Monday, May 5, 2014

Poem on Indian Village in Hindi


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खुशनुमा ज़िन्दगी के अहसास हैं गाँव

गाँव का वो खुशनुमा वातावरण 
तपती दुपहरी में घने वृक्षों की शरण. 

वो पेड़ों के झुरमुट और वो बाग़ बगीचे
जो किसान ने अपने खून पसीने से सींचे.

वो सुन्दर सा मिट्टी का कच्चा घर 
मनभावन मांडने सजते जहाँ आँगन पर.

सृष्टि का अद्भुत नेसर्गिक सौन्दर्य 
जामुन, अमरुद, आम-मंजरी का माधुर्य. 

बसंत में सरसों के फूलों की महक 
कोयल की कूंक और चिड़ियों की चहक.

पनघट पे जाती पनिहारियों की बोली 
तालाब में नहाते बच्चों की टोली.

वो बरगद के नीचे बड़ा सा चबूतरा 
हंसी के ठहाके और मनोरंजन जहाँ बिखरा.

खेतों में गेहूं की बालियाँ लहराती 
बागों के झूलों में कोई गोरी इठलाती. 

गोधूली में घर आते पशुओं के बजते घुंघरू 
मिट्टी के चूल्हे पर सिकती रोटी की मीठी खुश्बूँ.

मक्खन से भरे बर्तन से उठती सुगंध 
वो भूनी हुई मूंगफली की सौंधी सी गंध. 

ढलता सूरज और नीड़ को लौटते पंछी 
कहीं दूर बजाता कोई ग्वाला बंसी. 

मंद-मंद बहती शीतल बयार
हर तरफ बिखरा बस प्यार ही प्यार.

छल रहित, साफ़-सुथरे, भोलेपन के भाव 
खुशनुमा ज़िन्दगी के अहसास हैं गाँव. 

By Monika Jain ‘पंछी’

India is the land of villages. Despite of some drawbacks village life is the most natural life. We can’t find the touch of a village and it’s simplicity anywhere in the world. Villages are full of affection, love, peace and happiness. The sweet songs of birds, the whistle of squirrels, beauty of rising sun, gentle breeze, blooming flowers and shed of banyan trees all add divine beauty to the villages. How is this poem about Indian Villages ? Feel free to tell via comments. Thanks