Friday, January 31, 2014

Patriotic Poem in Hindi


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Patriotic Poem : आओ विश्वगुरु कहलायें

अब झूठे आश्वासन वालों से धोखा ना खायेंगे 
बेच रहे जो झूठे सपने उनको मजा चखाएंगे
टुकड़े-टुकड़े भारत को हम पुनः अखंड बनायेंगे 
भारत की आज़ादी अब सच्चे अर्थों में पाएंगे. 

शोला बनकर बाधाओं के पत्थर को पिघलायेंगे 
बादल बनकर विपदा के हर पर्वत पर छाएंगे 
जान हथेली पर लेकर मैदान-ए-जंग में जायेंगे 
अब तो दम लेंगें हम जब अपनी मंजिल को पायेंगे. 

अब दृढ़ संकल्पित हो हमको प्रगति शिखर पर चढ़ना है 
कन्धों से मिलाकर कंधे हमको हर पल आगे बढ़ना है 
ऊंच-नीच के छोड़ दायरे समता का पाठ पढ़ना है
ले हाथ तिरंगा विश्व पटल पर नाम देश का गढ़ना है. 

धर्म द्वेष की आग हो चाहे क्षेत्रीयता का हो अनुराग 
हमें मिटाने होंगे अपने दामन से ये सारे दाग 
नवयुग की नूतन वीणा में भरना होगा प्रेम का राग 
हमें मिटानी होगी अब हर दिल से नफरत की आग. 

युग-युग के मुरझे सुमनों में मुस्कान हमें फैलानी है 
दया, अहिंसा, प्रेमभाव की गंगा हमें बहानी है
जन-जन के जीवन में फिर से नयी प्रेरणा लानी है 
नयी उमंगें, नयी तरंगे, नयी आस अब पानी है. 

उगी जहाँ भी घृणा की फसलें उनको कांट गिराना है 
प्यार ही बोयें, प्यार ही बांटे, ऐसा देश बनाना है
भूख, बीमारी, बेकारी को जड़ से हमें मिटाना है 
स्वर्ग से भी प्यारा और न्यारा अपना देश बनाना है. 

ऊंच-नीच का भेद मिटाकर सद्गुण को सम्मान दिलाएं 
वंचित, पीड़ित, दीन-हीन को हम सब मिलकर न्याय दिलाएं
भारत की प्रभुसत्ता को फिर से हम आदर्श बनाएं 
शत-शत दीपक जला ज्ञान के आओ विश्वगुरु कहलायें. 

ठान लेंगे हम अगर युग को नयी तस्वीर देंगे 
सिंहगर्जना से शत्रुओं के हम कलेजे चीर देंगे 
देश के सम्मान पर कोई आंच हम आने ना देंगे 
स्वाधीनता के व्योम में काली घटा छाने ना देंगे.

Monika Jain ‘पंछी’ 

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