Sunday, February 28, 2016

Short Sad Love Story in Hindi

Short Sad Love Story in Hindi. Heart Touching Stories, Prem Kahani, Pyar Laghu Kahaniyan, Break Up Katha, Ishq, Parting Tale, Mohabbat, Painful Separation Small Tales. लघु कहानियां, प्रेम कहानी.
 
अधूरी प्रेम कहानियां...
 
(1)

तुम्हें याद रह गए सिर्फ कड़वे शब्द और मेरे जेहन में समा गया था तुम्हारा मीठापन. जबकि अक्सर तुम कह जाते थे, बहुत मीठी है मेरी बातें और अक्सर मुझे लग जाते थे तुम थोड़े से सख्त. मेरी खोज उस सख्ती में छिपी नर्माहट की रही और शायद तुम्हें ढूँढना था मुझमें कड़वाहट को. जिसे जिसकी तलाश थी उसमें वही बाकी रह गया. देखो न तभी तो मैं नहीं तोड़ पायी आज तक नेह का वह बंधन जिसे तुम यह कहकर छिटक गए कि तुम्हें नहीं चाहिए कोई भी नकारात्मकता. और मुझे आज तक एक छोटी सी बात पर यह 'तोड़ना' सकारात्मक नहीं लग पाया.
 
(2)

तुम अकेले आज भी नहीं हो. क्या हुआ जो तुमने कहा था गर है मुझे तुमसे प्रेम तो मैं तुम्हें कभी नजर न आऊँ. मैं घुल गयी थी हवाओं में और आज भी गर्मी के भीषण ताप में शीतल हवाओं के झोंके बन छू जाती हूँ तुम्हें...ताकि पहुँचा सकूँ तुम तक थोड़ी शीतलता. क्या हुआ जो तुमने कहा था गर है मुझे प्रेम तो मैं तुमसे कभी बात न करूँ. मैं बन गयी थी बरगद के पेड़ के चबूतरे का वह सन्नाटा जहाँ तुम अक्सर तुम अपने मन को शांत करने चले आते हो. क्या हुआ जो तुमने कहा था मैं तुम्हें कुछ भी लिखकर न भेजूं. मैंने बंद कर दिए हैं शब्दों के सारे संवाद तुमसे पर वह जो कोयल रोज तुम्हारे घर के सामने पेड़ पर बैठकर घंटों कूंकती हैं न?...वह मेरा मन पढ़कर उड़ी चली आती है तुम्हारे पास. सुना है उसे सुनकर तुम्हें बहुत अच्छा लगता है.
 
(3)

तुमने हमेशा दुनिया की आँखों से मुझे पढ़ा. बस एक बार...सिर्फ एक बार...मेरी आँखों को पढ़ा होता. बहुत कुछ उन ब्लेंक स्पेसेस में भी लिखा होता है...जो शब्दों के बीच छोड़े जाते हैं.
 
 (4)
 
उसका प्रेम खरा था, पर जब सारी दुनिया से उपजी निराशा का ठीकरा उसके सर फोड़ा गया तो वह खुद को निराशा के गहरे सागर में डूबने से नहीं बचा पायी. जब उसकी भावनाओं को दुनिया के सामने दांव पर लगाया गया तो वह अपना आत्मसम्मान भी खोने लगी. हर बार प्रेम के बदले मिली नफरत और तिरस्कार ने उसे खुद से नफरत करना सिखा दिया. जब प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हर गलती का जिम्मेदार उसे ठहराया गया तो वह बेवजह का अपराध बोध पालने लगी. वह मनहूस है, वह विपदा लाने वाली है, ऐसे अहसासों ने उसका आत्मविश्वास डिगा कर रख दिया. गलती मेरी है, गलती मेरी ही है... यह रटते-रटते वह एक दिन खुद को ही गलती मान बैठी. उसने बचपन में स्कूल की कापियों में सीखा था गलतियों को मिटाया जाता है, उन्हें काटा जाता है, उन्हें फाड़ दिया जाता है. उसने खुद के साथ भी वही किया. उसने खुद को मिटा दिया. काश! उसने जो वाकई में गलत लोगों से प्यार करने की गलती को सही किया होता.
 
 
By Monika Jain ‘पंछी’

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