Saturday, April 26, 2014

Essay on Eve Teasing in Hindi


Essay on Eve Teasing in Hindi Language, Nari Suraksha, Mahila Shashaktikaran, Women Safety, Empowerment, Girls Freedom, Short Article, Story, Kahani, Paragraph, Write Up, Anuched, Nibandh, Lekh, Speech, Content, Matter, महिला सुरक्षा, छेड़खानी, हिंदी निबंध, लेख 

Don’t Ignore Eve Teasing 

इसे मेरी बेफिक्री कहूँ, बेवकूफ़ी, मासूमियत या फिर बहादुरी ये तो नहीं पता पर बचपन से मेरे दिमाग में ये कभी नहीं आया कि मैं लड़की हूँ इसलिए मुझे अँधेरे में अकेले बाहर नहीं निकलना चाहिए. यहाँ नहीं जाना चाहिए, वहां नहीं जाना चाहिए, इस टाइम नहीं जाना चाहिए या फिर किसी ना किसी का साथ होना चाहिए. 

घर से दूर किसी अजनबी शहर में रहते हुए भी मैं किसी भी वक्त अकेले ही बाहर निकल जाया करती थी. अंधेरों से मुझे कभी डर लगा ही नहीं. रास्ते मुझे याद नहीं रहते थे इसलिए 2-3 बार ऐसा हुआ जब मुझे पहुंचना कहीं और था और पहुँच गयी कहीं और. एक बार वक्त था सुबह के 6 बजे का और एक बार वक्त था रात के 10 बजे. पर डर कभी नहीं लगा. 

एक बार लाइट चली गयी थी. बारिश हो रही थी. रात के दस बजे थे. बाहर एक दम भयंकर अँधेरा था. अगले दिन एग्जाम था और मैं अकेले ही कैंडल लेने के लिए एक शॉप पर चली गयी. रात के दो-तीन बजे भी मुझे अकेले बाहर जाने को कह दिया जाए तो भी मुझे डर नहीं लगता था, और यह वह एरिया था जहाँ पर ज्यादातर कॉलेज के स्टूडेंट्स रहते थे. जिनमें कई बिगड़े हुए शहजादे भी थे. जब छोटी थी तब भी परीक्षाओं के समय अक्सर रात के 2:30 - 3 बजे तक खुले छत पर अकेले पढ़ती थी जब सब घर वाले सो जाते थे. चोरों का भी डर नहीं लगता था :p

शायद वो मासूमियत और बचपना था जिसकी वजह से मैंने दुनिया और दुनिया वालों को हमेशा सकारात्मक नजरिये से देखा. अनिष्ट की आशंका कभी हुई ही नहीं. और भाग्य से कभी कुछ बुरा हुआ भी नहीं. 

आज भी ऐसी ही हूँ. प्रतिबन्ध आज भी पसंद नहीं. अकेले कहीं भी जाने से डर नहीं लगता लेकिन अब थोड़ी बेवकूफ़ी वाली बहादुरी कम हो गयी है. 

पहले हद से ज्यादा इंट्रोवर्ट थी इसलिए राह चलते बिगड़े हुए लड़कों की फब्तियां, जानकार टकराने की कोशिश, कहीं भी छू कर निकल जाना आदि को बस इग्नोर कर देती थी. जब मैं 5th क्लास में पढ़ती थी तो किसी लड़के ने उल्टी सीधी बातें लिखकर एक लैटर मेरे बैग में डाल दिया था. मैंने किसी को भी नहीं बताया और छत पर जाकर रोने लगी और चुपचाप उस लैटर के बारीक-बारीक टुकड़े करके फैंक दिए. यह सबसे बड़ी बेवकूफ़ी थी. पर तब इतनी समझ नहीं थी. कुछ दिनों बाद फिर से लैटर मिला. इस बार मैंने घर पे बता दिया. प्रिंसिपल मेम को शिकायत कर दी गयी और वह हरकत फिर कभी नहीं हुई. 

कुछ सालों से एक अच्छा परिवर्तन आया है. अब तो सरे बाजार किसी को भी लेक्चर सुनाने का मादा रखती हूँ. कईयों को सुना भी चुकी हूँ. सच बहुत मजा आता है :p एक बार रात का समय था. मैं अकेली अपने रूम पे आ रही थी. पीछे 10-12 आवारा लड़कों का ग्रुप चल रहा था. कुछ बोलते जा रहे थे. अचानक किसी चीज ने मुझे छुआ. शायद कुछ फैंका गया था. मैं पीछे पलटी और तेज आवाज़ में उन्हें कुछ सुनाया, क्या सुनाया वो तो याद नहीं पर मेरे बोलने के बाद उन्होंने वैसी हरकत दुबारा नहीं की. ऐसे ही एक बार दशहरा फेयर में भीड़ का फायदा उठाते हुए लड़कों की टोली ने हमारे ग्रुप की लड़कियों को बुरे इरादे से छूने की कोशिश की. भीड़ की वजह से पता तो नहीं चला कौन है पर मैंने फिर भी तेज आवाज़ में विरोध प्रकट किया और वहां भी वह हरकत दुबारा नहीं हुई. 

यहाँ मैं बस इतना कहना चाहती हूँ कि लड़कियों ! छेड़खानी, फब्तियों और लड़कों की उल्टी सीधी हरकतों को बिल्कुल भी नज़रंदाज़ मत करो. जब हम इग्नोर करते हैं तो ऐसी हरकते हमारे साथ बार-बार होगी और अगर हम दुनिया, समाज की परवाह किये बगैर तुरंत अपना विरोध प्रकट करते हैं तो यकीन मानिए ना केवल हम अपना भला कर रहे हैं बल्कि कई और लड़कियों का भी भला कर रहे हैं. और हाँ बेवकूफ़ी वाली बहादुरी नहीं दिखानी है. सावधान हमेशा रहना है. :)

Feel free to tell your views on Eve Teasing.