Saturday, November 26, 2016

Poem on Agriculture in Hindi

भारतीय कृषि समस्या और समाधान पर कविता, खेती. Poem on Agriculture in Hindi. Bhartiya Krishi Poetry, Indian Farming Sector Rhymes, Husbandry Crops Slogans, Lines.
 
Poem on Agriculture in Hindi
 
नूतन सृजन

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का
दावा करने वाला देश
और इसकी कल्याणकारी योजनायें,
क्यों नहीं बचा पाती
मौत के मुंह में जाने वाले किसानों को?

जहाँ कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है,
जिस पर दो तिहाई आबादी की आजीविका है निर्भर।
जहाँ छह ऋतुएं और दर्जनों प्रकार की मिट्टी
बनाती है विविधिकरण को संभव।
जहाँ लगभग हर तरह की फसल का उत्पादन है सुगम।
वहां भी क्यों गहराता है कृषि पर संकट?

सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भरता,
प्राकृतिक आपदाएं और पूँजी निवेश की कमी,
जोत इकाइयों का छोटा आकार,
बिजली, परिवहन आदि सुविधाओं का अभाव।

नयी तकनीक और उत्तम बीजों की अनुपलब्धता,
रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का बढ़ता प्रयोग,
मिट्टी की उर्वरता में कमी
और प्राकृतिक संसाधनों का अतिउपभोग

बड़ी तादाद में कृषि के लिए उपयोगी जीवों का खत्म हो जाना,
और किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य न मिल पाना।
कृषि योग्य भूमि का लगातार घटना,
और उस पर निर्भर रहने वालों की संख्या का हर पल बढ़ना।
- यही सब कारण है कृषि के गिरते स्तर के।

रेनहार्वेस्टिंग को अपनाना,
उत्पादन में अस्थिरता को कम करना।
बीमा और सस्ती ऋण सुविधाओं की उपलब्धता,
मानसून पर घटती निर्भरता।
जोतों के आकार को बढ़ाना,
फसलों में विविधिकरण को लाना।
कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन,
बाढ़ और सूखे की रोकथाम के साधन।
गोबर गैस और सौर ऊर्जा का समुचित उपयोग,
नयी उन्नत तकनीकों का प्रयोग।

जरुरत है आज
कृषि ढांचागत व्यवस्था को पुनः परिभाषित करने की।
कृषि का नहीं है कोई भी विकल्प!
इसलिए जरुरत है नूतन सृजन कर देश को
सच्चे अर्थों में विकसित करने की।

By Monika Jain ‘पंछी’

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