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Laghu Kahaniyan in Hindi


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(1) 

भावनात्मक विकास 

एक व्यक्ति था हिम्मत सिंह. नाम के अनुरूप ही साहसी और हिम्मत वाला. वह अक्सर कहता था कि इस दुनिया में कोई भी कार्य मुश्किल नहीं है. पर वह यह कथन अपने शारीरिक बल के चलते कहता था, बुद्धि के बल पर नहीं. उसके बड़बोलेपन की वजह से कुछ लोग परेशान थे. उन्होंने उसे नसीहत देने की सोची. 

वे सब मिलकर हिम्मत सिंह के पास गए और बोले, ‘ हिम्मत सिंह, तुम बड़े साहसी हो. मुश्किल से मुश्किल काम को चुटकियों में कर देते हो. पर आज एक सरल काम करके दिखाओ.’

हिम्मत सिंह ने कहा, ‘बताओ क्या काम है ?’ 

युवकों ने कहा, ‘ तुम्हें बस यह जो दो कदम की दूरी पर तुम्हारी छाया दिख रही है, उसे छूकर बताना है. तुमने ऐसा कर दिया तो हम तुम्हारी वीरता और साहस का लोहा मान जायेंगे.’ 

हिम्मत सिंह ने कहा, ‘लो अभी करके दिखाता हूँ’ और यह कहकर उसने अपनी परछाई को छूने के लिए कदम बढ़ाये पर छाया हाथ नहीं आई. जितना वह आगे बढ़ता उतनी ही परछाई आगे खिसक जाती. 

हिम्मत सिंह अब दौड़ने लगा. उसे इस तरह दौड़ते हुए देखकर एक व्यक्ति ने पूछा, ‘तुम दौड़ क्यों रहे हो ?’ 

हिम्मत ने उसे सारी बात बता दी. व्यक्ति ने समस्या सुनकर कहा, ‘ये तो आसान सा काम है. तुम जहाँ खड़े हो वही रुक जाओ और अभी जो तुम्हारा मुख पूर्व दिशा में है उसे पश्चिम दिशा में फेर लो. फिर देखो.’ 

हिम्मत सिंह ने अपना मुंह पश्चिम की ओर किया और छाया उसके कदम चूमने लगी.

Moral : दिशा बदलो, दशा अपने आप बदलेगी. मस्तिष्क की अनेक परतें हैं जिनका परिष्करण जरुरी है ताकि भावनात्मक विकास हो सके. 

(2)

पुरुषार्थ 

पाणिनि जो कि संस्कृत व्याकरण के रचयिता थे, उनका जन्म एक श्रेष्ठी के यहाँ हुआ था. एक बार बालक का भविष्य जानने के लिए उन्होंने एक ज्योतिषी को बुलाया. रेखाशास्त्र में निपुण उस ज्योतिषी ने कहा, ‘यह बालक निरा मुर्ख रहेगा क्योंकि इसके हाथ में बुद्धि रेखा नहीं है. तीन-चार वर्ष बीत गए. बालक का विकास नहीं हुआ. पिता ने स्वीकार कर लिया कि यह बालक अब मुर्ख शिरोमणि ही रहेगा. 

बालक ने जब यह भविष्यवाणी सुनी तो उसने ज्योतिषी से कहा, ‘बताओ बुद्धि रेखा कहाँ होती है ? ‘ ज्योतिषी ने रेखा की ओर संकेत किया. बालक ने उसी समय चाक़ू से काटकर उस रेखा को बड़ा कर दिया और बोला, ‘अब तो मेरी विचार रेखा बड़ी हो गयी है.’ ज्योतिषि आश्चर्य से देखता रहा. बालक बोला, ‘ भाग्य का निर्माण रेखाओं से नहीं पुरुषार्थ से होता है.  

Courtesy : Swadhyay Sandesh 

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Note : The above stories ( Laghu Kahaniyan ) are not my own creations. 

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