Monday, February 24, 2014

Poem on City Life in Hindi


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शहर / सड़क 

शहर की सड़कों पर चलना किसी परीक्षा से कम नहीं 
यहाँ हर दो कदम पर कोई खतरा इंतजार कर रहा है.
कहीं गड्डें तो कहीं मवेशियों का ढेरा
हादसा कोई ज़िन्दगी को तार-तार कर रहा है. 

सब अंधाधुंध जा रहे हैं जाने किस तरफ 
कहीं भी कोई ठहरा हुआ ना आदमी खड़ा है.
चढ़ रही है जल्दबाज कार रिक्शे पर 
लहुलुहान आदमी अकेला पड़ा है. 

चमचमाती गाड़ियाँ रफ़्तार में है दौड़ती 
सांस भी ना ले सके ऐसा धुआँ छोड़ती 
ऊपर खुला आकाश सिसकियाँ भर रहा है 
और नीचे जमीं का ह्रदय रो रहा है. 

कोमलता, निश्छलता, उदारता, पवित्रता 
इस शोर-शराबे में कहीं दब गयी है 
इंसान की इंसानीयत भी 
महज किताबों के शब्द बन गयी है.

टूटते सपने, बिखरता भरोसा 
भीड़ में भी खौफ़नाक सन्नाटा पसर रहा है 
समय कहाँ किसी को किसी की सुध लेने का 
कोई मासूम यहाँ हर रोज खो रहा है.

ना उगते सूरज का अता, ना ढलती शाम का पता 
नींद यहाँ किसी को मयस्सर नहीं है
बंद पलकों में भी जागते हैं लोग यहाँ 
चैन होता है क्या, किसी को खबर नहीं है.

चकाचौंध भरी इस जगमगाहट में 
भीतर ही भीतर अँधेरा पल रहा है.
भीड़ से भरे हैं यहाँ के सब रास्ते 
पर हर कोई देखो अकेला चल रहा है.

Monika Jain ‘पंछी’

Life of a city looks attractive and glamorous but it is not peaceful. City life is artificial, costly and unhealthy. We can not enjoy the beauty of nature. There is no fellow feeling. Although there are many advantages but at the cost of mental peace and true happiness. How is this hindi poem on life of a city and its roads ?