Monday, January 27, 2014

Poem on Honour Killing in Hindi


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Honour Killing Poem : उसे नहीं पता था 

वह रोती रही
बिलखती रही
तड़पती रही 
उसके आंसू सूख गए 
उसे बहुत पीटा गया था 
गिड़गिड़ाते हुए वह कहती रही 
पापा इन्हें मत मारो 
चाहे तो मुझे मार दो.

तब उसे नहीं पता था कि
उसके पिता, भाई और चाचा 
सिर्फ उसके प्रेमी की ही नहीं 
वरन् उसकी भी हत्या कर देंगे.

पहले उसके प्रेमी का 
और फिर उसका 
गला रेत दिया गया.

वह तड़पते हुए देखती रही उन आँखों को 
जिनमें प्रेम और ममता मर चुकी थी 
उनमें था तो बस सम्मान का अँधा नशा 
जिसकी भेंट वह और उसका प्यार चढ़ चुका था. 

उसकी गलती ?
उसकी गलती थी कि उसने प्यार किया था 
समाज और परिवार के नियमों के विरुद्ध जाकर 
उसकी गलती थी कि उसने साहस किया था 
अपने जीवन का फैंसला खुद लेने का.

उसे नहीं पता था 
आधुनिकता का लबादा ओढ़े यह समाज 
आदिम युग के मानवों सा व्यवहार करेगा
उसे नहीं पता था 
नौ महीने उसे कोख़ में रखने वाली माँ का 
बरसों लाड़ दुलार से पालने-पोसने वाली माँ का भी 
उसकी हत्या में मौन समर्थन होगा.
सच, उसे नहीं पता था.

Monika Jain ‘पंछी’

Honour killing is a serious issue today. Its wide and complex. Inspite of the laws of government this practice still exist in many parts of India and world. Honour killing is done to save the honour of the family but I can never understand how a family can protect their status and honor in society by killing their own sons or daughters, who are willing to live their life according to their own wishes. They are only criminals in my views even more dangerous than the terrorists. Such people should be punished severely. No culture has the right to murder innocent people. Freedom of belief doesn’t mean freedom to kill. Everyone has right to live their life with full dignity and equality.