Thursday, July 7, 2016

Azadi par Kavita in Hindi

आज़ादी पर कविता, नारी मुक्ति शायरी. Azadi par Kavita in Hindi. Women’s Freedom Poem, Nari Mukti, Mahila Swatantrata, Female Liberty, Liberation, Independence.

Azadi par Kavita in Hindi

(1)

मुट्ठी भर आज़ादी

माँ! क्या ऐसा कोई आसमां नहीं होता
जहाँ से रोज भर लाऊं मैं मुट्ठी भर आज़ादी

आज़ादी उन घूरती नजरों से
जो मुझे बेपरवाह नहीं चलने देती रास्तों पर।

आज़ादी उन तानों, लतीफों और तारीफों के कशीदों से
जो मुझे बार बार अहसास कराती है रूह से ज्यादा एक जिस्म भर होने का

आज़ादी उस रोक-टोक और हजारों सलाह-मशविरों से
जिनमें घर से बाहर मेरा निकलना तय होता है घड़ी की दो सुइयों से।

आज़ादी उस खौफ़ से, जो बढ़ता ही जाता है
रोज अख़बार के पन्ने पलटते-पलटते सुनाई देने वाली चीखों से।

आज़ादी उस सोच से, जिसमें इज्जत को जोड़ा जाता है
मात्र लड़की के शरीर के एक अंग से।

आज़ादी उस दकियानूसी ख़याल से
जिसमें इज्जत नहीं जाती दोषी की बल्कि जाती है निर्दोष की।

आज़ादी आज़ादी के उस कोरे भ्रम से, जिसमें नारी मुक्ति की परिभाषा
गढ़ी जा रही है केवल देह प्रदर्शन और वस्त्र मुक्ति से।

आज़ादी उस होड़ से जो स्त्री पुरुष को एक दूसरे का पूरक न बना
पेश कर रही है एक दूसरे के प्रतिद्वंदी के रूप में।

माँ! मुझे रोज लानी है मुट्ठी भर आज़ादी
ताकि बना सकूँ यहाँ भी एक दिन मैं ऐसा आसमां
मेरी सोच, मेरे विचार, मेरी क्षमताएं और मेरा विश्वास
खुल कर सांस ले सके जहाँ।

By Monika Jain ‘पंछी’

To read the english version of this poem about Women’s Freedom click here.

Video of this poem abour Nari Azadi :


(2)

उन्मुक्त 


फूलों को दे आओ पौधों को
तितलियों को भी जरा आज़ाद करो
छिपा के न रखो कहानियां कोई
तनहाईयों को अपनी आबाद करो।
काटों पे अंगुलियाँ रखने का कैसा गम
लकीरें लिखेंगी किस्मत है कोरा भ्रम
उसे भी कर दो हर बंधन से मुक्त
और नील गगन में उडों
तुम होकर उन्मुक्त

By Monika Jain ‘पंछी’

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