Saturday, July 5, 2014

Motivational Article in Hindi


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मुश्किलों से करें प्यार 

कल फेसबुक पर एक बहुत ही ज्यादा निराशा से भरी पोस्ट पढ़ी. दुःख ज्यादा होता है जब कोई बहुत हिम्मत वाला इंसान, जिसके कई फॉलोअर्स हो इतनी निराशाजनक बातें करें. क्योंकि वह कई लोगों का प्रेरणा स्त्रोत है और उसकी बातें एक बड़े समूह को प्रभावित करने वाली है. 

हम जीवन में भयंकर संघर्ष से गुजर रहे हैं. मुश्किलों का दूर-दूर तक कोई हल नहीं नज़र आता. हमारा साथ देने वाला कोई नहीं है. परिवार, दोस्तों में भी ऐसा कोई नहीं जिसे हम अपने दर्द का, अपने दुःख का सहारा कह सकें. इतना ही नहीं बल्कि 'कंगाली में आटा गीला' वाली कहावत को चरितार्थ करने के लिए कुछ लोग हमारे जीवन में सहारा बनने की उम्मीद जिन्दा करने आयेंगे भी और हमें पहले से भी अधिक तन्हा करके चले जायेंगे. अकेलापन हमें काटने को दौड़ेगा. हमारे संघर्ष को कई गुना बोझिल बना देगा. भविष्य में क्या होगा इस डर से रातों की नींदें उड़ सकती है. हम गहरे अवसाद में जा सकते हैं. यह या इससे भी ज्यादा बुरा हो सकता है. हम आत्महत्या के बारे में सोच सकते हैं बल्कि आत्महत्या कर भी सकते हैं. 

लेकिन आखिरी कदम उठाने से पहले एक बार हमें सोचना है. क्या हम सच में इतने कमजोर हैं ? क्या हम सच में इतने डरपोक हैं ? क्या सच में हमारी मुश्किलें सारी दुनिया के लोगों से बड़ी है ? क्या सच में किसी के सहारे के बिना हम जी नहीं सकते ? क्या सच में हमारी ज़िन्दगी इतनी ज्यादा सस्ती है ? 

हर सवाल का जवाब सिर्फ और सिर्फ 'नहीं' है. बहुत कुछ बदल जाएगा अगर हमने अपना नज़रियाँ थोड़ा सा बदल लिया तो. 

हाँ, हमें बहुत मुश्किलें मिली हैं, बहुत ज्यादा. पर हो सकता हैं ना कि हमें इतनी मुश्किलें इसलिए मिली हो क्योंकि हमसा बहादुर दूसरा और कोई नहीं जो उनका सामना कर सकें. हाँ, हमें प्रोत्साहित करने वाला कोई भी नहीं. पर क्या हम जानते हैं कि सेल्फ मोटिवेशन से ज्यादा अच्छा और बेहतर कोई प्रोत्साहन होता ही नहीं. लोग सहारा बनने आये और हमें और भी ज्यादा तोड़ कर चले गए. शायद ये इसलिए हुआ हो ताकि हम मजबूत बन सकें और ना केवल खुद अपना बल्कि दूसरों का भी सहारा बन सकें. भविष्य के बारे में सोच-सोच कर हम क्यों अपनी नींदें ख़राब करें जबकि हम किसी के लिए ये दावा भी नहीं कर सकते कि वह अगली सुबह देख पायेगा भी या नहीं. 

तो क्यों ना ये रात हम सुकून से सोकर गुजारें. क्यों ना हम सबसे पहले अपने दोस्त बन जाएँ. क्यों ना हम उन लोगों को माफ़ कर दें जिन्होंने हमें दुःख पहुँचाया. क्यों ना हम प्रकृति और इसके साये में पलने वाले निर्दोष और जरूरतमंद लोगों से प्यार करें. क्यों ना हम खुद से प्यार करें. क्यों ना हम ज़िन्दगी से प्यार करें. क्यों ना हम मुश्किलों से प्यार करें. करेंगे ना ? 

Monika Jain ‘पंछी’ 

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