Tuesday, January 14, 2014

Poem on Swami Vivekananda in Hindi


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Swami Vivekananda / स्वामी विवेकानंद 

चलो लेखनी चलते हैं हम अतीत में वहां 
युग पुरुष स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था जहाँ.

गर्वित होकर चल पड़ी लेखनी मेरी 
पहुंचे हम दोनों भारत की कोलकाता नगरी.

माँ भुवनेश्वरी और पिता विश्वनाथ के सत्कर्मों का बंध
पुत्र रूप में आया घर उनके महापुरुष विवेकानंद.

नाम नरेन्द्रनाथ उन्होंने बचपन में था पाया 
निर्भीकता और कुशाग्र बुद्धि से कईयों को चोकायाँ.

खुद भूखे रहकर भी जो आथित्य धर्म निभाते थे 
वर्षा में खुद बाहर सोते, अथिति को भीतर सुलाते थे. 

रामकृष्ण परमहंस को गुरु रूप में पाया 
आत्म साक्षात्कार कर सन्यासी जीवन अपनाया.

दीन, दु:खी, दरिद्र की सेवा को नारायण सेवा माना 
कर्मयोगी, मानवता प्रेमी ने सर्वोच्च सत्य को जाना.

ब्रह्मचर्य, दया, करुणा, मानवता के मूर्त रूप 
अपनी अद्वितीय तर्क शक्ति से सबको जिसने किया मुग्ध.

पराधीन भारत को भी गौरव के क्षण देने वाले 
विश्व धर्म सभा में सबके अंतर्मन को छूने वाले. 

अपने ओजस्वी वचनों से शक्ति का संचार किया 
लक्ष्य प्रप्ति तक ना रुकने का युवाओं को सन्देश दिया. 

स्वतंत्रता का शंखनाद कर जन-जन में विश्वास जगाया 
देशभक्त सन्यासी ने आत्मगौरव का भान कराया.

भारतीय आध्यात्म से जिसने सारे जग को महकाया
जातीय और धार्मिक एकता का सबको पाठ पढ़ाया.

पुनर्जागरण के अग्रदूत, सम्पूर्ण विश्व के जननायक 
उनके पदचिन्हों पर चलना निश्चय होगा फलदायक.

भारतीय संस्कृति के प्रहरी, वेदांत के प्रवर्तक 
जिनके ज्ञान और दर्शन के सम्मुख विश्व हुआ नतमस्तक.

साहित्य, दर्शन और इतिहास के थे वे प्रकांड विद्वान
बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी को मेरा शत-शत प्रणाम.

By Monika Jain ‘पंछी’ 

12th January the birthday of Swami Vivekananda is celebrated as National Youth Day. The above poetry is dedicated to Swami Vivekananda and all the youths of our country.

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