Tuesday, January 7, 2014

Poem on Kanya Bhrun Hatya in Hindi


Poem on Kanya Bhrun Hatya in Hindi Language, Save Girl Child Poetry, Female Foeticide Rhymes, Infanticide Kavita, Fetus Cry Lines, Sex Selective Abortion, Gender Discrimination Slogans, Daughters Message, Beti Bachao Sms, Women Shayari, हिंदी कविता, कन्या भ्रूण हत्या, बेटी बचाओ, लिंग परीक्षण, भेद, शायरी, नारे 


मेरी क्या गलती थी

किसी सतरंगी आसमां सा मेरा चित खिल सा गया 
जब पता चला कि मेरा अस्तित्व मिल सा गया.

प्रसन्नता की वो लहर मुझे छू सी गयी 
मानों मेरे कोमल मन को रौशनी मिली नयी. 

फिर दिन बीते और मेरा देह बढ़ने लगा 
मानों अँधेरे भवन में रौशन एक दीप जलने लगा. 

आज मेरे लिए दिन उमंग ले के आया 
‘आप पापा बनने वाले हो’ माँ ने पापा को बताया.

मैं देख तो ना सकी पर महसूस कर सकती थी 
पापा की उमंग की हर पंक्ति पढ़ सकती थी.

चाचा-चाची, नाना-नानी, मामा, फूफा और बुआ 
सबको मेरे अस्तित्व का संदेशा हुआ. 

आज सुबह सामान्य सी ना थी 
रोज मिलने वाली माँ की वो मुस्कान भी ना मिली. 

मेरे कानों में कुछ अल्फाज़ पड़ रहे थे 
पापा माँ को डॉक्टर के पास ले जाने की बात कह रहे थे. 

पापा करना चाहते थे आज मेरा प्रथम दर्शन 
ये सुन कर पुनः खिल उठा मेरा तन-मन.

माँ को एक मशीन से ले जाया गया 
मुझ पर पड़ा चमकदार रौशनी का घना साया. 

मुझे डर लगा मेरा कोमल चित घबराया 
माँ ! वो चमकदार रौशनी का साया मुझे नहीं भाया.

मैंने कुछ सुना डॉक्टर ने पापा को कुछ बताया 
एक नन्हीं सी कली खिलेगी, उन्होंने ये समझाया.

पर माँ ! मुझे अब पापा की वो उमंग क्यों ना दिखी
बोलो ना माँ ! क्या भगवान ने यही मेरी किस्मत लिखी ? 

क्यों उस दिन के बाद तुम दुबारा ना मुस्काई 
क्यों मेरे सतरंगी आसमां में काली घटा छाई ?

फिर उस दिन ऐसा क्या हुआ माँ ! जो पापा ने तुम्हे मारा 
मैंने सुना माँ ! उन्हें एक बेटा चाहिए था प्यारा.

आज फिर एक अजीब हलचल ने मुझे घेर लिया 
ऐसा लगा सारे जग ने मुझसे मुंह फेर लिया. 

माँ पापा के अहसास से परे कई अहसास हुए नए 
पर ये अहसास ना थे बिल्कुल भी कोमलता भरे. 

मेरे अविकसित शरीर पर खंजर चला दिया 
मेरे अधूरे जीवन पर पूर्ण विराम लगा दिया. 

माँ रोती रही, बिलखती रही, चीखी-चिल्लाई
पर किसी को उनकी चीखें ना दी सुनाई. 

आज भी ना पता चला कि मेरी क्या गलती थी 
क्या बस यही कि मैं लड़का नहीं, लड़की थी ?

By Rishabh Goel
Kotdwar, Uttarakhand

Thank you Mr Rishabh Goel for sharing such a touchy poem on Kanya Bhrun Hatya.