Wednesday, December 24, 2014

Love Conversation in Hindi


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Love Conversation

(1)

तुम्हें पता है जब तुम बोलती हो तो हवाओं में रूमानियत की बूंदे तैरने लगती है...जब खिलखिलाकर हँसती हो तो प्यार की ये बूंदे बरसने लगती है...मैं बस खो जाता हूँ तुम्हारी मासूम आँखों की गहराइयों में...जो समेट लेती है इन बारिशों को...और फिर मोती बनकर तुम्हारी आँखों में चमकती इन बूंदों में मुझे सारा जहाँ प्यार में डूबा नज़र आने लगता है…...तुम्हारी आँखें, तुम्हारी बातें और तुम्हारी ये मुस्कुराहटें जीना सिखाती है...तुम प्यार में समायी हो या प्यार तुममें...नहीं पता...पर तुमसे ही जाना है मैंने प्यार को...बस तुमसे ही... ~ तुम्हारा आकाश! 

आकाश! मेरे शब्दों से हवाओं में रूमानियत की रंगत है...क्योंकि ये शब्द बस तुम्हारे लिए हैं...मेरी खिलखिलाहट से भरी हंसी तुम्हें बारिश सी लगती है...पर इस बारिश को बरसाने वाले बादल तुम ही तो हो... मेरी आँखों में तुम्हें जो मासूमियत दिखती है...वह तुम पर मेरा विश्वास है...और तुम्हें सारे जहाँ का प्यार मेरी आँखों में इसलिए नज़र आता है...क्योंकि इन्हें देखने वाली आँखें तुम्हारी है...मेरे पंखों को उड़ान देने वाले आकाश! तुमने भले ही मुझसे प्यार को जाना होगा...पर मैंने तुम्हारे साथ प्यार को जीया है...हर पल...हर लम्हा...मेरी आँखों, मेरी बातों और मेरी मुस्कुराहटों में जीवन भरने वाले सिर्फ तुम हो...सिर्फ तुम...और मैं हूँ…~ तुम्हारी पंछी!

(2) 

आकाश : तुम्हें पता है तुम्हारी सबसे अच्छी बात क्या है? 

पंछी - क्या? 

आकाश : यही कि तुम बहुत-बहुत अच्छी हो.

पंछी : और तुम्हें पता है तुममें सबसे अच्छा क्या है? 

आकाश : क्या? 

पंछी : तुम्हें सिर्फ अच्छाई को सराहना ही नहीं आता. उसे सहेजना और संवारना भी आता है. 

आकाश : वो इंसा ही क्या जो अच्छाई की कद्र ना जाने...तुझसे जुड़े कोई और तुझे ना चाहे...वो प्यार करना भी भला कहाँ जाने?

पंछी : तेरे प्यार की गहराइयों की कायल हूँ मैं...होठ सिल देती है...अक्सर तेरी बातें... खैर! तेरी तो खामोशियों की भी घायल हूँ मैं. 

(3)

पंछी : तुमने सुनी है कभी खामोशियों की आवाज़? 

आकाश : हाँ, बहुत बार... 

पंछी : क्या कहती है खामोशियाँ? 

आकाश : खामोशियाँ अक्सर करती हैं तुम्हारी बातें... पता ही नहीं चलता...कब जागता है दिन और कब सोती हैं रातें...

आकाश : अच्छा! तुमने भी सुना है कभी ख़ामोशी को? 

पंछी : हाँ, सुना है ना! ये शोर भी लगते हैं मुझे अब खामोशियों के हिस्से... इन खामोशियों में सुनती हूँ मैं...हमारी खामोशियों के किस्से…

By Monika Jain ‘पंछी’

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Saturday, December 20, 2014

Ginger Health Benefits in Hindi


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Ginger Health Benefits 
  • अदरक आयुर्वेद में महाऔषधि के रूप में जानी जाती है. यह शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्वों को समाहित किये हुए है.
  • ताजा अदरक में 81 % पानी, 2.5 % प्रोटीन, 1 % वसा, 2.5 % रेशे और 13 % कार्बोहाइड्रेट उपस्थित रहता है.
  • अदरक में आयरन, कैल्शियम, आयोडीन, क्लोरीन, विटामिन और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं.
  • सूजन और दर्द वाली जगह अगर ताजे अदरक को पीसकर और इसमें कर्पूर मिलाकर लगाया जाये तो काफी आराम मिलता है. 
  • अदरक हमें कई रोगों से भी दूर रखता है. इसके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. मौसम बदलने पर होने वाले सर्दी, जुकाम के खतरे को यह कम करती है.
  • शरीर के किसी हिस्से में चोट लग जाने पर वहां अदरक का लेप करना चाहिए. सूख जाने पर इसे उतारकर उस जगह गुनगुने सरसों के तेल से मालिश की जानी चाहिए. एक से दो बार ऐसा करने से मोच का असर ठीक हो जाता है.
  • दांत में दर्द हो तो अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े दांतों के बीच दबाकर रखने से दर्द खत्म हो जाता है.
  • दांतों के दर्द में सूखी अदरक (सोंठ का चूर्ण) में लौंग का तेल मिलाकर दांतों पर लगाने से आराम मिलता है.
  • अदरक में पाए जाने वाले जिंक, क्रोमियम और मैग्नीशियम रक्त संचार को सुचारू करते हैं.
  • नित्य अदरक का सेवन शरीर में कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करता है. इससे खून के रूक जाने और दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम हो जाता है.
  • रोजाना अदरक को 30 मिनट चबाने से सिरदर्द और जी मिचलना जैसी समस्या से राहत मिलती है. 
  • सुबह अदरक वाली चाय पीने से ब्लड शुगर कण्ट्रोल रहती है.
  • पेट दर्द, एसिडिटी, बवासीर, जी मिचलाने आदि में भी अदरक का सेवन लाभकारी रहता है.
  • 5 ग्राम अदरक और दो चम्मच कच्ची सौंफ को एक गिलास पानी में उबालें. जब पानी 1/4 रह जाए तो इसे दिन में 3-4 बार लेने से दस्त में आराम मिलता है.
  • अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटते रहने से दमा में राहत मिलती है और भूख भी बढ़ती है.
  • गैस और कब्ज में भी अदरक के उपयोग से आराम मिलता है. 
  • नींबू-नमक से बना सूखा अदरक हम यात्रा में भी साथ रख सकते हैं. 

Note : Consult your doctor before using any remedy stated here. If you are also aware about any other health benefits of 'Ginger' then feel free to submit here.

Holi Safety Tips in Hindi


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Holi Safety Tips

  • रंग लगाते समय जहाँ तक संभव हो आँखों को बंद रखा जाना चाहिए क्योंकि ज्यादातर रंग एसिटिक होते हैं जो आँखों में जाने पर खुजली और जलन पैदा करते हैं. अगर लगे कि आँखों में रंग चला गया है तो आँखों को ठंडे पानी से धोना चाहिए. 
  • नाखूनों पर रंग चढ़ने से बचाने के लिए हाथ और पैर के नाखूनों पर अच्छे किस्म की नेल पेंट की मोटी परत लगा लेनी चाहिए. अगर नाखून बड़े हैं तो एक हलकी परत अन्दर की तरफ भी लगा लेनी चाहिए और नाखूनों को टूटने से बचाने के लिए उनकी ट्रिमिंग कर लेनी चाहिए.
  • होठों को रंग से बचाने के लिए वैसलीन लगायें और उसके ऊपर अच्छे किस्म की लिपिस्टिक लगा लें.
  • बालों पर होली वाले दिन जैतून या नारियल के तेल से अच्छे से मालिश कर लें और बालों को बांधकर रखें. 
  • होली के 10-12 दिन पहले तक किसी भी तरह का सौन्दर्य उपचार जैसे वैक्सिंग, थ्रेडिंग आदि ना कराएँ क्योंकि इससे त्वचा सेंसिटिव हो जाती है और रंग के संपर्क में आने पर इन्फेक्शन और बर्निंग सेंसेशन का खतरा रहता है. होली वाले दिन पूरे शरीर पर नारियल, जैतून के तेल या किसी अच्छी सी क्रीम की मालिश की जानी चाहिए. इससे हम रंगों के हानिकारक प्रभाव से बचे रहेंगे.
  • सनग्लासेज का उपयोग भी किया जाना चाहिए. ये रंगों के हानिकारक केमिकल्स और रंगों से भरे हुए वाटर जेट्स से आँखों को बचा सकते हैं.
  • सबसे बेहतर है अगर हम होली कृत्रिम रंगों की बजाय प्राकृतिक रंगों से खेलें. प्राकृतिक रंग बनाने की विधि आप यहाँ पढ़ सकते हैं : How to make natural colors for holi
Use these safety tips while playing holi and make it a day full of happiness and enjoyment. Happy Holi :)


Monday, December 15, 2014

Hindi Story on Paropkar


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प्रयास 

राजन रोज समुद्र किनारे जाता और घंटों बैठकर लहरों को देखा करता. थोड़ी-थोड़ी देर में वह उठता, किनारे से कुछ उठाकर समुद्र में फेंक देता और वापस आकर बैठ जाता. वहाँ जो भी लोग आते, उसे पागल समझते और ऐसा करते देख उसकी हंसी उड़ाते. पर राजन इन सबकी परवाह नहीं करता. वह बस चुपचाप अपने काम में लगा रहता. 

एक दिन एक व्यक्ति वहाँ आया और उसने राजन की इस गतिविधि को देखा. पहले तो उसने भी राजन को पागल ही समझा. पर थोड़ी देर बाद ध्यान से देखने के बाद वह राजन के पास गया और पूछा, ‘ भाई! तुम यह क्या कर रहे हो? 

राजन ने कहा, ‘यह समुद्र अपनी लहरों को बार-बार इन शंखों, मछलियों और घोंघो को किनारे जमीन पर छोड़ आने को कहता है ताकि वे मर जाएँ, पर मैं ऐसा नहीं होने देता. इन्हें फिर से समुद्र में फेंक देता हूँ.’ 

व्यक्ति बोला, ‘पर यह तो समुद्र का क्रम है जो हमेशा चलता रहेगा. लहरे उठेंगी, गिरेंगी और ऐसे में कुछ जीव उनके साथ किनारें की जमीन पर आयेंगे और यहीं रह जायेंगे. तुम्हारी इस चिंता से क्या फर्क पड़ जाएगा?’ 

राजन ने तभी मुट्ठी भर मछलियों, शंख आदि को पानी में फेंका और पानी में मिलते ही उनमें मानों जान आ गयी.

तब उसने व्यक्ति से कहा, ‘आपने देखा इस छोटे से कदम से उनके जीवन में कितना बड़ा अंतर आया है.’ यह कहकर राजन फिर अपने काम में लग गया और वह व्यक्ति सर झुकाकर चला गया ~ अज्ञात 

शिक्षा : अच्छे कामों के लिए छोटे-छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण होते हैं. इसलिए रास्तें में आने वाली बाधाओं की चिंता नहीं करनी चाहिए. 

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Sunday, December 14, 2014

Poem on Spring Season in Hindi


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मन गाये बसंत का राग

हाँ! 
मैंने उतार दिए हैं परेशानियों के केंचुल 
कर रही हूँ सामना मुश्किलों का हर पल 
चिंताओं के पत्ते झरा दिए हैं 
भय के सब बीज जला दिए हैं.

अब पतझड़ में भी मैं 
आशाओं के गीत गा सकती हूँ 
फूल खिले ना खिले 
बसंत का उत्सव मना सकती हूँ. 

क्योंकि,
बाहर के बसंत से पहले 
भीतर एक बसंत का खिलना जरुरी है 
चाहे पसरा हो कितना भी सन्नाटा 
पर सृजन बिना ये जिंदगी अधूरी है.

चाहे फूल ना खिलें सरसों के मेरे आँगन में 
पर सौन्दर्य को विस्तार तो पाना है 
चाहे सूख चूका हो मेरे लिए हर सरोवर 
पर प्रेम का झरना मुझे बहाना है. 

चाहे कोहरे की धुंध कभी हटे ना हटे 
एक आग को भीतर जलना ही होगा 
ना हो कोयल, तितलियाँ और भौंरे कहीं 
पर ह्रदय के गीतों को मचलना ही होगा.

बेरंग और उदास जीवन में भी 
रंगों का सृजन हो सकता है 
जीवन हो चाहे दोधारी तलवार 
पर सपनों का वरण हो सकता है. 

तो क्यों ना 
भर दें अपने तन और मन को
हम बासंती बहार से 
नफरत और घृणा को जीतें 
प्रेम की फुहार से.

सर्दी की ठिठुरन हो चाहे 
गर्मी की हो भीषण आग 
पतझड़ के मौसम में भी 
मन गाये बसंत का राग. 

लाल, नीले, हरे और पीले 
रंग सब खिलते रहें 
सपनों की बुझी चिताओं में भी 
बीज अंकुरण के मिलते रहें.

By Monika Jain ‘पंछी’

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How to Make Natural Colours for Holi


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How to Make Natural Colours for Holi

होली के अवसर पर बाजार में मिलने वाले कृत्रिम रंगों में काले रंग में लेड ऑक्साइड, लाल रंग में मरकरी सल्फाइड, सिल्वर रंग में एल्युमीनियम ब्रोमाइड, हरे रंग में कॉपर सल्फेट और नीले रंग में प्रुसियन ब्लू आदि पदार्थ पाए जाते हैं. ये पदार्थ चर्म रोगों, एलर्जी और आँखों की रोशनी के लिए भी नुकसानदायक है. अस्थमा के मरीज के लिए या डस्ट एलर्जी से परेशान लोगों के लिए अबीर, गुलाल या सूखे रंग बेहद नुकसानदायक है. इन सभी नुकसानों से बचने के लिए हम घर पर भी हर्बल प्राकृतिक रंग बना सकते हैं, जो त्वचा के लिए फायदेमंद भी होते हैं और आसानी से उतारे भी जा सकते हैं.

लाल रंग : 
  • दो चम्मच लाल चंदन (रक्त चंदन) को एक लीटर पानी में उबालने पर और ठंडा करने पर हमें औषधीय गुणों से युक्त लाल रंग मिलता है. 
  • बुरांश के फूलों को रात भर पानी में भिगोकर सुर्ख लाल रंग बनाया जा सकता है.
  • गुड़हल के फूलों को सुखाकर और पीसकर लाल रंग बनाया जा सकता है.
  • मूली और अनार के मिश्रण से लाल रंग तैयार किया जा सकता है.
  • केसर उबालकर भी लाल रंग बनाया जा सकता है.
  • इसी तरह लाल जवा फूल, टमाटर, पलाश या ढाक के फूल, मांदर और कुमकुम से भी लाल रंग बनाया जा सकता है. 
गुलाबी रंग : 
  • दस-बारह प्याज के छिलकों को आधा लीटर पानी में रात भर के लिए भिगोकर रख दें. सुबह छिलकों को हटा दें. गुलाबी रंग तैयार हो जाएगा.
  • चुकंदर को कद्दूकस कर एक लीटर पानी में उबालें और पूरी रात भीगने के लिए छोड़ दें. गहरा गुलाबी रंग बन जाएगा. 
  • कचनार के फूलों को पानी में रात भर भिगोकर रखने या फिर उबालने से भी गुलाबी रंग बनाया जा सकता है. 
नीला रंग : 
  • केरल में मुख्य रूप से पाए जाने वाले नीले रंग के गुड़हल के फूल को सुखाकर व पीसकर नीला रंग बनाया जा सकता है. 
  • इसी तरह नील, अंगूर, बेरी, जकारंडा से नीला रंग बनाया जा सकता है. 
पीला रंग :
  • अमलतास और गेंदा के फूलों को सुखाकर और पीसकर भी पीला रंग बना सकते हैं. 
  • चार चम्मच बेसन में दो चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पीला रंग बनाया जा सकता है. 
नारंगी रंग : 
  • नींबू और हल्दी को मिलाकर नारंगी रंग बना सकते हैं. 
हरा रंग :
  • मेहन्दी की पत्तियों को सुखाकर उसका बारीक चूर्ण बनायें. इसमें आवश्यकतानुसार आटा या मैदा मिला लें. हरा रंग बन जाएगा. 
  • गुलमोहर की पत्तियों को सुखाकर, उसका महीन चूर्ण बनाकर, संतुलित मात्रा में मैदा या आटा मिलाकर हरा रंग बनाया जा सकता है.
  • पालक को पीसकर भी हरा रंग बनाया जा सकता है.
भूरा रंग : 
  • चाय की पत्तियों को पानी में उबालकर भूरा रंग बनाया जा सकता है. 
काला रंग :
  • काले अंगूर, आंवला, चारकोल आदि से काला व मटमैला रंग बना सकते हैं. 

Have a safe and happy Holi with these natural, organic, herbal, eco-friendly colours. 


Wednesday, December 3, 2014

Story on Hard Work in Hindi


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श्रम का महत्व 

एक गाँव में चन्दन नाम का एक व्यापारी था. वह एक पुत्र और एक पुत्री का पिता था. उसका पुत्र बहुत ही गैर जिम्मेदार और आलसी था. वह हमेशा बस दोस्तों के साथ मौज-मस्ती में लगा रहता था. चन्दन चाहता था कि वह मेहनती बनें पर वह पिता की एक नहीं सुनता. इस वजह से पिता बहुत परेशान रहता था. 

एक दिन चन्दन ने अपने पुत्र को बुलाया और कहा, ‘ आज तुम्हें खाना तभी मिलेगा जब तुम कुछ कमाकर लाओगे, वरना आज तुम्हें भूखा ही रहना होगा.’ पुत्र यह सुनकर माँ के पास जाकर रोने लगा. पुत्र को रोता देखकर माँ का दिल पिघल गया. माँ ने उसे 100 रुपये दिए और कहा कि पिता जब पूछे तो यह दे देना. 

शाम में जब चन्दन ने पुत्र से कमाई के बारे में पूछा तो पुत्र ने वह 100 रुपये का नोट पिता को दे दिया. पिता ने वह नोट पुत्र को कुएँ में डालकर आने के लिए कहा. पुत्र आराम से वह नोट कुएँ में डालकर आ गया. 

चन्दन ने अपनी पत्नी को मायके भेज दिया और पुत्र को अगले दिन फिर कुछ कमाकर लाने के लिए कहा. इस बार पुत्र अपनी बहन के पास गया और रोते-रोते सारी बात बताई. बहन ने भी उसे 50 रुपये दे दिए. शाम को चन्दन के पूछने पर पुत्र ने 50 रुपये दिखा दिए. चन्दन सब समझ गया. उसने पुत्र को वे 50 रुपये भी कुएँ में डाल आने को कहा और पुत्र ने बिना किसी सवाल के ऐसा ही किया. चन्दन ने अगले दिन बेटी को भी ससुराल भेज दिया और फिर से पुत्र को कुछ कमाकर लाने के लिए कहा. 

पुत्र के पास अब कोई चारा नहीं था. वह बाजार गया और एक जगह जाकर बैठ गया. एक सेठ को कुछ लकड़ियाँ अपने घर पहुँचानी थी. पुत्र के पूछने पर वह सेठ उसे लकड़ियाँ घर पहुँचाने के बदले 10 रुपये देने को तैयार हो गया. पुत्र लकड़ियाँ लेकर चलने लगा. उसके हाथ छिल गए और पैरों में भयंकर दर्द होने लगा. शाम को थका हारा वह घर पहुँचा और पिता को वे 10 रुपये दिए. पिता ने फिर उन रुपयों को कुएँ में डालकर आने के लिए कहा. पुत्र को इस बार गुस्सा आया और उसने कहा, ‘ ये रुपये मैंने इतनी मेहनत से कमायें हैं और आप इन्हें कुएँ में डालकर आने की कह रहें हैं ?’ 

चन्दन ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘ बेटा, मैं यही तो तुम्हें सिखाना चाहता था. तुमने 150 रुपये बड़ी आसानी से कुएँ में फेंक दिए और ये 10 रुपये फेंकने में तुम्हें कष्ट हो रहा है क्योंकि ये तुम्हारी मेहनत की कमाई है. ‘ चन्दन ने अपनी दूकान की चाबी पुत्र के हाथ में दी और कहा, ‘अब तुम दुकान सँभालने लायक हो गए हो क्योंकि अब तुम श्रम का महत्व जान चुके हो.’ बेटे ने पिता के पैर छुए तो पिता ने बेटे को गले से लगा लिया. 

Note : The above hindi story about hard work is not my own creation. I read it somewhere and sharing it here.

Monday, December 1, 2014

Essay on Happiness in Hindi


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सच्ची ख़ुशी 

एक दिन सवेरे जब जॉगिंग के लिए घर से बाहर निकली तो कुछ ही दूरी पर नगरपालिका द्वारा रखे गये कचरे के पात्र के पास कुछ छोटे-छोटे ग़रीब बच्चों को इकठ्ठा देखा. वो बच्चे उस कचरे के ढ़ेर में से कुछ प्लास्टिक की थैलियाँ और कुछ दूसरा सामान चुन-चुन कर अपने पास रखे एक बोरी के थैले में इकठ्ठा कर रहे थे. बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है. पर देश के ये भावी कर्णधार जिन्हें विद्यालय की पोशाक पहन अभी अपनी कक्षा में होना चाहिए था, वो नन्हें-मुन्हें कूड़े-कचरे के ढ़ेर में अपना भविष्य तलाश कर रहे थे.

दिल पसीज सा गया और शर्मिंदगी भी महसूस हुई क्योंकि हम सच्चे अर्थों में कुछ भी तो नहीं करते समाज के इस तबके के लिए. शादी, पार्टीस और अन्य समारोह में कितना पैसा बहाते हैं, सिर्फ़ खुशी के कुछ पल पाने के लिए. पर ये खुशी उस खुशी के सामने तुच्छ है, गोण है जो किसी ग़रीब को एक वक्त का खाना खिलाने से मिल सकती है. उसके अधनंगे तन को कुछ कपड़ों से ढकने पर मिल सकती है और सबसे ज़्यादा उसे स्वाभिमान के साथ जीवन जीने का पथ दिखा कर मिल सकती है. ये बाते सिर्फ़ कहने के लिए नहीं कह रही मैं. जीवन में सच में इसे अनुभव भी किया है.

कुछ महीनों पहले की ही बात है, जब मैं घर के कुछ कामों में व्यस्त थी. मुझे देखकर बाहर खड़ी दो ग़रीब लड़कियाँ दीदी-दीदी पुकारने लगी. खाना बना नहीं था अभी, पर नज़रे उनके फटे कपड़ों पे पड़ी. भीतर गयी और उनके आ सकने लायक कुछ कपड़ें निकाल लाई. उन्हें दिए और फिर से अपने काम में लग गयी. कमरे की खिड़की से सहसा उन बच्चियों पर नज़र पड़ी. वे बार बार चहचहाते हुए उन कपड़ों को खुद पे सजाकर देख रही थी. उनकी मुस्कुराहट देखकर मेरे चहरे पर भी मुस्कुराहट आ गयी. कुछ देर बाद बाहर से तेज आवाज़ आई, दीदी ठंकु. वो मुझे थैंक्यू कहना चाहती थी पर उनके इन आभार और खुशी भरे शब्दों में कितनी मासूमियत थी. उनके ये शब्द दिल को छू गये.

मैं तत्काल बाहर गयी. मुझे देख हाथ हिला कर वे मुझे अलविदा कर रही थी. मुस्कुराते हुए मैनें भी अपना हाथ हिला दिया. सोचने लगी कुछ भी तो नहीं किया था मैनें. कुछ ऐसे कपड़े जो शायद किसी के काम के भी नहीं थे, वे ही तो दिए थे उन्हें. पर पता नहीं क्यों उस दिन उन दोनों बच्चियों के चहरे की खुशी पूरे दिन मेरे चहरे पर मुस्कुराती रही. सोचा कि अगर सच्चे अर्थों में किसी के लिए कुछ करूँगी तो कितना सुकून और कितनी खुशी मिलेगी. उस दिन जाना की सच्ची खुशी क्या होती है. अक्सर कोई अच्छा कार्य करना हम अपना दायित्व मानते हैं, पर मुझे लगता है कि ज़रूरतमंद की मदद के लिए किया गया अच्छा कार्य हमारा दायित्व नहीं हमारा अधिकार है. सच्चे अर्थों में ख़ुशी पाने का अधिकार.

By Monika Jain 'पंछी'

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Sunday, November 30, 2014

Poem on Wait in Hindi


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तू आएगा एक दिन 

धरती की प्यास बुझाने को
रिमझिम बादल तो बरसे हैं 
मेरे दिल की बंजर जमीन पर 
जाने कबसे तरसे है.
तू आएगा एक दिन पक्का,
इस दिल की प्यास बुझाने को 
बस जीती हूँ एक दिन तेरी ही 
बाहों में मर जाने को. 

ये सर्दी की जो रातें हैं 
होंठों पे जमी कुछ बातें हैं
कितना कुछ कहने को है पर 
बन धुआँ शब्द खो जाते हैं. 
तू आएगा एक दिन पक्का 
इन लफ्ज़ों को पिघलाने को 
बस जीती हूँ एक दिन तेरी ही 
बाहों में मर जाने को. 

ये गर्म हवा जब बहती है 
मेरी आहें भी संग रहती है 
आँखों से टपकती बूँदें भी 
बस नाम तेरा ही लेती है.
तू आएगा एक दिन पक्का 
इन बूंदों को पी जाने को 
बस जीती हूँ एक दिन तेरी ही 
बाहों में मर जाने को. 

तेरी ख़ामोशी खलती है 
पर आग अभी भी जलती है 
मेरे ख़्वाबों की दुनिया में 
उम्मीद अभी भी पलती है 
तू आएगा एक दिन पक्का 
सब सपने सच कर जाने को 
बस जीती हूँ एक दिन तेरी ही 
बाहों में मर जाने को. 

By Monika Jain ‘पंछी’

It’s very hard to accept that the person you love is no more in your life. You keep waiting for him/her. You always have a hope that one day he/she will come to you to fulfill your life with happiness and love.

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Thursday, November 27, 2014

Poem on False Masculinity in Hindi


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कैसी ये मर्दानगी ?

मैं मर्द अति बलशाली,
खुद को बहुत बलवान बुलाता हूँ
कलाई पर बहन जब बांधती है राखी,
तो उसकी रक्षा की कसमें खाता हूँ
पर पत्नी की एक छोटी सी भी गलती,
मैं सह नहीं पाता हूँ
निःसंकोच उस पर हाथ उठाता हूँ
अरे ! मर्द हूँ, 
इस तरह अपनी मर्दानगी दिखाता हूँ
मैं मर्द अति बलशाली, 
खुद को बहुत बलवान बुलाता हूँ.

मेरी बहन की तरफ कोई आंख उठा कर तो देखे, 
मैं सबसे बड़ा गुंडा बन जाता हूँ
बेझिझक अपराध फैलाता हूँ 
पर सड़क पर चल रही लड़की को देखकर, 
अपने मनचले दिल को रोक नहीं पाता हूँ
उस पर अश्लील ताने कसता हूँ, सीटियाँ बजाता हूँ
शर्म लिहाज़ के सारे पर्दे कहीं छोड़ आता हूँ
मैं मर्द अति बलशाली, 
खुद को बहुत बलवान बुलाता हूँ.

और गर कोई मेरा दिल तोड़ दे 
या मेरे प्रेम प्रस्ताव को कर दे मना,
क्रोध के मैं परवान चढ़ जाता हूँ
एसिड वार की आग उगलता हूँ 
उसको अपनी हवस का शिकार बनाता हूँ 
और वैसे भी लड़की तो एक वस्तु है 
और लड़कों के हर पाप माफ़ हैं,
यही बात मैं मंच पर चढ़कर माइक पर चिल्लाता हूँ
अरे भई! नेता हूँ, 
अपने पद की गरिमा भूल जाता हूँ
मैं मर्द अति बलशाली, 

खुद को बहुत बलवान बुलाता हूँ.
पर एक बात मैं अक्सर भूल जाता हूँ
इस कड़वी सच्चाई को झुठलाता हूँ
कि मर्द बनने की नाकाम कोशिश में,
मैं अपनी आत्मा का सौदा करता हूँ
अपनी भावनाओं का खून कर, हर बार मैं मरता हूँ
संवेदनहीन मैं, शायद एक मर्द तो बन जाता हूँ
पर अक्सर मैं एक इंसान बनना भूल जाता हूँ
मैं मर्द अति बलशाली,
अक्सर एक इन्सान बनना भूल जाता हूँ.

By Rishabh Goel
Kotdwar, Uttarakhand 


Thank you ‘Rishabh’ for sharing such a thought provoking poem about the false masculinity of a man.


Tuesday, November 25, 2014

Poem on Desire in Hindi


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मेरी चाह 

शब्दों को नहीं आँखों को पढ़ना चाहती हूँ
लफ़्ज़ों को नहीं ख़ामोशी सुनना चाहती हूँ
हर कोई खुली किताब नहीं होता
मैं तो बंद किताबें पढ़ना चाहती हूँ.

ख़ामोश सवालों को पढ़ना चाहती हूँ
अनकहे ख़यालों को सुनना चाहती हूँ
सच होते हुए सपनों को नहीं
मैं तो अधूरे ख्वाबों को पढ़ना चाहती हूँ.

चेहरे की सच्चाई पढ़ना चाहती हूँ
बातों की गहराई सुनना चाहती हूँ
हर किसी का दिल पाक़ नहीं होता
मैं तो नापाक दिलों के इरादें पढ़ना चाहती हूँ.

दबी हुई आवाज़ सुनना चाहती हूँ
रोके गये आगाज़ सुनना चाहती हूँ
थिरकते कदमों की ताल नहीं
मैं तो तड़पते दिलों का हाल सुनना चाहती हूँ.

By Monika Jain 'पंछी' 

Lots of things remain unrevealed in this world. Lots of dreams are unfulfilled. Lots of voices are suppressed. There are many eyes questioning about the incidents happening around the world without speaking a single word. People wear mask to hide their reality. They carry smile, gentleness, respect, humility and seems very decent, but as soon as they get chance they execute their evil intentions. Here is a wish to read eyes, a wish to listen silence, a wish to hear suppressed screams, a wish to read unfulfilled dreams, a wish to feel, understand and share the pain of broken hearts and a wish to understand the evil intentions too.

How is this hindi poem about a desire to see and feel all the veiled things ? Feel free to share your views via comments. 

Hindi Kahani for Children


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कहानी : चूंचूं

छत पर सूखे कपड़े लेने गयी तो देखा मोज़े की जोड़ी में से एक मोज़ा गायब था. इधर-उधर तलाश किया पर कहीं भी नज़र नहीं आया. अगले दिन कुछ सामान निकालने के लिए छत पर बने स्टोर को खोला तो अचानक एक गिलहरी फुदकती हुई बाहर निकली. एक पल के लिए मैं चौंक उठी. दूजे ही पल एक पुराने टायर के बीचोंबीच चूं-चूं की आवाज़ करते गिलहरी के चार-पांच नन्हें बच्चे दिखाई पड़े. उन्हीं बच्चों के नीचे मेरा कल का खोया मोज़ा, कुछ दिन पहले खोया एक रुमाल और छोटी-छोटी रंग-बिरंगी कपड़ों की कई कतरने पड़ी थी. उन नन्हें मासूमों को देखकर एक पल के लिए प्यार उमड़ आया पर तभी गिलहरी से अपनी सालों पुरानी दुश्मनी को याद कर मैंने मुंह फेर लिया.

बात तब की है जब मैं पांचवी कक्षा में पढ़ती थी. सर्दी की छुट्टियाँ थी. रोज की तरह मैं सड़क पर हमउम्र बच्चों के साथ खेल रही थी. खेलते-खेलते पानी की प्यास लगी तो दौड़कर घर आ गयी. बरामदे से गुजरते हुए पानी के टैंक के पास कुछ अजीब सा काला-काला नज़र आया. पास गयी तो देखा चिड़िया का एक नन्हा गुलाबी बच्चा जिसके पंख भी नहीं आये थे, ढेर सारी चींटियों से गिरा पड़ा था. शायद ऊपर रोशनदान में बने घोंसले से गिर गया था.

एक पल को मुझे लगा इतना ऊपर से गिरने और इतनी सारी चींटियों के चिपकने से यह तो मर चुका होगा और यह सोचकर मैं उदास हो गयी पर अगले ही पल उस चूजे की हल्की सी हलचल से मन में आशा की एक किरण जागी और मैंने किसी भी तरह उस बच्चे को बचाने के जतन करने शुरू कर दिए.

सबसे पहले फूंक मार-मारकर कई सारी चींटियों को उसके नाजुक गुलाबी शरीर से हटाया. पर इसके बाद भी कुछ चींटियाँ उस पर जस की तस चिपकी हुई थी. मैं भीतर दौड़कर रुई लेकर आई और रुई की मदद से उसके शरीर पर से बाकी चींटियाँ हटाने लगी. लगभग ½ घंटे की मशक्कत के बाद मैं उसके शरीर पर से सारी चींटियाँ हटाने में कामयाब हो गयी. उसके बाद भीतर से दो गत्ते लायी और डरते-कांपते हाथों से उस चूजे को एक गत्ते की मदद से दूसरे गत्ते पर लिया और धीरे-धीरे चलते हुए उसे घर के भीतर ले आई.

उस चूजे की हालत बहुत ख़राब थी. वह एकदम दुबका हुआ था. शायद उसके दिमाग में अभी भी चींटियों का आतंक छाया होगा और उसे दर्द भी तो हो रहा होगा यही सोचते-सोचते मैंने उसे अपने कमरे की स्टडी टेबल पर एक रोयेदार नरम मोटा रुमाल बिछाकर उस पर रख दिया.

मैं रसोई में गयी और रुई का फाहा और एक कटोरी में दूध लेकर आई. डरते-कांपते हाथों से मैं दूध से भरा रुई का फाहा उस चूजे के मुंह के पास ले गयी. लेकिन वह तो डर के मारे टस से मस नहीं हो रहा था. हाथों की कंपकंपी की वजह से दूध कभी दायें गिरता कभी बाएं. कभी इत्तफाकन उसकी चोंच पर गिरकर दोनों और लुढ़क जाता. पर उसने दूध पीने में रूचि नहीं दिखाई. थक हार कर थोड़ी देर मैं पास ही बिस्तर पर बैठ गयी. फिर कुछ देर बाद रसोई से एक छोटा सा चम्मच लेकर आई और फिर उसे दूध पिलाने की कोशिश करने लगी. कई बार की नाकामयाबियों के बाद एक बार अचानक उसने इतना बड़ा मुंह खोला कि डर के मारे मेरे हाथों से दूध का चम्मच छिटक कर नीचे गिर गया. चम्मच की आवाज़ से कुछ देर वो भी सहम गया पर इसके बाद जब भी मैं दूध से भरा चम्मच उसके पास ले जाती वह धीरे-धीरे अपनी चोंच में भरकर दूध पीने लगता.

मेरे लिए तो यह खेल-तमाशे सा बन गया था. थोड़ी-थोड़ी देर में मैं कभी दूध, कभी पानी तो कभी पानी में आटा गोलकर उसे खिलाने को लाने लगी. अब उसे मुझसे कोई डर नहीं था. मुझे भी उसमें अपना दोस्त नज़र आने लगा और मैं प्यार से उसे चूंचूं कहकर बुलाने लगी. पूरे दिन उसी में लगे रहने के बाद रात में जब सोने के लिए माँ की डांट पड़ी, तब जाकर उसे स्टडी टेबल पर रखकर मैं सो गयी.

सुबह उठी तो सबसे पहले नज़र स्टडी टेबल पर पड़ी. वहां जगह-जगह चूंचूं की बीठ नज़र आ रही थी पर चूंचूं कहीं नहीं दिख रहा था. मैं घबरा कर उठ खड़ी हुई और टेबल के ऊपर-नीचे, दायें-बाएं सब जगह चूंचूं को तलाश करने लगी. तभी नज़र पास ही लगे दरवाजे के पीछे पड़ी जहाँ चूंचूं कोने में दुबका बैठा था. एक गत्ते में उठाकर मैं उसे बाहर खुले आँगन में ले आई. कुछ देर तक यह सोचकर वहां उसे रखा कि उसकी माँ उसे तलाश रही होगी और वहाँ आ जायेगी. पर काफी देर इंतजार के बाद भी कोई चिड़िया नज़र नहीं आई.

पापा कुछ दिन बाहर गए हुए थे. मैंने यही सोचा कि जब पापा वापस आयेंगे तो इसे घोंसले में रख देंगे ताकि यह अपनी माँ से भी मिल पायेगा और यह सोचते-सोचते मैं फिर उसे कुछ खिलाने-पिलाने के उपक्रम करने लगी. खिलाने-पिलाने के अपने इस खेल में अचानक चूंचूं पर कुछ दूध गिर गया. वह थोड़ा भीग गया. सर्दियों के दिन थे. खुद भी धूप खाने और चूंचूं को भी थोड़ी सुबह की गुनगुनी धूप खिलाने की सोचकर मैं उसे छत पर ले आई. छत पर मैंने उसे बीच में बनी एक दीवार पर रख दिया और खुद टहलने लगी.

कुछ देर बाद सामने से एक गिलहरी आते हुए नज़र आई. गिलहरी से चूंचूं को किसी भी ख़तरे से मैं अनभिज्ञ थी इसलिए मैंने गिलहरी को नहीं भगाया. पर यह क्या, पलक झपकते ही वह गिलहरी सर्र सी दौड़ती हुई चूंचूं के पास आई और उसे मुंह में दबाकर उसी तेजी से दौड़ गयी. मेरी आँखें और मुंह खुला का खुला रह गया. मैं तेज दौड़कर गिलहरी के पीछे भागी पर कुछ ही देर में वह जाने कहाँ गायब हो गयी. नीचे आकर पीछे गली में जिस ओर गिलहरी गयी थी मैंने चूंचूं को बहुत तलाशा पर चूंचूं मुझे कहीं भी नज़र नहीं आया. मेरा गला रुंध गया और आँखों में आंसू भर आये. मुझे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था. बार-बार एक ही ख़याल दिमाग में आ रहा था कि काश ! मैं चूंचूं को लेकर छत पर ना जाती. उस गिलहरी पर भी बहुत गुस्सा आया. पूरा दिन मैं बहुत उदास रही. अकेले अपने कमरे मैं बैठी रही. आँखें बार-बार कमरे में चूंचूं को तलाश रही थी. सुबह जो हुआ उस पर विश्वास नहीं हो रहा था. रात में सोते समय भी बार-बार नज़रे स्टडी टेबल पर जा रही थी, जिसे चूंचूं ने अपनी बीठ से कितना गन्दा कर दिया था. अचानक नज़र फिर दरवाजे के पीछे गयी, पर चूंचूं वहां नहीं था. मैंने करवट बदली और आँखों से आंसू लुढ़क पड़े.

आज उन नन्हें-मुन्हें गिलहरी के बच्चों को देख सालों पुरानी बात याद आ गयी. गिलहरी से सालों पुरानी उस नाराजगी की वजह से मुंह तो फेर लिया पर उनकी चूं-चूं की आवाज़ सुन ज्यादा देर उन्हें देखे बिना नहीं रह पायी. सोचा, क्या पता इन्हीं में से कोई चूंचूं हो जो आज फिर मुझसे मिलने आया हो और इस तरह सालों बाद आज फिर मेरी गिलहरी से दोस्ती हो गयी. 

By Monika Jain ‘पंछी’

Monday, November 24, 2014

Poem on Sunshine in Hindi


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वो धूप का टुकड़ा

बड़ी दिलचस्प फ़ितरत का था 
वो धूप का टुकड़ा.

किसी कांपती सर्दी की सर्द सुबह 
मैंने धूप का एक मासूम टुकड़ा 
छील कर देखा था. 
उबासी में भीगी आँखें 
गुनगुनी रोशनी के कुछ कतरे लिये 
बड़ी दिलचस्प फ़ितरत का था 
वो धूप का टुकड़ा.

एक बड़े सफ़र की दास्तान लिये 
उसका पीला रंग 
हथेलियों पर उतरने लगा था.

मेरी हथेलियों में होकर भी 
आज़ाद सा 
उबासी में भींगा 
मगर ताजा सा 
दिन भर के सफ़र के लिए 
दूर क्षितिज को तकता 
खुद को तैयार करता हुआ 
बड़ी दिलचस्प फ़ितरत का था 
वो धूप का टुकड़ा.

बरबस ही 
मैंने पूछ लिया था उससे, 
‘रोज एक ही रहगुजर से 
एक ही तरह गुजर कर 
थकते नहीं हो तुम ?
कभी थकते भी हो क्या ??’
वो मुस्कुराया और बोला, 
‘सारे दिन एक से कहाँ हैं ?
फर्क है, 
तुम्हारी और मेरी ज़िन्दगी में.

तुम अलग-अलग रास्तों से 
एक मंज़िल के लिये चलते हो 
मैं रोज इसी रास्ते 
कितनी जुदा मंज़िलें नाप जाता हूँ’,
कहकर आगे बढ़ गया वो.

उसके लफ़्ज़ों की गर्मी 
और लहजे का पीलापन 
मेरी हथेलियों पर 
अब भी बिखरा था. 

सचमुच,
बड़ी दिलचस्प फ़ितरत का था 
वो धूप का टुकड़ा.

By Malendra Kumar ‘मलेन्द्र कुमार’

Thank you ‘Malendra’ for sharing such a beautiful poem about the piece of sunshine. 

How is this hindi poem about the piece of sunshine ? Feel free to share your views via comments. 


Sunday, November 23, 2014

Promise Day Poem in Hindi


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क्यों कुछ लोग….

कईयों के हिस्से आयी 
टूटे वादों की किरचों को देख
सोचती हूँ -

क्यों कुछ लोग बिन सोचे समझे 
अक्सर वादों पर वादे कर जाते हैं 
कैसे किसी के जीवन और सपनों को 
इतना हलके से ले पाते हैं.

वे क्यों नहीं समझ पाते,
हर एक वादे से जुड़ती है 
कुछ मासूम उम्मीदें 
ना जाने कितने ख़्वाब सजाती है 
हर रात ये मीठी नींदे.

पर इन नींदों को क्या पता, 
एक दिन ये कुछ ऐसे उड़ जानी है
इनकी बनायी ख़्वाबों की दुनिया 
मिट्टी के घरोंदों सी 
बस मिट्टी में मिल जानी है. 

तो क्यों कुछ लोग बिना सोचे समझे 
अक्सर वादों पर वादे कर जाते हैं 
कैसे किसी की सारी दुनिया 
फ़कत उदासी से भर जाते हैं.

वे क्यों नहीं समझ पाते,
टूटे वादों की किरचों से 
आती है विश्वास के दर्पण पर
ना जाने कितनी खरोंचें  
जिसका टूटा हो दिल, 
वो फिर से प्यार करने की 
भला कैसे सोचे ? 

By Monika Jain ‘पंछी’ 

People eager to make promises are often irresponsible. They are careless to think that a broken promise can break a person too. Dreams and expectations attached with a promise are fully shattered when a promise turns into a fake bubble. One should not make any empty promise that he/she is not going to keep. One should also expect less from others and trust more in himself/herself. And the most important thing, promises should not be made, they should only be fulfilled. 

How is this hindi poem about promise ? Feel free to share your views via comments. 

Thursday, November 20, 2014

Berries Benefits in Hindi


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Berries Health Benefits
  • देखने में छोटे, आसानी और सहजता से उपलब्ध होने वाले लोकप्रिय फल बेर को गरीबों का फल कहा जाता है क्योंकि इसमें सेब जितने ही गुण पाए जाते हैं.
  • पका हुआ बेर बहुत मीठा, रसधार और पौष्टिक होता है. बेर से टॉफी, जैम और अचार भी बनाया जाता है. 
  • बेर की पत्तियों में कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, सोडियम, क्लोरीन, गंधक आदि तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. विटामिन सी, बी और शर्करा भी इसमें अच्छी मात्रा में पायी जाती है.
  • उल्टी तथा गर्भावस्था में पेट में होने वाले दर्द में आराम के लिए बेर का प्रयोग किया जाता है.
  • बेर की छाल का प्रयोग अतिसार और दस्त में किया जाता है. 
  • बेर और नीम के पत्ते घिसकर लगाने से बालों का झड़ना कम हो जाता है. 
  • खुश्की और थकान दूर करने में भी बेर फायदेमंद है. 
  • गठिया और वात जैसे रोगों में अल्प मात्रा में बेर की जड़ों के रस का सेवन लाभदायक रहता है. 
  • बेर के नियमित सेवन से अस्थमा और मसूड़ों के घाव भरने में राहत मिलती है. 
  • छाछ के साथ बेर का सेवन करने से घबराहट, उल्टी और पेट दर्द की समस्या में आराम मिलता है.
  • तेल के साथ बेर की पत्तियों की लुग्दी बनाकर शरीर पर लगाने से लीवर सम्बन्धी रोगों में फायदा होता है. 
  • सूखे बेरों के सेवन से कब्ज और पेट सम्बन्धी पुराने रोग दूर होते हैं. 
  • नमक और काली मिर्च के साथ बेर का सेवन करने से अपच की समस्या दूर होती है. 
  • बुखार और फेफड़ें सम्बन्धी रोगों में बेर का जूस पीना फायदेमंद होता है. 
  • त्वचा के कटने या घाव हो जाने पर बेर का गूदा घिसकर लगाने से राहत मिलती है.
  • बेर के पेड़ का तना मजबूत होता है, जिससे नाव, लकड़ी के औजार और खिलौने बनाये जाते हैं. 
  • बेर की पत्तियाँ गाय और बकरियों के लिए उत्तम आहार है.
Reference : Newspapers and Magazines

Note : Consult your doctor before using any remedy stated here. If you are also aware about any other health benefits of Berries then feel free to submit here.

Saturday, November 15, 2014

Poem on Nari Shakti in Hindi


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हे स्त्री ! इस जीवन का आधार तुम

हे स्त्री ! इस जीवन का आधार तुम
स्वयं में ही सकल सृष्टि का सार तुम
हे स्त्री! इस जीवन का आधार तुम.

तुम वृहद् हो इस संपन्न धरा-सी
तुम शीतल हो निशा के चंद्रमा-सी
तुम पर्याय समस्त पुष्पित प्रस्फुटन का
तुम चंचल हो शोख नदी की धारा-सी.

हो स्वयं ही किसी भवसागर का पार तुम
हे स्त्री ! इस जीवन का आधार तुम.

तुम्हारे ह्रदय में तदर्थ करुणा
निश्चेष्ट है यह सकल तृष्णा
संध्या की पवित्र निस्तब्धता हो तुम
परे है तुमसे क्रोध, ईर्ष्या, घृणा.

निर्मल, निश्छल-सी खुद में एक संसार तुम
हे स्त्री ! इस जीवन का आधार तुम.

धरा पर वात्सल्य का व्यक्तित्व तुमसे
मेरा व समग्र विश्व का अस्तित्व तुमसे
तुमसे ही एकाकी अर्धचंद्र की शीतलता
जुड़ा है सृष्टि के वहन का दायित्व तुमसे.

समस्त समर्थ मर्यादा का उद्गार तुम
हे स्त्री ! इस जीवन का आधार तुम.

कम होगा गान तुम्हारा कंपित स्वर से
आपूरित है जग तुमसे ममता के वर से
शारदीय प्रभात, मध्यनिशा, अष्टप्रहर तुमसे
झंकृत है जीवन प्रवाह तुम्हारे सुर से.

दो आज कृतज्ञ होने का अधिकार तुम
स्वयं में ही सकल सृष्टि का सार तुम
हे स्त्री! इस जीवन का आधार तुम. 

By Malendra Kumar ‘मलेन्द्र’

Thank you ‘Malendra’ for sharing such a beautiful poem describing women in a true sense. 


How is this poem about ‘Nari Shakti’ ? Feel free to share your views via comments. 

Saturday, November 8, 2014

Banana Benefits in Hindi


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Banana Health Benefits
  • केला प्रोटीन, विटामिन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है. 
  • केले में शुगर और फाइबर के अतिरिक्त थाइमिन, नियासिन, पोटेशियम और फॉलिक एसिड भी होता है जो शरीर को तुरंत एनर्जी देता है.
  • केले में सोडियम, फोस्फोरस, विटामिन ए, बी, सी आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं. 
  • केले में पेक्टिन नामक फाइबर पाया जाता है जो घुलनशील होता है. पतले दुबले लोगों को पके हुए दो केलों का दूध के साथ नियमित रूप से सेवन करना चाहिए. इससे वजन बढ़ता है. खेलने-कूदने में थकान नहीं होती. दिमागी और शारीरिक विकास अच्छे से होता है.
  • केला रुचिकर, मीठा, शक्तिवर्धक, वीर्य और मांस की वृद्धि करने वाला और नेत्र दोषों को दूर करने वाला होता है. 
  • केला रक्तविकारों, कफ, वात और प्रदर दोषों को दूर करता है. 
  • प्रतिदिन एक केला खाने से कई तरह के रोग ठीक होते हैं.
  • यह पाचन तंत्र को शक्तिशाली बनाता है और पेट की बीमारियों को दूर करता है.
  • प्रतिदिन केले में शहद मिलाकर खाने से ह्रदय रोगों का ख़तरा कम हो जाता है. 
  • पेचिश की स्थिति में दही में केला मिलाकर सेवन करना चाहिए. इससे आराम मिलता है. 
  • दही में चीनी और पका हुआ केला मिलाकर खाने से पेट की जलन भी शांत होती है. 
  • अल्सर के रोग में कच्चे केले का सेवन लाभ पहुँचाता है. 
  • केले में पोटेशियम और मैग्नेशियम पाया जाता है जो रक्तचाप को नियंत्रित रखता है. पोटेशियम शरीर में जल संग्रहण की समस्या से निजात दिलाता है.
  • केले में आयरन भी पाया जाता है अतः इसके सेवन से हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है और खून की कमी दूर होती है.
  • केले में ट्रिप्टोफेन नामक एमिनो एसिड पाया जाता है जो तनाव को दूर करता है और मूड को रिलेक्स करता है.
  • केला कैंसर जैसे घातक रोगों से भी रक्षा करता है. 
  • यह कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने में भी सहायक है.
  • नकसीर की समस्या में केले को चीनी और दूध में मिलाकर सप्ताह भर तक सेवन करना चाहिए.
  • गर्भवती महिलाओं के लिए भी केले का सेवन फायदेमंद रहता है.
  • केला स्किन फ्रूट का काम करता है. केला खाने से त्वचा में ताजगी रहती है और केले का पेस्ट चेहरे पर लगाने से झुर्रियाँ दूर होती है.
Reference : Newspapers and Magazines

Note : Consult your doctor before using any remedy stated here. If you are also aware about any other health benefits of Banana then feel free to submit here.

Wednesday, November 5, 2014

Exam Preparation Tips in Hindi


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Exam Preparation Tips 
  • पढ़ाई शुरू करने से पहले टाइम टेबल बनाना और उसे फॉलो करना अच्छा रहता है. किसी दिन फॉलो ना भी हो पाए तो आगे का रूटीन नहीं बिगड़ने दें. 
  • परीक्षा प्रारंभ होने के कुछ महीने पहले से ही पढ़ना शुरू कर देना चाहिए. पहली बार पढ़ने से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है दोहरान करना इसलिए रिवीजन के लिए पर्याप्त समय दें. 
  • डर को अपने दिल और दिमाग से पूरी तरह निकाल दें. बस मेहनत करते रहें. याद रखें डर हमेशा आपकी ऊर्जा को कम करता है और जितना आप डरते हैं, चिंता करते हैं, नकारात्मक तनाव रखते हैं उतना ही असफलता के नजदीक जाते हैं. परीक्षा के लिए तनाव सिर्फ सकारात्मक रूप से होना चाहिए, जो पढ़ने को प्रेरित करता रहे. 
  • हर 45 मिनट से 1 घंटे के समय बाद खुद को थोड़ा सा ब्रेक देना चाहिए. इस ब्रेक में आप खुली जगह थोड़ा सा टहल सकते हैं. मनपसंद म्यूजिक सुन सकते हैं. ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए कुछ हैल्दी स्नैक्स ले सकते हैं. बस ब्रेक के समय को निश्चित करें और तरोताजा होकर फिर से पढ़ने बैठ जाएँ. 
  • जिन विषयों की परीक्षा बाद में है उन्हें पहले पढ़ना चाहिए ताकि आखिरी दिनों में वह विषय पढ़े जा सके जिनका एग्जाम सबसे पहले है. इसके लिए टाइम टेबल बना लें. 
  • पूर्व वर्षों के प्रश्न पत्रों को हल करना चाहिए. इससे परीक्षा का पैटर्न समझने में मदद मिलती है. 
  • स्टडी रूम व्यवस्थित होना चाहिए. कुर्सी आरामदायक होनी चाहिए. स्टडी टेबल पर अलार्म घड़ी रखी होनी चाहिए. स्टडी रूम में मोटिवेशनल चार्ट लगे होने चाहिए. रोशनी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए. 
  • जिस भी विषय की तैयारी कर रहे हैं, उससे सम्बंधित सारा स्टडी मटेरियल, पेन, पेंसिल, रबर, रफ़ नोटबुक, और भी जो कुछ जरुरी हो सब पास लेकर बैठना चाहिए ताकि पढ़ाई के बीच-बीच में बार-बार उठना ना पड़े और आप मन लगाकर गंभीरता से पढ़ सकें. 
  • अपने पास पानी की एक बोतल और गिलास लेकर बैठे और बीच-बीच में पानी पीते रहें. 
  • परीक्षा के दिनों में तनाव का माहौल रहता है. तनाव को दूर करने और एकाग्रता बढ़ाने के लिए योग, व्यायाम आदि का सहारा लें और पर्याप्त मात्रा में नींद लें. माता-पिता और परिवार के भावनात्मक संबल और प्यार की इस समय बच्चे को सबसे ज्यादा जरूरत होती है. अत: इन दिनों माता-पिता जितना संभव हो घर में रहें और बच्चे को बात-बात के लिए टोकने की बजाय ऐसा माहौल बनाये कि बच्चा निर्भय और तनाव रहित होकर अपने एग्जाम की तैयारी कर सकें. 
  • हर बच्चे की अलग-अलग क्षमता होती है और पढ़ने के अलग-अलग तरीके. बच्चों को बस इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कोर्स समय पर खत्म हो जाए और रिवीजन के लिए पर्याप्त समय रहे. 
  • परीक्षा के दिनों में ऐसा भोजन लिया जाना चाहिए जो सात्विक हो और पोषण से भरपूर हो. रात का खाना जल्दी खा लेना चाहिए. थोड़े-थोड़े अंतराल में पानी पीते रहना चाहिए. माँ को बच्चे के खाने-पीने का विशेष ध्यान इन दिनों रखना चाहिए. 
  • हाथ-पैर और मुंह धोकर पढ़ने बैठना चाहिए. 
  • खुश और तनावमुक्त रहें. सकारात्मक सोच रखें. परीक्षा को हौवा ना बनाये और आत्मविश्वास बनाये रखें. 
  • प्रतिदिन 7-8 घंटे की नींद जरुर लें. ताकि दिमाग तरोताजा रहे. 
  • परीक्षा के दिनों में मोबाइल, कंप्यूटर, वीडियो गेम्स जैसे सभी गैजेट्स को खुद से दूर रखें. जितना संभव हो इनका कम से कम उपयोग करें. मेसेज, चैटिंग इन सब चीजों को कुछ दिनों के लिए भूल जाएँ. 
  • एग्जाम किट में पेंसिल और पेन के साथ रंगबिरंगे जेल पेन भी रखें. ये आपको जवाब को हाईलाइट करने और चित्र बनाने में मदद करेंगे. 
  • एग्जाम हॉल में परीक्षा शुरू होने से 15 मिनट पहले पहुँचे. 
  • एग्जाम हॉल में बिना किसी डर के पूरी ऊर्जा और पॉजिटिव सोच के साथ प्रवेश करें. 
  • प्रश्न पत्र पढ़ने में जल्दबाजी ना करें. धैर्य से काम लें. पेपर और कॉपी पर लिखे गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ें. अगर कोई संदेह है तो टीचर से पूछ लें. 
  • साफ़-सुथरी राइटिंग में लिखने का प्रयास करें. ताकि परीक्षक को कॉपी पढ़ने में दिक्कत ना आये. कई बार गन्दी राइटिंग की वज़ह से भी नंबर कम आते हैं. 
  • प्रश्नों के उत्तर में चित्रों, आंकड़ों और रेखांकन आदि का उपयोग करें. इससे उत्तर आकर्षक और प्रभावी बन जाता है. 
  • पेज भरने की बजाय सभी प्रश्नों का स्पष्ट और सटीक जवाब लिखें. 
  • जो प्रश्न सरल हैं और जिनका ज़वाब आपको सबसे अच्छे से आता है उन्हें पहले करें. कठिन प्रश्नों के लिए पर्याप्त समय बचाएं और उन्हें सोच-समझकर आत्मविश्वास के साथ हल करें. 
  • एग्जाम खत्म होने के 10 मिनट पहले तक अपना पेपर पूरा कर लें. ताकि कॉपी को फिर से चेक कर सकें. 
  • पेपर चाहे जैसा भी हो, एग्जाम खत्म होने के बाद उसकी चिंता छोड़ दें और पूरी लगन, मेहनत और सकारात्मक भाव से अगले पेपर की तैयारी शुरू कर दें. माता-पिता भी पेपर अच्छा ना होने पर डांट ना लगायें बल्कि अगले पेपर की अच्छी तैयारी के लिए प्रोत्साहित करें. 
Reference : Newspapers and Magazines
 
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