Intezar Poem in Hindi


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किसी के इंतजार में दो आँखें 

अँधेरे में वो दो आँखें 
कुछ हैरान, कुछ परेशान 
सहमी हुई और दबी हुई उसकी आवाज़
कुछ कहने को थी.

जैसे एक सदी बीत गयी हो और 
पलकों पर कोई सपना सजा रखा हो 
किसी के इंतजार में 
जिंदगी जैसे थम सी गयी हो. 

इन टूटे हुए शीशों के टुकड़ों ने 
ना जाने कितने राज़ दबा रखे हो 
होंठ है कि हँसना भूल चुके हो 
आंसू लगता है जैसे सूख चुके हो. 

पास ना होकर भी क्यों वो पास लगते हैं 
कानों में उनकी आवाज़ क्यों गूंजती है 
बीत गए वो दिन जब हम थे यहाँ 
अब तो बस ये जिंदगी वीरानी सी लगती है. 

थक गए यूँ चलते चलते 
भटक से गए अपनी मंजिलों से 
वो हवाएं भी अब रोती है 
जो कभी ख़ुशी-ख़ुशी गुनगुनाती हुई मिलती थी हमसे. 

राख हो गए सपने जो सजाये थे कभी 
दिल है कि अब भी अंधेरो में रोशनी ढूंढता है 
दबी हुई यादों में अब भी जिंदा हो तुम कहीं
धुल गए आंसूओ में सब रंग 
पर उमंगें है कि बुझती ही नहीं. 

ऐसा लगता है वो खफ़ा पहले से था 
दर्द सुनने से पहले उन्होंने अपने शिकवे सुना दिए 
खुशियाँ कभी हमारी किसी को रास ना आई 
ज़माने के सामने हम हँसे और घर आकर हम रो दिए.

हारकर भी उम्मीद अभी जिंदा है 
इसको जिद कहूँ या फिर नज़ाकत दिल की 
मालूम है जबकि वो मेरी तकदीर में नहीं 
फिर भी उनका इंतजार क्यों है.

शायद ऐसा पहले भी कहीं सुना हो 
एक टूटे दिल की कविता किसी ने लिखी हो 
पर दर्द सबका एक सा नहीं होता 
सब का प्यार सच्चा होता नहीं. 

माना कि आरज़ू मेरी दिल में रह गयी 
ज़िन्दगी तन्हा और वीरानी सी बन गयी 
बरसों से कोशिश में हैं कि उनको भूल जाएँ 
चलो इसी कोशिश में एक और रात कट गयी. 

By Chetan Dheer 

Thank you Mr. Chetan for sharing this touching poem on wait ( intezar) in love. 


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