे. 

वह एक दम शांत था 
बिल्कुल तुम्हारे जैसा 
इसलिए लड़ाई का बहाना 
हमेशा मुझे ही ढूंढना होता था. 
और लड़ने-झगड़ने के बाद 
बच्चों की तरह मेरा ही रोना छूटता था. 

बस वो भीगे पल और उसका प्यार भरा स्पर्श 
बयां करना चाहूँ तो भी नहीं कर सकती 
प्यार बस किया जा सकता है महसूस 
इससे ज्यादा कुछ और मैं कह भी नहीं सकती.

याद करने लगी जो सारी बातें 
और कर दी बयां जो सारी मुलाकाते 
तो सच आज फिर से रों पडूँगी 
मचल रहा है कब से जो यादों का तूफ़ान 
बन कर झरना आज मैं बिखर ही पडूँगी. 

पढ़ेगा जब वो मेरी तड़प 
जानती हूँ आँखें उसकी भी भीग जायेगी 
और उसकी आँखों में जो आये आंसू 
तो सच मेरी जान ही निकल जायेगी.

ऐ चाँद बस तुम इतना कर दो 
या तो मेरा चाँद ले आओ 
या फिर आज मेरे लिए अमावस कर दो 
क्यूंकि आज की रात जो तुम्हे देखा 
तो अपना दर्द छिपा नहीं पाउंगी 
गर ना आया मेरा चाँद 
तो सच आज मैं टूट ही जाउंगी. 

Monika Jain ‘पंछी’ 

How is this poem on Moon of Karva Chauth, Love, Separation and Memories ?

Friday, October 18, 2013

Poem on Mind in Hindi


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जाने क्यूँ गुमसुम है मन ?

जाने क्यूँ गुमसुम है मन ?

निमिष मात्र में
जग का कोना नापनेवाला 
द्रुतिगत मन.

गगन भेदकर
अंतरिक्ष में 
स्वछंद विचरने वाला मन.

जाने क्यूँ गुमसुम है मन ?

भूतल की गहरायी तक जा 
सहज पैठनेवाला मन.

चपला सा चंचल 
फिर भी 
जाने क्यूँ गुमसुम है मन ?

प्रश्नों का उत्तर देनें में 
तत्पर अरु उत्साही मन.

किंतु आज के प्रश्नों पर 
क्यूँ चुप्पी साधे बैठा मन ?

शायद बहुतेरे प्रश्नों की 
लाज बचाता चुप्पी मन.

जाने क्यूँ गुमसुम है मन ?

By Satyanarayan Singh 


Sometimes our mind becomes very sad, gloomy and serious without any reason. When we try to find the reason, we don’t get any answer. The mind which runs very fast, which is free to roam everywhere in the universe, which is very deep, eager and keen to solve the problems, sometimes becomes completely silent. It may happen when the situation around us are not in our control or we don’t have the answers of the questions arising in our mind like what is the reason of our existence on this earth ? Whats the aim of our life ? etc. 

This beautiful and deep hindi poem ‘जाने क्यूँ गुमसुम है मन’ is written by ‘Satyanarayan ji Singh’ which is near to everyone’s heart. We all face this situation in our life many times. The last five lines of this poetry are very relevant to todays scenario of our country. Today's brutal crimes are beyond our thinking and imagination and sometimes we feel completely helpless and wordless and our mind becomes completely blocked. What you think about this poem ? Feel free to tell us via comments.

Saturday, October 12, 2013

Veer Ras Kavita in Hindi


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हलचल की आस में जीवित हूँ

इन उन्मादों से डरा नहीं
सन्नाटों पे विचलित हूँ
चुभती है शांति कानो में
हलचल की आस में जीवित हूँ.

है श्वासों में हुंकार भरा 
कुतूहल रगों का पानी है
संगीत है बस सैलाबों में
विध्वंसों में लिप्त वाणी है.

लाचारी की बीमारी को
इस बेबस दुनियादारी को
शांति के क्रियाकलापों को
वरदानो को अभिशापों को.

पंखो में दबा के उड़ता हूँ
राखों में बिखर फिर जुड़ता हूँ.

है बैर नहीं अभिमान नहीं
है भूत भविष्य का ज्ञान नहीं
क्रांति की हिलोरे है मस्तक में
ये जीव मेरी पहचान नहीं.

शीलता भाए लाशों को
रक्त में बैचेन गर्मी है
मर्यादा सावंग सी लगती है
फितरत मे अपने बेशर्मी है.

प्रतिहिंसा की है प्यास नहीं
बस नव सृजन पर अर्पित हूँ
चुभती है शांति कानों में
हलचल की आस में जीवित हूँ.

Lavkesh Kumar Singh 

With time we have forgotten the wounds given by the britishers at the time of slavery. But what about the wounds that we are getting even after so many years of independence. Poverty, corruption, biased legal system, unemployment, black money, black marketing, corrupt political system, inappropriate education, inflation, increasing crime rate and many more problems exist in our country and increasing on a rapid pace. Its not the time to sit calm. Its the time of revolution. Only the revolutionary deeds can free us from all these problems. 

These revolutionary poems written by ‘Lavkesh Kumar Singh’ are quite inspirational to light the flame of revolution (kranti). The Veer Ras Kavita ‘हलचल की आस में जीवित हूँ’ reminds me of our freedom fighters and the poem ‘ दोष किसका है ?’ reflects that we are equally responsible for whatever we are facing. If we will strive hard we can achieve anything in this world.


Story for Kids in Hindi


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आज रौनक के स्कूल की छुट्टी थी. उसने मम्मी से पूछा "मम्मी मैं गौरव के यहाँ खेलने जाऊं?" 

"हाँ बेटा जाओ पर अँधेरा होने से पहले लौट आना." मम्मी ने कहा.

“ठीक है मम्मी मैं समय पर आ जाऊंगा" यह कहकर रौनक गौरव के घर की ओर चल पड़ा.

थोड़ी दूर चलने पर उसने देखा दीनू काका एक हरे-भरे पेड़ को काट रहे थे. रौनक रुका और बोला "दीनू काका आप इस पेड़ को क्यों काट रहे हो ? ऊपर तो चिड़ियाँ का घोसला भी है. आप पेड़ को काटोगे तो उसका घर भी उजड़ जायेगा. मेरी टीचर कहती है कि हमें हरे-भरे पेड़ों को नहीं काटना चाहिए और जीवों पर भी दया करनी चाहिए."

नन्हें से रौनक की समझदारी भरी बाते सुनकर दीनू काका के हाथ रुक गए और वे बोले "बेटा तुम बिल्कुल सही कहते हो. मुझ अनपढ़ को पाप करने से बचा लिया तुमने." यह कहकर दीनू काका सूखी लकड़िया ढूंढने निकल पड़े. 

रौनक कुछ और आगे चला तो उसने देखा पानी की एक टंकी के पास रजनी मौसी कपड़े धो रही थी. नल खुला था और नीचे रखी बाल्टी भर चुकी थी और बहुत सारा पानी बहकर सड़क पर आ रहा था. 

“रजनी मौसी जल तो जीवन है. अगर ये ही नहीं रहा तो हम पीयेंगे क्या ? मेरी टीचर कहती है कि हमें व्यर्थ पानी नहीं बहाना चाहिए." रौनक ने कहा.

“तू ठीक कहता है बेटा. आगे से मैं ख्याल रखूंगी." नल को बंद करते हुए रजनी मौसी ने कहा.

रौनक कुछ और दूरी तक चला तो उसने देखा शिल्पा दीदी घर की सफाई से निकला कचरा सड़क पर फ़ेंक रही थी. रौनक रुका और बोला "शिल्पा दीदी मेरी टीचर कहती है कि हम जिस तरह अपने घर को साफ़ रखते है उसी तरह हमें अपनी गली, मौहल्ले, शहर और देश को भी स्वच्छ और सुन्दर रखना चाहिए. इससे हमें बीमारियाँ भी नहीं होगी और हम देश के अच्छे नागरिक भी कहलायेंगे."

रौनक की बाते सुन शिल्पा को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने सड़क से कचरा उठा कर कुछ ही दूरी पर रखे कूड़ेदान में डाल दिया.

कुछ देर में रौनक अपने दोस्त गौरव के घर पहुँच गया. गौरव वहां नहीं था. गौरव की मम्मी रसोईघर में खाना बना रही थी. रौनक ने देखा कि एक कमरे में लाइट और पंखा चल रहा था और वहां कोई नहीं था.

रौनक रसोईघर में गया और बोला "रोली आंटी पास वाले कमरे में लाइट और पंखा चल रहा है. मेरी टीचर कहती है कि हमें बिजली व्यर्थ नहीं जलानी चाहिए वरना एक दिन ऐसा आएगा जब हमें फिर से अँधेरे में रहना पड़ेगा."

रौनक की समझदारी भरी मीठी-मीठी बातें सुनकर रोली आंटी कमरे में गयी और लाइट और पंखा बंद कर दिया और रौनक के सर पर प्यार से हाथ फेरकर बोली "बेटा तुम्हारी टीचर बिल्कुल सही कहती है. मैं आगे से ख्याल रखूंगी. तुम छत पर जाओ गौरव वहां तुम्हारा इंतजार कर रहा है."

रौनक छत पर गया और दोनों दोस्त खेलने लगे.

Monika Jain 'पंछी'

Friday, October 11, 2013

Essay on Positive Thinking in Hindi


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कुछ लोगों को अपने ज्ञान और पद का बहुत घमंड होता है और अपने आगे वे किसी को कुछ नहीं समझते पर सच सिर्फ इतना है कि दुनिया के हर प्राणी और हर वस्तु से हमें कुछ ना कुछ सीखने को मिल सकता है. हम कभी भी यह दावा नहीं कर सकते कि हम सर्व ज्ञानी है और हमें तो सब कुछ आता है. इसलिए चाहे हम जितने भी बड़े हो जाएँ पर रहते हमेशा एक विद्यार्थी ही हैं, जिसका सीखना जीवन पर्यंत जारी रहता है. 

हमारे जीवन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हर व्यक्ति, हमारे जीवन में घटित होने वाली हर घटना, यह प्रकृति, इसके सभी प्राणी और पेड़-पौधे बल्कि यूँ कहूँ कि संसार की हर वस्तु हमें कुछ ना कुछ सिखाती ही हैं. हम सभी ने बचपन में चींटी और मकड़ी की कहानी सुनी है. एक चींटी ऊँचाई पर चढ़ते समय कई बार गिरती है, लेकिन वह हार कर कभी नहीं ठहरती बल्कि अपनी कोशिश अनवरत जारी रखती है. तात्पर्य यह है कि एक चींटी और मकड़ी से मिली सीख भी हमारे जीवन की दिशा बदलने का मादा रखती है. 

अतः हमें कभी भी खुद को इतना महान और बड़ा नहीं समझ लेना चाहिए कि सीखने का हर द्वार हम यह सोचकर बंद कर दें कि हमें तो सब कुछ आता है, किसी की क्या औकात जो हमें कुछ सिखा और पढ़ा सके. याद रखिये - सर्वज्ञानी कोई नहीं होता. 

कई बार ऐसा होता है कि कोई हमारे विचार से सहमत नहीं होता और हमारा विरोध करता है, पर इसे सकारात्मक रूप से लिया जाना चाहिए ना कि यह सोचना चाहिए कि विरोध करने वाला तो हमारा दुश्मन है और हमसे जलता है. हो सकता है वह हमारा दुश्मन भी हो और हमसे ईर्ष्या भी रखता हो, पर यह भी जरुरी नहीं कि उसकी कही हर बात गलत ही हो. 

रावण के बारे में हम सबने पढ़ा, सुना और देखा है. वह महाज्ञानी था लेकिन उसके एक गलत विचार से सारी लंका का सर्वनाश हो गया. उसके शुभचिंतकों ने उसे बहुत समझाया पर अपने अहम् में वह इतना अँधा हो गया कि उसने किसी की नहीं सुनी. महान से महान ज्ञानी व्यक्ति का भी कोई विचार गलत हो सकता है. इसलिए कभी भी अहम् में इतना अँधा नहीं होना चाहिए कि जो हमारा समर्थन करे वे हमें हमारे दोस्त और जो विरोध करे, वे हमें हमारे दुश्मन नज़र आने लगे. चापलूसों से हमेशा सावधान रहें.

अगर कोई विचार सचमुच अच्छा है और ग्रहण करने योग्य है तो उसका खुले दिल से स्वागत करना चाहिए. अपनी सोच को परिष्कृत करने का मार्ग हमेशा खुला रखना चाहिए और इस रास्ते में हमारा अहम् आड़े नहीं आना चाहिए. विचारों के विरोध और समर्थन को व्यक्ति का विरोध या समर्थन ना बनने दें, क्योंकि गलती तो कभी भी किसी से भी हो सकती है और कभी कोई सही भी हो सकता है. अतः मतभेद कभी मनभेद नहीं बनने चाहिए. 

Monika Jain ‘पंछी’

Thursday, October 10, 2013

Poem on Old Age People in Hindi


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आज बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के
लय ताल बिगड़े हुए हैं 
युवा और बच्चे हैं अपने में मग्न 
और बुजुर्ग उन्हें आउटडेटेड लग रहे हैं.

एकल परिवारों ने बुजुर्गों के 
आत्मीय सानिध्य को 
कर दिया है दूर 
बुजुर्ग हैं एक आफत 
यह सोचती है आज की पीढ़ी 
होकर मगरूर.

बुजुर्गों को वृद्धाश्रम भेज 
उनसे छुटकारा पाने वाले 
भूल जाते हैं 
होंगे वे भी एक दिन बूढ़े 
जो आज हो रहे हैं 
जवानी में मतवाले. 

नहीं है उन्हें भान कि
बुजुर्ग जला सकते हैं वह मशाल 
जिसकी रौशनी में समाज 
तरक्की कर सकता है 
बुजुर्गों के ज्ञान और अनुभव से ही 
हमारा देश आगे बढ़ सकता है. 

बुजुर्ग संस्कारों का वृक्ष है 
अनुभव और ज्ञान में वे दक्ष हैं
उनकी छाया में हम पायेंगे 
अनमोल खजाना 
भूल कर भी अपने बड़ो से 
कभी दूर ना जाना. 

बुजुर्ग हमारे मार्गदर्शक है 
वें ही हमारे सच्चे पथ प्रदर्शक है
उनसे मिली दिशा 
हमारा भाग्य बदल सकती है 
बजुर्गों की सीख, हमारा जीवन 
खुशियों से भर सकती है. 

हमारा कर्त्तव्य है बुजुर्गो को दें 
भावनात्मक सुरक्षा और सम्मान 
उन्हें जोड़े समाज की मुख्य धारा से 
और ना करें उनकी उपेक्षा व अपमान. 

बुजुर्गों को भी समझना होगा 
बदलाव है प्रकृति का नियम 
कोई मनमानी नहीं 
आज की पीढ़ी में होते 
बदलाव को अस्वीकृति
बुद्धिमानी नहीं. 

गर ना समझे वे तो भी 
एक बात पर देना तुम सब ध्यान 
हमारा अस्तित्व है हमारे बड़ो से 
सो उनको प्यार, सुरक्षा और देकर सम्मान 
हम कर रहे हैं केवल खुद पर अहसान. 

Monika Jain ‘पंछी’

‘Budhapa’ or ‘Vridhavastha’ is a phase of life that we all have to face sooner or later. One day we will also called old age people or senior citizens. Its our duty to give love, respect, care and security to our elders. They are the best guide in our life. This hindi poem on old age people is dedicated to all the senior citizens.

Wednesday, October 9, 2013

Poem on Discipline in Hindi


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स्वयं पर स्वयं का शासन 
कहलाता है अनुशासन.

यह कोई पराधीनता नहीं 
ना ही है कोई बंधन
यह है नियमों का अनुसरण 
बनता है जिससे आदर्श जीवन. 

अनुशासन चेतना का परिष्करण है 
अनुशासन सिद्धांतों का अनुकरण है 
अनुशासन सुसंस्कार है 
सफल जीवन का यही आधार है. 

अच्छे विद्यालय ही 
अनुशासन के निर्माता है 
सुसंस्कृत परिवार में ही बालक 
अनुशासन पाता है. 

अनुशासित विद्यार्थी 
बढ़ाते हैं देश का मान 
जो दिखाते हैं अनुशासनहीनता 
नहीं पाते कहीं भी सम्मान. 

समाज में बढती अव्यवस्था 
अनुशासनहीनता का परिणाम है 
नियमों को जो करते हैं दरकिनार 
बुद्धिमान नहीं वे नादान है.

अनुशासन राष्ट्र हित में जरुरी है 
ना सोचो कि यह कोई मजबूरी है 
कर्तव्यों का पालन हमारी जिम्मेदारी है 
अनुशासित रहना ही सच्ची समझदारी है. 

अनुशासन सफलता की धुरी है 
प्रशासन, स्कूल, समाज और परिवार 
सबकी सफलता के लिए 
अनुशासन जरुरी है. 

अनुशासन परिवार, समाज और राष्ट्र की आवश्यकता है 
बिना अनुशासन कोई भी आगे नहीं बढ़ सकता है 
अनुशासन से ही समस्यायों का समाधान है 
अनुशासन में ही विकसित होता ज्ञान है. 

अनुशासन जीवन का प्राण है 
सफलता के लिए अनुशासन रामबाण है
अनुशासन पशुता से ऊपर उठाता है 
अनुशासन ही मानव को मानव बनाता है. 

Monika Jain ‘पंछी’ 

In short, discipline is controlling our mind. Self discipline in every field of life helps us to get good health, true happiness, peace, success and enlightenment. It has a great role in students life. The best place to learn discipline is our schools. Children are same as raw pitcher. Discipline helps to give them good shape and turned them into good and responsible citizens, who help in building a good and developed nation. The above hindi poems on ‘anushasan’ is dedicated to all the kids. 


Friday, October 4, 2013

Poems for Kids in Hindi


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1. Hindi Poem on Teacher for Kids / शिक्षक पर बाल कविता 

माँ है मेरी जीवन दाता 
पिता है पालक पोषक 
पर जीने की राह दिखाते 
मुझको मेरे शिक्षक. 

अनुशासन का पाठ पढ़ाते
अच्छी-अच्छी बात सिखाते 
कठिन-कठिन लगते सवाल जो 
सरल बनाकर हल करवाते. 

सच्चा मार्ग दिखाते हमको 
यश की ना वो करते चाह 
ईश्वर से भी ऊपर दर्जा 
दिखलाते जीवन की राह.

Monika Jain ‘पंछी’

2. Nursery Rhyme on Sun / सूरज पर बच्चों की कविता 

सूरज भैया कहाँ छिपे हो 
जल्दी से तुम आओ ना 
ठण्ड लग रही हमको थर-थर 
गर्मी तुम दे जाओ ना.

छत का कौना पड़ा है सूना 
इंतजार सब करते हैं 
छुट रही कंपकंपी हमारी 
राह धूप की तकते हैं.

बैठ धूप में बड़े चाव से 
मूंगफली हम खायेंगे 
खेलेंगे पकड़म पकड़ाई 
और सर्दी दूर भगायेंगे. 

Monika Jain ‘पंछी’

3. Hindi Poetry on Holi for Children / होली पर बालगीत 

रंग बिरंगी आई होली
कितनी खुशियाँ लायी होली. 

नीली, पीली, हरी और लाल
उड़ती है अबीर और गुलाल.

बाजे ढोल, भांग की गोली
धमाचोकड़ी करती टोली.

प्रेम की मीठी-मीठी बोली 
देखो आई-आई होली. 

Monika Jain ‘पंछी’

4. Bal Kavita on Moon for Babies / चंदा मामा पर बाल कविता 

चंदा मामा, चंदा मामा 
लुकाछिपी क्यों करते हो 
कभी अधूरे, कभी हो पूरे 
कैसा जादू करते हो.

गायब होने का ये जादू 
हमको भी सिखलाओं ना 
तारों के संग दुनिया की 
हमको भी सेर कराओ ना. 

माँ जब हमको डाटेंगी 
हम भी झट से छिप जायेंगे 
बरसायेगी जब अपनी ममता
फिर गोल मटोल हो जायेंगे. 

Monika Jain ‘पंछी’

How are these Kids Hindi Poems  ?

Wednesday, October 2, 2013

Poem on Maa in Hindi


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माँ !

कहाँ से लाती हो इतनी शक्ति 
कहाँ से लाती हो इतना प्यार
कहाँ से लाती हो इतना समर्पण 
और कहाँ से लाती हो इतना त्याग ?

रोज सवेरे पहले उठकर 
और लेकर ईश्वर का नाम 
बिना स्वार्थ के लग जाती हो 
करने हम सबके तुम काम. 

चूल्हा-चोका, झाड़ू, बर्तन 
घर में होते ढेरों काम 
बन मशीन तुम चलती रहती 
तुम्हे नहीं कोई आराम. 

तुम्हे ना देखा मैंने करते 
बीमारी का कोई बहाना 
जैसे हम बच्चे करते हैं 
ओढ़ के चद्दर झट सो जाना. 

नहीं तुम्हारी कोई इच्छा 
नहीं तुम्हारा कोई सपना 
हम सबके जीवन को तुमने 
मान लिया है जीवन अपना. 

बरसाती हो प्यार अनोखा 
जैसे शीतल हवा का झोंका
आने वाली हर विपदा को 
तुमने आगे बढ़कर रोका.

तेरे आँचल की छाया में 
आती सबसे गहरी नींद 
हर संकट में बनती हो 
तुम सबसे पहली उम्मीद. 

हर मुश्किल में आती हो 
सबसे पहले तुम ही याद 
माँ मुझको तुम लगती हो 
ईश्वर की कोई फरियाद. 

Monika Jain ‘पंछी’


Mother ( Maa ) is like an angel in our Life. She is full of compassion, love, dedication, power and sacrifice. She lives for our dreams. Her selflessness is unbeatable. She does everything for us without wishing anything in return. Mother’s love is the purest form of love in this world. She protects us from every trouble. She is the synonym of God, even greater than him in our life. I love my Mummy and The above Hindi Poem ‘Meri Maa’ is dedicated to my Mom.