Saturday, May 17, 2014

Poem on Save Daughters in Hindi


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मुझे धरा पर आने दो

सुनो करूण भरी मेरी एक मूक पुकार
माँ के गर्भ में हूँ मैं विवश लाचार
निर्बल, निरीह, निसहाय नन्हीं सी जान
हूँ पर परमपिता परमात्मा की सन्तान
मुझे भी पृथ्वी के हर दृश्य देखने दो
मुझको अब यह जीवन धारण करने दो
मुझे मत मारो मुझको धरा पर आने दो.

माता हौवा, बाबा आदम का विस्तार मैं
परनानी, परदादी का पुर्न:अवतार मैं
पिता तुम्हारे वंश बेल की कोपल मैं
माता तुम्हारी परछाईं की कोयल मैं
गुड्डे-गुड़ियों के संग मुझको खेलने दो
मुझको अब यह जीवन धारण करने दो
मुझे मत मारो मुझको धरा पर आने दो.

घर द्वार पर किलकारी मुझको भरने दो
आँगन की तुलसी बन मुझको महकने दो
गगन में उन्मुक्त होकर मुझको उड़ने दो
धरती पर कली बन मुझको खिलने दो
परियों की कहानियां मुझको सुनने दो
मुझको अब यह जीवन धारण करने दो
मुझे मत मारो मुझको धरा पर आने दो

पिताजी तुम्हारे वृद्ध हाथों की लाठी बनूगी
माँ जी तुम्हारी वृद्ध आँखों की रोशनी बंनूगी
घर गृहस्थी के कर्तव्यों का पालन करूंगी
बेटी-बहिन, पत्नी, माँ के फर्ज निभाउंगी
सुख-दुख, गर्मी-सर्दी में पलने बढ़ने दो
मुझको अब यह जीवन धारण करने दो
मुझे मत मारो, मुझको धरा पर आने दो

अश्विनी कुमार वर्मा 
मुख्य रसायनज्ञ , हजीरा संयंत्र

We are witnessing advancement in every field but biased behavior against the girl child is still prevailing in our country. It’s a very serious issue to think about. 

Thank you Mr. Ashwani Kumar Verma for sharing this poem on a very crucial social issue of save daughters. Hope it will have an effect on some people to change their mind set.