Thursday, March 27, 2014

Laghu Kahaniyan in Hindi


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(1) 

भावनात्मक विकास 

एक व्यक्ति था हिम्मत सिंह. नाम के अनुरूप ही साहसी और हिम्मत वाला. वह अक्सर कहता था कि इस दुनिया में कोई भी कार्य मुश्किल नहीं है. पर वह यह कथन अपने शारीरिक बल के चलते कहता था, बुद्धि के बल पर नहीं. उसके बड़बोलेपन की वजह से कुछ लोग परेशान थे. उन्होंने उसे नसीहत देने की सोची. 

वे सब मिलकर हिम्मत सिंह के पास गए और बोले, ‘ हिम्मत सिंह, तुम बड़े साहसी हो. मुश्किल से मुश्किल काम को चुटकियों में कर देते हो. पर आज एक सरल काम करके दिखाओ.’

हिम्मत सिंह ने कहा, ‘बताओ क्या काम है ?’ 

युवकों ने कहा, ‘ तुम्हें बस यह जो दो कदम की दूरी पर तुम्हारी छाया दिख रही है, उसे छूकर बताना है. तुमने ऐसा कर दिया तो हम तुम्हारी वीरता और साहस का लोहा मान जायेंगे.’ 

हिम्मत सिंह ने कहा, ‘लो अभी करके दिखाता हूँ’ और यह कहकर उसने अपनी परछाई को छूने के लिए कदम बढ़ाये पर छाया हाथ नहीं आई. जितना वह आगे बढ़ता उतनी ही परछाई आगे खिसक जाती. 

हिम्मत सिंह अब दौड़ने लगा. उसे इस तरह दौड़ते हुए देखकर एक व्यक्ति ने पूछा, ‘तुम दौड़ क्यों रहे हो ?’ 

हिम्मत ने उसे सारी बात बता दी. व्यक्ति ने समस्या सुनकर कहा, ‘ये तो आसान सा काम है. तुम जहाँ खड़े हो वही रुक जाओ और अभी जो तुम्हारा मुख पूर्व दिशा में है उसे पश्चिम दिशा में फेर लो. फिर देखो.’ 

हिम्मत सिंह ने अपना मुंह पश्चिम की ओर किया और छाया उसके कदम चूमने लगी.

Moral : दिशा बदलो, दशा अपने आप बदलेगी. मस्तिष्क की अनेक परतें हैं जिनका परिष्करण जरुरी है ताकि भावनात्मक विकास हो सके. 

(2)

पुरुषार्थ 

पाणिनि जो कि संस्कृत व्याकरण के रचयिता थे, उनका जन्म एक श्रेष्ठी के यहाँ हुआ था. एक बार बालक का भविष्य जानने के लिए उन्होंने एक ज्योतिषी को बुलाया. रेखाशास्त्र में निपुण उस ज्योतिषी ने कहा, ‘यह बालक निरा मुर्ख रहेगा क्योंकि इसके हाथ में बुद्धि रेखा नहीं है. तीन-चार वर्ष बीत गए. बालक का विकास नहीं हुआ. पिता ने स्वीकार कर लिया कि यह बालक अब मुर्ख शिरोमणि ही रहेगा. 

बालक ने जब यह भविष्यवाणी सुनी तो उसने ज्योतिषी से कहा, ‘बताओ बुद्धि रेखा कहाँ होती है ? ‘ ज्योतिषी ने रेखा की ओर संकेत किया. बालक ने उसी समय चाक़ू से काटकर उस रेखा को बड़ा कर दिया और बोला, ‘अब तो मेरी विचार रेखा बड़ी हो गयी है.’ ज्योतिषि आश्चर्य से देखता रहा. बालक बोला, ‘ भाग्य का निर्माण रेखाओं से नहीं पुरुषार्थ से होता है.  

Courtesy : Swadhyay Sandesh 

How are these short inspirational stories ? 

Note : The above stories ( Laghu Kahaniyan ) are not my own creations. 

Friday, March 21, 2014

Short Kahani in Hindi


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(1)

भ्रांत धारणा 

एक व्यक्ति हर रोज तालाब के किनारे घूमने जाता था. पानी में उसकी परछाई दिखाई पड़ती थी. तालाब में बहुत सारी मछलियाँ रहा करती थी. एक मछली ने एक दिन उस व्यक्ति के प्रतिबिम्ब को पानी में देखा तो उसे सर नीचे और पाँव ऊपर नज़र आये. वह हर रोज ऐसा ही देखती थी इसलिए उसने यह दृढ़ धारणा बना ली कि आदमी एक ऐसा प्राणी है जिसका सर नीचे और पाँव ऊपर होते हैं. 

एक दिन वह मछली पानी की सतह पर आई. आज उसने कुछ और ही देखा. आज उसे आदमी का सर ऊपर और पाँव नीचे दिखाई दिए. मछली ने सोचा कि यह व्यक्ति जरुर शीर्षासन कर रहा है क्योंकि वैसे तो आदमी का सर नीचे और पाँव ऊपर होते हैं. यह उस मछली की भ्रांत धारणा थी. पर यहाँ स्थिति केवल उस मछली की नहीं हम सब की है.

Courtesy : Swadhyay Sandesh 

(2)

सुख और दुःख 

हकीम लुकमान का बचपन बहुत अभावों में गुजरा था. अपने भरण-पोषण के लिए उन्हें गुलामी भी करनी पड़ी. एक बार उनके मालिक ककड़ी खाना चाहते थे. लुकमान उनके लिए ककड़ी ले आये. मालिक ने जैसे ही ककड़ी को चखा उन्हें पता चला कि वह तो बहुत कड़वी है. मालिक ने ककड़ी लुकमान को देते हुए कहा, ‘इसे तू खा ले.’ 

लुकमान ने मालिक से ककड़ी ली और बिना मुंह बिचकाए आराम से ककड़ी खा ली. मालिक को बहुत आश्चर्य हुआ. वे तो सोच रहे थे कि लुकमान इसे नहीं खायेगा और फेंक देगा. पर जब लुकमान ने आराम से पूरी ककड़ी खा ली तो मालिक ने पूछा, ‘तूने इतनी कड़वी ककड़ी कैसे खा ली ?’ 

लुकमान हँसते हुए बोले, ‘ मालिक, आप हर रोज मुझे इतना स्वादिष्ट भोजन खिलाते हैं. जिसे मैं आनंद से खाता हूँ तो अगर एक दिन आपने कड़वी ककड़ी दे भी दी तो क्या मैं उसे नहीं खा सकता ? मैंने इसे भी और चीजों की तरह ही अच्छा मानकर खा लिया.’

मालिक बहुत समझदार और दयालु थे. लुकमान की बात को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, ‘ तुमने आज मुझे जीवन का एक बहुत बड़ा सत्य बताया है. ईश्वर हमें खुश होने के कई कारण देता है. इसलिए अगर कभी दुःख भी आये तो हमें हर्ष से उसे स्वीकार करना चाहिए. तभी हमारा जीवन सार्थक होगा. जाओ आज से तुम गुलामी से मुक्त हो.’

Note : The above short stories are not my own creations. I read it somewhere so sharing it here. 

Thursday, March 13, 2014

Bewafa Shayari in Hindi


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बेवफ़ा

मेरे भरोसे को तार-तार करने वाला 
शिकायत करता है कि मैंने उसपे भरोसा नहीं किया. 

वह किताब के पन्नों की तरह बदलता है अपना प्यार 
हैरत में हूँ, क्या इसलिए वह कहता-फिरता है खुद को दिलदार. 

अहसानमंद हूँ मैं तेरी बेवफाई की 
तूने ही सिखाया है पत्थरों को तरहीज ना देना.

हीरे से बन गया है वो पत्थर 
कभी चमकता था जो आँखों में अब जख्म दे रहा है. 

बड़ा अजीब है उसका प्यार जताने का ढंग 
मतलबी प्यार भी करता है तो बस मतलब के लिए. 

मेरी अच्छाई और सच्चाई को नज़रंदाज़ करते-करते 
दिनोदिन वह अपनी क़द्र घटाता चला गया. 

बेदर्द ही होते हैं इस ज़माने में सब लोग 
प्यार, वफ़ा ये सब गुजरे ज़माने के किस्से हैं.

अहसास ही नहीं होता हमको अब कोई 
वो बेवफा सारे अहसास मिटा के चला गया.

खुद को खो चुकी हूँ 
उस बेवफ़ा से वफ़ा करते-करते 
लोग कहते हैं दर्द छिपा है मेरी आँखों में 
पर मुस्कराते हुए मेरे होठ जाने क्यों नहीं थकते. 

दिल जला गया वो रौशनी की आड़ में 
भरोसे की हमने अच्छी कीमत पायी है 
हम वफायें निसार करते रहे 
उसने बेवफाई भी शिद्दत से निभायी है.

अपनी बेबसी पर हम रोते रहे 
अपने ही सपनों की कब्र पर सोते रहे 
समझ नहीं पाये जिंदगी के दाँवपेंच 
लोग बनकर अपने पराये होते रहे.

प्यार बनकर आया था जो ज़िन्दगी में 
वादा किया रहूँगा साँसे है जब तक 
उसी दिये ने जलाये हैं मेरे हाथ 
जिसे हाथों से बचाती रही हूँ अब तक.

हंसाने के बाद रुलाते हैं लोग 
आकर करीब भूल जाते हैं लोग 
देकर गम-ए-जुदाई का जख्म 
अक्सर दिल जलाते हैं लोग.

Monika Jain ‘पंछी’

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Wednesday, March 5, 2014

Sukrat Story in Hindi


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(1)

सुकरात के गुरु 

विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात कुछ ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे कि सभी लोग उनके साथ बहुत सहज महसूस करते थे. अपनी समस्याओं का समाधान जानने के लिए उनके पास कई लोग आते और तरह-तरह के सवाल करते थे. सुकरात समान भाव से सभी की समस्याओं का समाधान करने और उन्हें संतुष्ट करने की कोशिश करते. 

एक बार एक व्यक्ति ने सुकरात से प्रश्न किया, ‘आपके गुरु कौन है ?’ 

सुकरात ने हँसते हुए जवाब दिया, ‘ तुम मेरे गुरु के बारे में जानना चाहते हो तो सुनो, सारी दुनिया में जितने भी मुर्ख है वे सब मेरे गुरु हैं.’ 

व्यक्ति ने सोचा कि सुकरात मजाक कर रहे हैं. क्योंकि वे अक्सर ऐसा करते थे. इसलिए उस व्यक्ति ने फिर से वही सवाल दोहराया और उनसे आग्रह किया कि वे कृपया गंभीरता से प्रश्न का उत्तर दें. पर सुकरात ने फिर से वही उत्तर दोहराया तो व्यक्ति को बड़ा आश्चर्य हुआ. 

व्यक्ति ने पूछा, ‘ मूर्ख आपके गुरु कैसे हो सकते हैं ?’ 

सुकरात ने जवाब दिया, ‘ मैं हमेशा यह जानने की कोशिश करता हूँ कि किस दोष की वजह से किसी को मुर्ख कहा जा रहा है. अगर मुझे लगता है कि यह दोष मेरे भीतर भी है तो मैं अपने भीतर के उस दोष को दूर कर लेता हूँ, जिससे कि मुझे मूर्ख ना कहा जाए. इस तरह मैंने जो भी ज्ञान प्राप्त किया है वह मूर्खों से ही शिक्षा लेकर किया है. अगर वे ना होते तो मुझे अपने में सुधार करने का मौका कैसे मिलता. अब तुम्हीं निर्णय लो कि मुर्ख मेरे वास्तविक गुरु हैं कि नहीं.’ 

सुकरात का जवाब सुनकर वह व्यक्ति संतुष्ट हो गया और उसने भी यह तरीका अपने जीवन में अपनाने का निश्चय किया. 

(2) 

मन : शत्रु और मित्र

एक बार एक व्यक्ति ने सुकरात से पूछा, ‘ दुनिया में आपका सबसे निकट मित्र कौन है ?’ सुकरात ने कहा, ‘मेरा मन.’ व्यक्ति ने फिर पूछा, ‘आपका शत्रु कौन है ?’ सुकरात ने जवाब दिया, ‘ मेरा मन.’ 

वह व्यक्ति आश्चर्य में पड़ गया. उसने सुकरात से कहा, ‘आपकी बात समझ नहीं आई. मन ही मित्र और मन ही शत्रु कैसे हो सकता है ? कृपया विस्तार से समझाइये.‘ 

सुकरात ने कहा, ‘ मन ही मेरा मित्र है क्योंकि यही मुझे सही रास्ते पर ले जाता है और यही मेरा शत्रु भी है क्योंकि यही मुझे गलत रास्ते पर भी ले जाता है. मन ही व्यक्ति को उच्च विचारों में लगा सकता है और मन ही पाप कर्म भी करवाता है. ‘ 

उस व्यक्ति ने ध्यान से सब कुछ सुना और फिर पूछा, ‘ पर अगर शत्रु और मित्र दोनों एक ही हो तो हम पर किसका असर ज्यादा होगा ?’ 

सुकरात ने कहा, ‘ यह हम पर निर्भर करेगा कि हम मन के किस रूप को हावी होने देते हैं. अगर हम उसके बुरे रूप को हावी होने देंगे तो वह शत्रु की तरह हमें गर्त में ले जाएगा और अगर हम अच्छी बातों पर ध्यान देंगे तो मन हमें सफलता की ओर ले जाएगा.’ 

(3)

संभलकर चलो

सुकरात यूनान के एक बहुत बड़े दार्शनिक थे. एक बार वे किसी मार्ग से जा रहे थे. मार्ग में उन्हें एक शराबी मिला जो एथेंस का प्रसिद्ध शराबी था. वह नशे में धुत लड़खड़ा कर चल रहा था. सुकरात ने उससे कहा, ‘ संभलकर चलो, गड्डे में गिर जाओगे. शराबी ने जब यह सुना तो जवाब दिया, ‘ ओ महात्मा! मैं लड़खड़ाकर चलता भी हूँ तो क्या हुआ. गड्डे में गिर भी गया तो मेरा क्या बिगड़ेगा ? ज्यादा से ज्यादा कपड़े ख़राब हो जायेंगे, तो धो लूँगा. सारा शहर जानता है कि मैं शराबी हूँ. कुछ भी हो. क्या फर्क पड़ता है ? पर तुम एक महात्मा हो, तुम्हें संभलकर चलना चाहिए. अगर तुम लड़खड़ा गए तो ना इधर के रहोगे ना उधर के. इसलिए संभल कर चलो. इस तरह से शराबी ने एक बहुत बड़े रहस्य का उद्घाटन कर दिया. 


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Information About Christmas Festival in Hindi


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Interesting Information About Christmas Festival 
  • क्रिसमस का त्योहार प्रतिवर्ष 25 दिसम्बर को सारी दुनिया में मनाया जाता है. यह त्योहार ईसा मसीह के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है.
  • रोम के विशप पोप जूलियस प्रथम ने 350 ईस्वी में 25 दिसम्बर को जीसस क्राइस्ट का जन्मदिन मनाने के आधिकारिक दिवस की घोषणा की थी.
  • ईसाई पोराणिक कथा के अनुसार प्रभु ने ग्रैबियल नामक देवदूत मैरी नामक एक कुंवारी लड़की के पास भेजा. जिसने मैरी से कहा कि वह प्रभु के पुत्र जीसस को जन्म देगी जिसके राज्य की कोई सीमायें नहीं होंगी.
  • कैरोल गाने की शुरुआत जीसस के जन्म के साथ हुई. ऐसा माना जाता है कि यीशू का जन्म जैसे ही गौशाला में हुआ, स्वर्ग से दूत आये और उन्होंने यीशू के सम्मान में कैरोल गाना शुरू कर दिया.
  • एक कहानी के अनुसार जब यीशू पैदा हुए थे तब एक तारा टूटकर गिरा था. इसी के प्रतीक के रूप में क्रिसमस ट्री पर सबसे ऊपर गोल्डन स्टार सजाया जाता है.
  • क्रिसमस के दिन घंटियों का प्रयोग बुरी आत्माओं से बचने के लिए किया जाता है. यीशू के जन्म की ख़ुशी में भी परंपरागत रूप से घंटियों का उपयोग किया जाता है.
  • पुराने समय में संत निकोलस नामक एक संत थे जो गरीब बच्चों और नाविकों की मदद और रक्षा करते थे. सेंटा क्लॉज का नाम निकोलस के डच नाम सिंटर क्लास से आया है जिसे बाद में सेंटा क्लॉज कहा जाने लगा.
  • ऐसा माना जाता है कि पूरे वर्ष सेंटा क्लॉज बच्चों के लिए कुकीज, केक, बिस्किट, केंडी और खिलौने बनवाते हैं फिर 24 दिसम्बर की रात को इन सारे गिफ्ट्स को एक झोले में भरकर उड़ने वाले आठ रेनडियर ( रुडोल्फ, डेशर, डांसर, प्रेंसर, विक्सन, डेन्डर, ब्लिटजन, क्युपिड, और कोमेट ) वाले स्लेज पर बैठकर किसी बर्फीले स्थान से आते हैं और चिमनी की मदद से घरों में प्रवेश कर बच्चों के सिरहाने उपहार छोड़ जाते हैं.
  • क्रिसमिस ट्री को उपहारों से सजाने की प्रथा पादरियों ने शुरू की क्योंकि उनका मानना था कि वृक्ष हमें सारी अच्छी चीजें देते हैं.
  • 'जिंगल बेल्स' गाने को पहले 'वन हॉर्स ओपन स्लेज' नाम से जाना जाता था. यह धन्यवाद कहने के लिए लिखा गया था. 
  • 'जिंगल बेल्स' गीत अन्तरिक्ष से ब्रॉडकास्ट किया गया पहला गीत था.
  • नार्वे में 1947 में इंग्लैंड को द्वितीय विश्व युद्ध में उसकी सहायता करने के लिए धन्यवाद के रूप में क्रिसमस ट्री भिजवाया गया था.
  • ग्रीस में प्राचीन जूलियन कैलेंडर के अनुसार क्रिसमस 7 जनवरी अर्थात नव वर्ष के बाद मनाया जाता है. 
  • 1847 में लन्दन के मिठाई विक्रेता टॉम स्मिथ ने पहला क्रिसमस पटाखा तैयार किया था जो कि स्वीट रैपर की डिजाइन का था. 
  • रोम में बहुत पहले से ही क्रिसमस के दिन दरवाजे पर एवरग्रीन रीथ रिंग को टांगा जाता है. यह फूलों की माला जीत और उल्लास का प्रतीक मानी जाती थी.
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Monday, March 3, 2014

Laghu Katha in Hindi


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(1)

विनम्रता 

कटोरी सदा घड़े के ऊपर रखी रहती है, लेकिन वह हमेशा खाली ही रहती है. अपनी रिक्तता पर दुखी होते हुए एक दिन कटोरी ने घड़े से कहा, ‘ आप अपने निकट आने वाले सभी को जल से भर देते हो पर मुझ पर कभी यह अनुग्रह नहीं करते. ऐसा क्यों ?’ 

घड़े ने कहा, ‘ दूसरे सभी विनम्रता झुकते हैं और मांगते हैं लेकिन तुम हमेशा अहंकार से मेरे सिर पर सवार रहती हो. तुम्हें देना भी चाहूँ तो कैसे दूँ ? विनम्रता के बिना कुछ भी तो नहीं मिलता.

Courtesy : स्वाध्याय सन्देश 

(2)

मन का विष 

बहुत समय पहले रंजना नाम की एक महिला श्यामनगर में रहती थी. उसके परिवार में तीन सदस्य थे - वह स्वयं, उसका पति और उसकी सास. रंजना की अपनी सास से बिल्कुल भी नहीं बनती थी. समय के साथ-साथ उनके सम्बन्ध सुधरने की बजाय बिगड़ते गए. एक दिन बात इतनी बिगड़ गयी कि रंजना घर छोड़ कर अपने पीहर चली गयी. 

वह अपनी सास से बदला लेना चाहती थी. इसी इरादे से वह एक वैद्य के पास गयी और बोली, ‘ वैद्य जी, मैं अपनी सास से बहुत परेशान हूँ. मैं जो भी कार्य करूँ उसमें कमी निकालना उनकी आदत बन चुकी है. आप किसी भी तरह मुझे उनसे छुटकारा दिलवा दीजिये.’

वैद्य ने कहा, ‘बेटी, मैं तुम्हारी सहायता करूँगा पर जैसा मैं कहूँ तुम्हें वैसा ही करना होगा, नहीं तो तुम किसी समस्या में फंस जाओगी.’ वैद्य ने उसे कुछ जड़ी-बूटियाँ दी और कहा, ‘ये जड़ी बूटियां धीमे विष का कार्य करती है. इससे व्यक्ति की छह-सात माह में मृत्यु हो जाती है. तुम हर रोज एक पकवान बनाकर उसमें इन्हें मिलाकर अपनी सास को खिला देना. लेकिन इस बीच तुम्हें अपनी सास के साथ अच्छा बर्ताव करना होगा और उनकी सेवा भी ताकि तुम पर उन्हें शक ना हो. नहीं तो तुम पकड़ी जाओगी. अब तुम ख़ुशी-ख़ुशी ससुराल जाओ.’

अगले दिन रंजना अपने ससुराल आ गयी. उसने अपना व्यवहार बिल्कुल बदल लिया. और जैसा वैद्य ने कहा वैसा ही करने लगी. उसे गुस्सा भी आता तो वैद्य की बात याद करके खुद पर नियंत्रण कर लेती. धीरे-धीरे घर का माहौल बदलने लगा. सास जो पहले बहु की बुराई करती फिरती थी अब उसकी तारीफ़ करते ना थकती. रंजना भी नाटक करते करते सच में बदल गयी थी. उसे अपनी सास अब अच्छी लगने लगी थी. छह महीने खत्म होने को थे और उसे अपनी सास की मृत्यु का भय सताने लगा. वह वैद्य जी के पास गयी और बोली, ‘मैं अपनी सास को मारना नहीं चाहती. वे मुझसे बहुत प्यार करती हैं. कृपया ऐसी दवा दे दीजिये जिससे उनपर विष का प्रभाव खत्म हो जाए.’

वैद्य ने कहा, ‘मैंने तुम्हें कोई विष नहीं दिया था. विष तो तुम्हारी सोच में था. सुनकर ख़ुशी हुई कि तुम्हारी सेवा और प्रेम से तुम्हारा मन पवित्र हो गया. अब तुम चिंता मत करो और अपने परिवार के साथ ख़ुशी-ख़ुशी रहो. रंजना ने राहत की सांस ली और ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर चली गयी. 

ये लघु कथाएं ( laghu katha ) आपको कैसी लगी ?

Note : The above short stories are not my own creations.