Sunday, August 31, 2014

Essay on Forgiveness in Hindi


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क्षमा 

क्षमा कर देने और क्षमा मांगने, दोनों के ही लिए एक साहसी, संवेदनशील, साफ़ और बड़े दिल की जरुरत होती है. क्षमा मांगना कायरता की निशानी बिल्कुल भी नहीं है बल्कि यह तो अहंकार का नाश है. दूसरी ओर क्षमा कर देना भी बड़प्पन, सकारात्मकता और महानता को ही दर्शाता है. देखा जाए तो दोनों ही चीजे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हमें ही फायदा पहुंचाती है. ना किसी से नफरत, द्वेष और ईर्ष्या रखकर हम खुश रह सकते हैं और ना ही कोई हमें नफरत करे यह बात हमें अच्छी लगती है. 

अपनी गलतियों को स्वीकारने और किसी को माफ़ कर देने के लिए दिन विशेष की जरुरत नहीं होती, पर हाँ दिन विशेष हमें ठहरकर सोचने का समय देता है, जीवन की भागदौड़ में जो कुछ छूटता जा रहा है, उसे सहेजने का अवसर देता है. लेकिन अक्सर महज औपचारिकताओं में यह दिन भी निकल जाता है. संवत्सरी की संध्या से शुरू हुआ सिलसिला अगले 1-2 दिनों में खत्म हो जाता है, और हम वहीँ के वहीँ रह जाते हैं, फिर से ढेर सारी गलतियाँ करने की तैयारी के साथ. 

अगर किसी चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है तो वह है आत्मविश्लेषण की, अंतर्मुखी बनने की, अपनी गलतियों को पहचानने की, उन्हें स्वीकार करने की और इस संकल्प के साथ क्षमा मांगने की, कि भविष्य में ये गलतियाँ नहीं दोहराई जायेगी. हम जैसा व्यवहार दूसरों से अपने लिए चाहते हैं, वैसा ही व्यवहार सबके साथ करें, यह बदलाव ही इस दिन की सार्थकता है. 

अगर हमने गलती की है तो उसे स्वीकार करने और क्षमा मांगने से हमें कतराना नहीं चाहिए. क्षमा का उम्र से भी कोई लेना देना नहीं होता. अगर आप ऐसा सोचते हैं कि आप बड़े हैं इसलिए आप क्षमा नहीं मांगेंगे तो ये आपकी छोटी सोच और अहंकार को दर्शाता है. जो सच में बड़े होते हैं वहीँ क्षमा मांग सकते हैं और क्षमा कर भी सकते हैं. क्षमा आत्मग्लानि से मुक्ति दिलाती है, टूटे रिश्तों को जोड़ती है, अहंकार का नाश करती है और हमारे जीवन में सकारात्मकता की वृद्धि करती है. 

कोई भी पूर्ण दोषमुक्त नहीं होता. हर व्यक्ति में कोई ना कोई कमी होती है, और छोटी-मोटी गलतियाँ सभी से होती है. अगर हमें हमारी गलतियों के लिए हमारे माता-पिता, शिक्षकों ने माफ़ ना किया होता तो ? इसलिए इंसान की गलतियों और कमियों को देखने की बजाय उसकी अच्छाइयों को देखना चाहिए. अगर हम छोटी-छोटी बातों पर मन में बैरभाव लेकर बैठ जायेंगे तो सबसे ज्यादा नुकसान हमारा ही होगा. 

किसी को क्षमा करके हम सबसे बड़ा उपकार खुद पर करते हैं, क्योंकि हमारे अन्दर पल रही नफ़रत, द्वेष और घृणा दूसरे को तनिक भी क्षति नहीं पहूँचाती बल्कि हमारे स्वयं के लिए विष का कार्य जरुर करती है. जब तक हम क्षमा नहीं करते तब तक हम नकारात्मक विचारों का बोझ अपने दिल और दिमाग पर ढ़ोते रहते हैं. क्षमा करना स्वयं को इस बेवज़ह के बोझ से मुक्ति प्रदान करना है. क्षमा करने से क्षमा पाने की तुलना में ज्यादा ख़ुशी और हल्कापन महसूस होता है. 

आज क्षमा दिवस के अवसर पर सबसे पहले मेरी क्षमा खुद से है. उन सभी गलतियों के लिए मैं खुद को माफ़ करना चाहती हूँ, जिन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मुझे, मेरी आत्मा को, मेरे व्यक्तित्व और मेरे चरित्र को क्षति पहुँचाई हो, इस संकल्प के साथ कि भविष्य में उनका दोहराव नहीं होगा. इसके पश्चात् मैं इस सृष्टि के समस्त जीवों से क्षमा याचना करती हूँ. जिन्हें भी मेरे शब्दों, मेरे व्यवहार या मेरे किसी भी कार्य से जरा भी ठेस पहुंची हो, हो सके तो वे मुझे माफ़ करें. साथ ही जिन्होंने भी मेरा दिल दुखाया है, उन सबके प्रति मन में उपजे नकारात्मक विचारों का त्याग करने की मैं सच्चे दिल से पूरी कोशिश करुँगी. क्षमत क्षमापना. मिच्छामी दुक्कड़म्.

By Monika Jain 'पंछी' 

How is this hindi essay about forgiveness. Feel free to share your views. 

Saturday, August 30, 2014

Dard Bhari Shayari in Hindi


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दर्द-ए-रूह

(1)

ना आसूंओं से छलकते हैं
ना कागज पर उतरते हैं 
दर्द कुछ होते हैं ऐसे 
जो बस भीतर ही भीतर पलते हैं.

(2)

खुशियों से कह दो दस्तक ना दे मेरे द्वारे
चाहकर भी स्वागत उनका मैं कर नहीं सकती
सपनों से कह दो ढूंढें कोई और आँखें 
नम हैं मेरी आँखें ख़्वाब देख नहीं सकती.

(3)

ख्वाईशें तुम्हारी, काश ! देख पाती मुश्किलें मेरी 
पर अपने अरमानों के आगे कहाँ कुछ सूझता है तुम्हें 
जो मर चुका है, उसे ज़िन्दा कर, फिर मार देने का तुम्हारा खेल 
कितना तड़पती होगी रूह मेरी, क्या कुछ पता है तुम्हें ?

(4)

कोशिशे आज भी जारी है हर वक्त मुस्कुराने की 
पर कमबख्त ये आँखे धोखा दे ही जाती है
कोशिशे आज भी जारी है जख्मों को छिपाने की 
पर ये कमबख्त दुनिया उन्हें कुरेद जाती है.

(5)

हर रात तेरे खयाल में सोती है 
हर सुबह तेरी आहट से होती है 
दर्द इतना दिया है तूने मुझको 
कि अब नींद में भी रूह मेरी रोती है. 

(6)

भरे थे जो आँखों की गहराइयों में कब से 
छिपाने की चाहत में बरबस बरस पड़े. 

(7)

ना बादलों के गरजने से, ना बिजलियों के कड़कने से 
सहम जाती हूँ, जब भीतर में एक चुप्पा सा शोर होता है
ना ना करके भी अक्सर सुन लेती है मेरी साँसे 
इस चुप्पी में छिपकर एक दिल बहुत रोता है

(8)

ना मंजिल, ना अरमान, ना ख़्वाब अब कोई 
जो दिल को दे सुकून, बस किये जा रहे हैं 
चलती है मेरी साँसे, कोई वजह तो होगी 
बस उस वजह की वजह से जिए जा रहे हैं.

By Monika Jain ‘पंछी’ 

How is this dard bhari (painful) shayari in hindi ? 


Thursday, August 28, 2014

Motivational Speech in Hindi


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उम्मीद पर ही दुनिया कायम है 

सपने टूटते हैं तो उन्हें टूटने दो. उनमें से एक टुकड़ा चुनो और फिर से सपने बुनो. उम्मीद का दामन कभी मत छोड़ो. आखिरी सांस तक नहीं. जो उम्मीद की नाव पर सवार होकर निकलोगे तो साहिल का मिलना तय है. मुश्किलें किसके रास्तों में नहीं ? परेशानियाँ किसके जीवन का हिस्सा नहीं ? दुःख तो सभी के हिस्से में है, पर इनसे पार उसी को मिल सकता है जो डर कर बैठा नहीं, जिसने लगातार कोशिश की, जिसने निराशा को खुद पर हावी नहीं होने दिया. जो हार कर भी कभी नहीं हारा सफलता उसी के सर चढ़ कर बोलती है. 

कहते हैं उम्मीद पर ही दुनिया कायम है. ये उम्मीद का ही करिश्मा है कि कल जो काम असंभव से लगते थे आज साकार हुए हैं. आशा गहरी अँधेरी रात में दीपक की जलती लौ के समान है. जिस दिन हम असफलता को सफलता की प्रेरणा के रूप में लेकर चलने लगेंगे उस दिन से ही हम सफलता के रास्ते पे कदम बढ़ाने लगेंगे. रात चाहे कितनी भी अँधेरी हो, चाहे कितनी भी लम्बी हो एक दिन उसे ढलना ही है, ये विश्वास ही हमें रोशनी की किरण दिखायेगा क्योंकि जीवन में मुश्किलें आती ही हैं हमें मजबूत बनाने के लिए. 

कई लोग हैं जिन्हें अपने जीवन से, अपने आसपास के माहौल से, लोगों से, परिस्थितियों से, सबसे शिकायत रहती है. नकारात्मकता उन पर हावी रहती है. अपनी असफलता के हजार कारण उनके पास रहते हैं. कुछ कहते हैं उन्हें सही मौका नहीं मिला, कुछ कहते हैं उनके पास संसाधनों का अभाव था, कुछ कहते हैं उन्हें कोई प्रोत्साहित करने वाला नहीं मिला. पर सकारात्मक दृष्टिकोण वाले तो प्रतिबंधों में भी अवसरों को ढूंढ निकालते हैं. वे बहाने कभी नहीं बनाते. वे तो पहाड़ों से भी अपनी राह बनाने का हुनर जानते हैं. वे रास्ते तलाशते नहीं रास्ते तराशते हैं. गिरते वे भी हैं पर उन्हें गिरकर खड़ा होना आता है. 

हम सबने हेलन केलर के बारे में सुना पढ़ा है. वे बचपन से ही बधिर और दृष्टिहीन थी. जिन्हें ३ वर्ष एक शब्द सीखने में लगे उन्होंने दर्जनों पुस्तकें लिखी , दो बार उन्होंने हवाई जहाज उड़ाया, विश्व भर में वे मानवता पर वार्ता के लिए बुलाई गयी. उन्होंने दोहरी विकलांगता के बावजूद दुनिया को एक नयी दिशा दी और सारी दुनिया में वे एक प्रेरक गुरु के रूप में जानी गयी. 

इसलिए आज से ही, बल्कि अभी से हमें अपने प्रति, अपनों के प्रति और इस सारे ब्रह्माण्ड के प्रति सकारात्मक सोच लानी होगी. दुनिया अच्छी है और हमें इसे और अच्छा बनाना है. हमें परिस्थितियों को कोसना नहीं उन्हें स्वीकार करना है, हर हाल में खुश रहना है और जहाँ बदलाव जरुरी है वहां अपनी उम्मीदों के बल पर बदलाव लाना है. दुःख के काँटों के बीच हमें सुख के फूल चुनने हैं. एक रास्ता बंद हो जाए तो हमें दूसरा रास्ता तलाशना है. चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें हमेशा तत्पर रहना है. अपनी मुस्कुराहटों में हमें जीवन लाना है और अपने उत्साह की किरणों से हमें सम्पूर्ण वातावरण को सजीव और मुखरित बनाना है. 

By Monika Jain ‘Panchi’ 

How is this motivational speech about the need of hope, self confidence, zeal and faith to fulfill your dreams ?


Friday, August 22, 2014

Poem on Sacrifice in Hindi


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ख़ामोश कुर्बानी

नफरत, गालियों और तानों के शोर में 
मैंने आखिर छिपा ही ली 
मोहब्बत तुझसे बेपनाह 
दबा दिया हर वो शब्द और अहसास 
जो था तुझसे मेरे इश्क का गवाह. 

इसे अपनी जीत कहूँ 
या कहूँ अपनी करारी हार 
जिसे ना हो नींद में भी 
ख़्वाबों को छूने की इजाजत 
उसे भला क्यों होता है प्यार ?

तुझे तो शायद कभी 
अहसास भी ना हो 
मेरी खामोश कुर्बानी का 
क्योंकि दिल में झांकना 
तूने कभी सीखा ही नहीं 
जो तुझे लग रहा था कड़वा
वह था बस मीठा
तीखा कभी था ही नहीं. 

तुझे नहीं बता सकती थी 
कभी भी नहीं 
कि तेरे बिन जीया नहीं जा सकता है 
तू चल देगा कभी भी कहीं ओर 
इसे नज़रंदाज़ भी तो नहीं किया जा सकता है. 

तेरे साथ प्यार हमेशा एक सजा रही 
तेरे बिना भी जीने की कोई वजह नहीं 
पर सजा से बेहतर है वजह का ना होना 
हर पल टूटने से कई बेहतर है
ताउम्र बिखरकर जीना. 

कड़वा, मीठा जो भी है, तेरी यादों का पिटारा 
उसे ही बना लूंगी मैं, अपने जीने का सहारा 
पर तेरे दिल में मैं हमेशा नफरत बनकर ही रहूंगी 
पीती रहूंगी अपनी खामोश कुर्बानी का दर्द 
पर तुझसे कभी कुछ भी ना कहूँगी. 
तुझसे कभी कुछ भी ना कहूँगी.

By Monika Jain ‘पंछी’

It’s very difficult to give up something that is meaningful and important to you. But some relationships are bound to break, so it’s better to break them at right time, instead of making them more bitter. How is this hindi poem about sacrifice in love ? Feel free to share your views via comments. 

Thursday, August 14, 2014

Poem on Dance in Hindi


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नृत्यमय 

कभी-कभी कहता है मन मयूरा 
थिरकती रहूँ मैं एक ताल पर 
अपनी आखिरी सांस तक.

क्योंकि मैं चाहती हूँ 
सदा के लिए खो जाना 
और इतना डूब जाना 
कि ये बाहरी दुनिया की घुटन 
मेरी साँसों को छू भी ना पाए. 

मैं चाहती हूँ 
उस दुनिया में पहुँच जाना 
जहाँ मेरी मुद्राएँ 
रचती है मेरा संसार 
और जहाँ थिरकते क़दमों से 
होती हुई मुस्कुराहट 
बस जाती है मेरे होठों पर 
और कराती है मुझे 
पूर्णता का अहसास. 

जहाँ आज़ादी का स्पर्श 
भर देता है रोम-रोम को 
हर्ष और उल्लास से 
बिन पंखों के भी होती है 
जहाँ उड़ान 
अदम्य उत्साह 
और विश्वास से. 

नृत्य अहसास है 
बहती हुई नदी से उगते हुए सूरज का 
पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण 
चहुँ ओर से 
हवाओं का स्पर्श पाने वाली 
आत्मा के उत्कर्ष का. 

जब थिरकते हैं कदम 
तो मेरे संग झूमते हैं 
फूल, पत्तियाँ और बहारें भी 
मेरी खुशियों के गवाह बनते हैं 
पर्वत, चाँद और सितारे भी. 

लगता है जैसे 
सारी वसुधा हो गयी हो 
नृत्यमय 
प्रत्येक कण, क्षण और जीवन 
झूम रहा है कुछ ऐसे 
कि नहीं पता अब मुझे 
क्या होता है भय. 

By Monika Jain ‘पंछी’

Dancing is beautiful, exciting and inspiring. It allows us to express what we are. It gives the feeling of perfection, freedom, immense pleasure, peace and satisfaction. It helps us to discover ourselves. It help us to pick, when we feel bad. While dancing we forget all our problems and stresses. It makes us feel connected, lively and energetic. When we dance we feel like flying bird. So to be free, to forget and to express let’s dance :) 

How is this poem about dance ? Feel free to tell via comments. 

Tuesday, August 12, 2014

Lemon Health Benefits in Hindi


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Lemon Health Benefits 
  • नींबू में पाया जाने वाला पोटैशियम रक्तचाप को नियंत्रित करता है और हमारे दिमाग को दुरुस्त रखता है.
  • नींबू में विटामिन सी होता है जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है.
  • नींबू पानी पीने से स्ट्रेस में आराम मिलता है. जब भी थकान हो एक गिलास नींबू पानी का सेवन करना चाहिए. यह शरीर को एनर्जी देने का खास जरिया है.
  • नींबू का रस यूरीन का उत्पादन बढ़ाता है और शरीर के अनचाहे तत्वों बाहर निकालता है. इससे यूरीनरी साइट्रेड बढ़ता है जिससे पथरी होने की संभावना कम हो जाती है. 
  • नींबू का रस रक्त का शुद्धिकरण करता है. बाजार की चीजों में मिले प्रिजर्वेटिव्स के असर को यह कम करता है. 
  • त्वचा के रंग को निखारने में भी यह उपयोगी है. चेहरे पर नींबू रगड़ने से स्क्रबिंग और क्लींजिंग दोनों हो जाते हैं. 
  • कई तरह के इन्फेक्शन दूर करने में भी इससे मदद मिलती है. गले में बैक्टीरिया की समस्या होने पर इससे दूर हो जाती है.
  • नींबू का रस एंटी एजिंग है क्योंकि यह फ्री रेडिकल्स के उत्पादन को रोकता है. 
  • दांतों में दर्द होने पर या मसूड़ों में खून आने पर नींबू के रस का सेवन करना चाहिए. 
  • अस्थमा के मरीजों के लिए भी नींबू लाभदायक है. यहाँ बलगम साफ़ करने में मदद करता है. यह खांसी में भी उपयोगी है.
  • प्रातः खाली पेट गुनगुने नींबू पानी का सेवन पेट के लिए अच्छा रहता है. नींबू का रस वजन कम करता है और डायरिया से बचाता है. 
  • नीम्बू पानी के कुल्ले करने से साँसों में ताजगी आती है. इसमें मौजूद साइट्रिक एसिड मुंह का पीएच लेवल ठीक रखता है.
  • सिर में दो चम्मच नीम्बू का रस लेकर मालिश करने से बालों में रूसी की समस्या दूर होती है.
  • नींबू की नयी पत्तियों का पेस्ट बनाकर और इसमें मुलतानी मिट्टी और चन्दन पाउडर मिलाकर मुहांसों पर लगाने से आराम मिलता है. रूखेपन की स्थिति में दही भी मिलाया जा सकता है. 
  • मुंहासे खत्म हो जाने के बाद रहे दाग धब्बों को दूर करने के लिए नींबू, ग्लिसरीन और गुलाबजल का मिश्रण बहुत उपयोगी है.
  • कच्चे दूध में नींबू का रस मिलाकर रुई की सहायता से चेहरे पर गोल-गोल घुमाते हुए साफ़ करने और कुछ देर बाद ठन्डे पानी से धोने से भी मुहांसे दूर होते हैं. 
  • इंस्टेंट गोरेपन के लिए नींबू और शहद का पैक 20 मिनट लगाकर रखें और फिर चेहरा धो लें या फिर बेसन, दूध और नींबू का पेस्ट लगायें और 10 मिनट बाद चेहरा धो लें. 
  • नींबू में पाया जाने वाला साइट्रिक एसिड मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है. यदि आप त्वचा पर टैग्स या मस्से की समस्या से परेशान हैं तो रुई को नीम्बू के रस में डुबोकर मस्से पर लगायें और कुछ समय बाद धो लें. ऐसा सप्ताह में 2-3 बार करें. धीरे-धीरे मस्सा कम होने लग जाएगा.
  • नहाते समय गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर रुई की सहायता से साफ़ करने से कोहनियों का कालापन दूर हो जाता है. 
  • नींबू के सूखे छिलकों का चूर्ण बनाकर, इसमें नमक मिलाकर टूथ पाउडर की तरह उपयोग करने से दांतों का पीलापन दूर होता है. 
Note : Consult your doctor before using any remedy stated here. If you are also aware about any other health benefits of lemon then feel free to submit here.

Monday, August 11, 2014

Moral Story in Hindi


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नयना 

मायूस सा चेहरा और कांपते से कदम उठाये वह अपने स्कूल की तरफ बढ़ रही थी. आज नयना का नए स्कूल में पहला दिन था. कुदरत ने भी क्या भद्दा मजाक किया था नयना के साथ. बचपन में एक हादसे में उसने अपनी एक आँख खो दी थी और एक तरफ का चेहरा पूरा जल गया था. तभी से हमेशा खिलखिला कर हँसते रहने वाली नयना के जीवन में उदासी छा गयी थी.

कई बार वह अपना उपहास बनते हुए देखती. अपने सहपाठियों को हँस-हँस कर कानों में फुसफुसाते हुए देखा था उसने. इन सब बातों ने उसके मनोबल और आत्मविश्वास को खत्म सा कर दिया था. पर एक चीज ऐसी थी जो नयना में नयी स्फूर्ति भर देती थी. वह था नृत्य से उसका लगाव. मानो नृत्य में उसकी आत्मा बसती हो. नयना घंटों अकेले कमरे में नृत्य का अभ्यास करती थी. नृत्य ही उसके जीवन में अब उसका सबसे सच्चा और अच्छा साथी था.

नयना के नए स्कूल में एक जिला स्तरीय नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन होने वाला था. जब क्लास में एक टीचर नृत्य प्रतियोगिता में इच्छुक विद्यार्थियों के नाम लिखने आई तो नयना से बड़ी हिम्मत से अपना हाथ खड़ा किया. अध्यापिका विचित्र सी नजरों से उसे घूरकर और नाम लिखकर चली गयी. पीछे से एक छात्र बोला, ‘ अब यह एक आँख वाली डांस करेगी. कहीं किसी से टकराकर गिर पड़ी तो.’ उस लड़के की बात सुन क्लास के सभी विद्यार्थी जोर-जोर से हंसने लगे. नयना को रोना आ गया.

विद्यालय की ओर से प्रतिनिधित्व करने के लिए एक छात्र/छात्रा को नृत्य के लिए चुना जाना था. अगले दिन सभी रूचि रखने वाले विद्यार्थियों को बारी-बारी से अपनी प्रस्तुति देने के लिए कहा गया. आखिर में नयना की बारी थी. पर उसका नाम आते ही टीचर ने कहा, ‘आज समय खत्म हो चुका है और नृत्य प्रतियोगिता के लिए उमा को चुन लिया गया है.’ यह कहकर अध्यापिका चली गयी. नयना उदास मन से घर आ गयी.

नृत्य प्रतियोगिता का दिन भी आ गया. उमा जिसे प्रस्तुति देनी थी वह नयना की पड़ौसी थी और उसने नृत्य के कई गुर नयना से ही सीखे थे. वह जानती थी नृत्य में नयना का कोई सानी नहीं था. उमा प्रतियोगी कक्ष में पहुँच गयी. तैयार होने में उसकी मदद के लिए नयना उसके साथ थी. अचानक उमा का पाँव फिसल गया और उसके पाँव में भयंकर मोच आ गयी. वह ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी. अपने दर्द से ज्यादा उसे इस बात का भय सता रहा था कि अब वह नृत्य कैसे करेगी और टीचर से क्या कहेगी. उसमें किसी को भी चोट के बारे में बताने की हिम्मत नहीं थी. अचानक उसकी नज़र नयना पर पड़ी. उसने नयना से कहा, ‘तुम तुरंत मेरी पोशाक पहन लो और तैयार हो जाओ. आज मेरी जगह तुम्हें ही नृत्य करना होगा.’ यह कहते हुए उसने पोशाक नयना के हाथों में थमा दी.

नयना के हाथ कांपने लगे. उसके अन्दर छिपी प्रतिभा बाहर आने को छटपटाने लगी पर वह इतना साहस नहीं जुटा पा रही थी कि उमा की जगह नृत्य करने चली जाए. जब उमा रोने लगी तो नयना को वह पोशाक पहननी पड़ी. उसने जब दर्पण में अपना चेहरा देखा तो उसका मनोबल फिर गिरने लगा. लेकिन उमा के आसुंओं को देखकर उसने अपनी आँखों पर एक पट्टी बाँधी और जब उमा का नाम पुकारा गया तो वह मंच पर चली आई.

संगीत बजता इससे पहले ही उसने नृत्य करना शुरू कर दिया. उसके घुँघरू वैसे भी संगीत की ही रचना कर रहे थे. किसी को आभास भी नहीं हुआ कि संगीत नहीं बज रहा. उसकी प्रस्तुति में सभी मंत्र मुग्ध हो गए. ऐसा लग रहा था मानों वर्षों से नयना के ह्रदय में बसा तूफ़ान आज नृत्य के माध्यम से निकल रहा था. अपमान के कड़वे घूंट पीते-पीते जो दुःख, दर्द और रोष उसके अन्दर बसा था आज उसकी दासता उसका नृत्य सुना रहा था. बहुत देर हो गयी पर उसके पाँव नहीं रुके.

नयना की माँ भी नृत्य प्रतियोगिता देखने वहां आई थी. माँ की नज़र नयना के पांवों से बहते खून पर पड़ी. वह दौड़कर तुरंत मंच पर पहुंची और अपनी बेटी को गले से लगा लिया. माँ का स्पर्श पाते ही अपनी आँखों पर बंधी पट्टी हटाकर नयना फफक-फफककर रो पड़ी और बोली, ‘माँ, ईश्वर ने मुझसे मेरी सुन्दरता क्यों छीन ली ? मैं थक चुकी हूँ लोगों के ताने सुन-सुनकर. मेरे साथ से सभी को शर्म महसूस होती है. इससे पहले कि सब मुझपे हंसने लगे आप मुझे घर ले चलो.’

माइक की वजह से नयना की आवाज़ सभी को सुनाई पड़ रही थी. उसका उपहास करने वाले सभी विद्यार्थी और अध्यापिका शर्म से सर नीचे झुकाए खड़े थे. सभागार जो पहले नयना की प्रस्तुति देखकर तालियों की घड़घड़ाहट से गूँज रहा था, नयना के शब्द सुनकर चारों तरफ चुप्पी छा गयी और सभी की आँखें भर आई.

प्रतियोगिता का मूल्यांकन करने वाली जज महोदया अपनी कुर्सी से खड़ी हुई और नयना को गले लगाकर बोली ‘बेटी, तुम कुरूप नहीं तुम तो सुन्दरता का प्रतीक हो. तुम्हारे नृत्य की सुन्दरता ने सभी का मन मोह लिया है. तुम तो इस विद्यालय के प्रांगण में चमकने वाला सूरज हो, इस विद्यालय का सम्मान हो.’

यह कहकर जज महोदया ने जैसे ही प्रथम पुरस्कार की घोषणा करने के लिए माइक हाथ में लिया, चारों ओर से नयना-नयना के स्वर सुनाई देने लगे. जज महोदया ने नयना के हाथ में पुरस्कार थमाया और प्यार से उसके सर पर हाथ फेर उसे आगामी जीवन के लिए शुभकामनाएं दी. इतना प्यार और सम्मान देखकर नयना ख़ुशी से फूली नहीं समा रही थी. अब वह विद्यालय में सबकी चहेती बन गयी थी. नृत्य ने उसे नया जीवन जो दे दिया था. 

By Monika Jain ‘पंछी’

How is this moral story about real beauty ? 


Saturday, August 9, 2014

Beauty Tips for Hands and Legs in Hindi


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Hands and Legs Beauty Tips 
  • हाथ, पैर फटने की समस्या होने पर ग्लिसरीन युक्त साबुन का इस्तेमाल करना चाहिए. जहाँ स्किन काली पड़ चुकी है, उसे अच्छी तरह साफ़ करने के बाद मोइश्चराइजिंग क्रीम का उपयोग करना चाहिए. 
  • गुनगुने पानी में नीम्बू का रस डालकर उसमें पांच मिनट अपनी अँगुलियों को डाले रखे. उसके बाद नीम्बू के छिलके नाखूनों पर रगड़े, नाखूनों में चमक आ जाएगी. 
  • एक तिहाई भाग ग्लिसरीन में दो तिहाई भाग गुलाबजल मिलाकर एक बोतल में भर दें. इस मिश्रण का रोजाना हाथों पर मसाज करने से हाथ मुलायम बनते हैं. 
  • एक बड़े प्याले में दो कप गर्म पानी, एक कप सेब का सिरका और तीन चम्मच जैतून का तेल लें. इस मिश्रण में हाथों को 10 मिनट तक डालें और फिर अच्छी तरह से सुखा लें. अगर हाथ में किसी तरह की चोट लगी हो तो इसका इस्तेमाल ना करें. सिरका त्वचा के हल्के से अम्लीय पी एच को संतुलित करता है. जिससे हाथों की नमी बनी रहती है और हाथ नर्म तथा मुलायम रहते हैं. जैतून के तेल में पॉलीफिनोल एंटीऑक्सीड़ेंट्स होते हैं जो स्वस्थ कोशिका के निर्माण को बढ़ावा देते हैं. 
  • पाँव अगर नीचे से फटते हो तो गुनगुने पानी में पैर डुबोकर बैठना चाहिए. बिवाई फटने की दशा में तिल के तेल में कच्ची हल्दी और नीम के पत्ते अच्छी तरह गर्म करने के बाद, ठंडा होने पर उस मिश्रण को फटे हुए स्थान पर लगाना चाहिए. 
  • एक जार में ½ कप नारियल तेल, 1¼ कप चीनी और दो बड़े चम्मच नींबू का रस लें. अब इन्हें अच्छी तरह से मिलाएं. इस स्क्रब का ¼ भाग लेकर अँगुलियों की मदद से एड़ियों पर गोल-गोल घुमाते हुए 20 से 30 सेकंड तक मालिश करें. इसके बाद पानी से धो लें और पैरों को सुखा लें. शेष भाग को अगले दिनों में काम में लें. नीबू में उपस्थित साइट्रिक एसिड एड़ियों की सूखी और मृत त्वचा को मुलायम बनाता है. चीनी इस मुलायम हुई मृत त्वचा को जगह से हटाने का काम करती है उर नारियल तेल जो कि फैटी एसिड से भरपूर होते हैं वे पैरों की नमी को बनाये रखते हैं और मॉइश्चर बरकरार रखता है. 
  • अगर एड़ियाँ फटी हुई हो तो रात में एड़ियों पर पेट्रोलियम जैली लगायें और मोज़े पहनकर सो जाएँ. सुबह धो लें. कुछ दिन लगातार इसे करें. 
  • नारियल तेल में हल्दी मिलाकर लगाने से भी फटी एड़ियों में आराम मिलता है. इसमें एलोवेरा जेल भी मिलाया जा सकता है. जले हुए स्थान पर भी इसे लगा सकते हैं. 
  • राई का पाउडर अदरक के पेस्ट में मिलाकर पैरों को साफ़ किया जा सकता है. 
  • सर्दियों में हाथों के दास्ताने और पैरों में मोजे पहनने चाहिए. गुनगुने पानी से रोजाना हाथ पैरों की सफाई करनी चाहिए. 
  • नहाने से आधा घंटा पहले पहले हाथ पैरों पर एलोवेरा का गूदा या सरसों और तिल का तेल मल सकते हैं. 
  • हरी सब्जियाँ, सूखे मेवे, अंगूर, नाशपाती, अनार, अमरुद, केला, पपीता, सेब, संतरा आदि फलों का सेवन करें. हर रोज एक आंवले का सेवन करें. 
Note : Consult your doctor before using any remedy stated here. If you are also aware about any other home remedies for cracked hands, heel and feet, then feel free to submit here.

Monday, August 4, 2014

Poem on Education in Hindi


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हम हैं पढ़े लिखे अनपढ़

हम पढ़े लिखे सभ्य
अपनी ए. सी. गाड़ियों में चलते हुए
फेंकते है कूड़ा करकट सड़कों पर
मानो फ़ेंक रहे हैं 
अपनी नकली सभ्यता का 
मुखौटा उतार कर. 

हम पढ़े लिखे साक्षर
'यहाँ थूकना मना है' पढ़कर भी
सालों से वहीँ थूकते आ रहे हैं
मानो थूक रहें हैं
अपने साक्षर होने के 
प्रमाण पत्र पर. 

हम पढ़े लिखे शिक्षित
डॉक्टर, इंजीनियर, सीए बनकर
बिकते हैं दहेज़ के बाजार में ऊँचे दामों पर
हम तो उनसे भी आगे हैं जो
बेचती है अपने शरीर को
रोटी के दो टुकड़ों की चाह में.

क्या सच में हैं हम सभ्य?
क्या सच में हैं हम शिक्षित ?
क्या सच में हैं हम साक्षर ?
नहीं, हम हैं पढ़े लिखे अनपढ़.
हाँ, हम हैं पढ़े लिखे अनपढ़. 

By Monika Jain 'पंछी' 

Lack of proper education is the reason of all sorts of evils in our country. Earlier learning was closely linked to nature and life. But the modern education system is confined to classrooms only, so the link with nature is broken. Education should develop a spirit of rational thinking among people but todays education just help the students to acquire degrees and jobs. Current education system is not able to teach moral values, ethics and humanity. Teaching moral values is very necessary for the overall development of a person. It includes discipline, manners, control over oneself, love, care, sensitivity, politeness, speaking truth, no stealing, being a good citizen, patriotism etc. To make the children responsible citizens, moral values should be imparted through education. Only then we can fulfill the dream of making India incredible. 

How is this poem about today’s education system ?

Coconut Health Benefits in Hindi


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Coconut Health Benefits 
  • नारियल का वानस्पतिक नाम 'फोकस न्यूसीफेरा' है. 
  • नारियल पानी को धरती पर पानी के पश्चात् सबसे स्वच्छ चीज माना गया है. 
  • नारियल पानी हमारी रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है. यह एक अच्छा एनर्जी बूस्टर है. 
  • नारियल पानी में विटामिन, मिनरल, इलेक्ट्रोलाइट्स, एंजाइम्स, एमिनो एसिड और साइटोकाइन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं.
  • नारियल का पानी हल्का, प्यास बुझाने वाला, वीर्यवर्धक, अग्नि को प्रदीप्त करने वाला और मूत्र संस्थान के लिए लाभदायक होता है. 
  • नारियल पानी महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी बहुत उपयोगी माना जाता है.
  • नियमित रूप से नारियल पानी का सेवन करने से त्वचा पर बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम किया जा सकता है. इसके सेवन से त्वचा ताजा और युवा दिखाई देती है. नारियल पानी को चेहरे पर लगाने से त्वचा कांतिमय हो जाती है.
  • रात्रि भोजन के पश्चात् रोजाना 1/2 गिलास नारियल पानी पीने से पाचन प्रणाली सशक्त बनती है. यह अनिद्रा के लिए भी लाभकारी है. 
  • आधा गिलास नारियल पानी में पिसा हुआ जीरा मिलाकर पीने से गर्मी की वजह से होने वाले दस्त में तुरंत राहत मिलती है. नारियल पानी पेट में ठंडक पहुंचता है.
  • पेट में दर्द होने या गैस बनने पर नारियल के पानी का सेवन करना चाहिए. इससे उल्टी में भी राहत मिलती है. 
  • आधासीसी के दर्द में भी नारियल पानी उपयोगी है. इसके लिए नारियल के पानी की 2-2 बूंदे कुछ दिनों तक सुबह-शाम नाक में टपकानी चाहिए. 
  • नारियल पानी के सेवन से डिहाइड्रेशन नहीं होता, जो बालों में रूसी होने से बचाता है. 
  • नारियल पानी का सेवन पेशाब में जलन को दूर करता है और मोटापा घटाने में भी सहायक है.
  • नकसीर और मुंह के छालों में भी नारियल फायदेमंद है. 
  • याद्दाश्त बढ़ाने के लिए नारियल की गिरी में बादाम, मिश्री और अखरोट मिलाकर सेवन करना चाहिए.
  • नारियल की कच्ची गिरी पेट के रोगों में लाभदायक होती है. नारियल का पानी पीकर कच्चा नारियल खाने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं. 
  • नारियल के गूदे को चेहरे पर मलने से चेहरे के दाग-धब्बें दूर होते हैं और चेहरे पर निखार आता है. 
  • नारियल तेल में बहुत सारे पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं. इसमें 92 % सैचुरेटेड फैट होता है. इसमें वही वसा होती है जो माँ के दूध में होती है. यह तेल का पाचन बहुत जल्दी होता है. 
  • नारियल के तेल में कपूर मिलाकर त्वचा पर लगाने से दाद, खाज, खुजली आदि की शिकायत दूर होती है. 
  • त्वचा के जल जाने पर भी उस स्थान पर तुरंत नारियल का तेल लगाया जाना चाहिए. 
Note : किसी भी तरह का उपचार / उपाय अपनाने से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें. बिना चिकित्सीय सलाह के किसी भी औषधि का सेवन ना करें. 

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